Home » इंडिया » International court stays Pakistan's order to execute Kulbhushan Jadhav
 

कुलभूषण जाधव की फांसी की सज़ा पर इंटरनेशनल कोर्ट ने लगाई रोक

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 May 2017, 11:14 IST

कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट ने रोक लगा दी है. भारत ने पाकिस्तान की सैन्य अदालत के इस फैसले के खिलाफ हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में 8 मई को अपील की थी. इस मामले में इंटरनेशनल कोर्ट के आदेश को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय अदालत की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत ने इस मामले में पाकिस्तान पर विएना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया था. भारत की ओर से दायर अपील में यह भी बताया गया था कि कुलभूषण जाधव को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और ना ही उन्हें भारत के उच्चायोग अधिकारियों से मिलने की इजाजत दी गई. 

आईसीजे से की गई अपील में भारत ने  इस बात पर जोर दिया है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था. भारत ने कहा कि जाधव भारतीय नौसेना से रिटायर्ड होने के बाद ईरान में बिजनेस के सिलसिले में गए हुए थे.

ICJ के अध्यक्ष रोनी अब्राहम ने पाकिस्तान सरकार को एक पत्र लिख कर कहा है कि वह इस तरह कार्रवाई करे, जिससे इस मामले में जारी होने वाले अदालत के किसी आदेश का क्रियान्वयन संभव हो सके. भारत की अपील पर आईसीजे ने जाधव को मिली फांसी की सजा के तामील पर स्थगन लगा दिया है.

कुलभूषण जाधव की फांसी पर इंटरनेशनल कोर्ट की रोक के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा, "अंतरराष्ट्रीय अदालत ने ये फैसला रूल ऑफ कोर्ट के पैरा-4 के अनुच्छेद 74 के तहत सुनाया है. जाधव की मां को इस फैसले की जानकारी दे दी गई है." सुषमा के मुताबिक सीनियर वकील हरीश साल्वे इस मामले में भारत की पैरवी कर रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्तान से कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया. पाकिस्तान का दावा था कि जाधव बलूचिस्तान और कराची में आतंकवाद फैलाने का काम कर रहे थे.

वहीं, भारत का दावा था कि जाधव को अगवा किया गया है. गिरफ्तारी के बाद भारतीय उच्चायोग ने दर्जनों बार उनसे मिलने की इजाजत मांगी थी. लेकिन पाकिस्तान ने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार करते हुए इसकी इजाजत नहीं दी. 10 अप्रैल 2017 को अचानक खबर आई कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा दे दी है. 

कुलभूषण जाधव को फांसी मिलने के बाद भारत ने इस मसले पर कड़ा रुख़ अपनाया था. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि जाधव को छुड़वाने के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा. भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त को कई बार तलब कर जाधव से मिलने की इजाजत मांगी थी. भारत की सरकार जाधव को बचाने के लिए पाकिस्तान की कानूनी व्यवस्था में मौजूद विकल्पों पर भी गौर कर रही थी.

बलूचिस्तान में जासूसी का आरोप

10 अप्रैल को पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया, "भारतीय रॉ एजेंट/नेवल ऑफिसर 41558Z कमांडर कुलभूषण सुधीर जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्‍तान के मश्‍केल क्षेत्र से काउंटर इंटेलिजेंस ऑपरेशन के जरिए गिरफ्तार किया गया था. उसे पाकिस्तान में जासूसी करने और गड़बड़ी फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पकड़ा गया था." 

आईएसपीआर के बयान में कहा गया है, "उन्होंने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने ये स्वीकार किया है कि रॉ की योजना के तहत जासूसी और गड़बड़ी की गतिविधियों के साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ते हुए उसे अस्थिर करने की कोशिश की थी. बलूचिस्तान और कराची में कानून व्यवस्था और शांति को बरकरार रखने वाली एजेंसियों के रास्ते में जाधव ने रोड़ा अटकाया."

पाकिस्तान हमेशा ये कहता रहा है कि कुलभूषण जाधव भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट हैं. हालांकि भारत पाकिस्तान के आरोपों को नकारता आया है. भारत ने कुलभूषण जाधव को इंडियन नेवी का रिटायर्ड ऑफिसर माना है. इससे पहले पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने कुलभूषण जाधव का एक 6 मिनट का वीडियो भी जारी किया था.

First published: 10 May 2017, 11:14 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी