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International Tiger Day 2020: भारत में बढ़ रही है बाघों की संख्या, जिम कॉर्बेट पार्क में सबसे ज्यादा बाघ

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 July 2020, 9:59 IST

International Tiger Day 2020: दुनियाभर में आज अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जा रहा है. बाघों के संरक्षण के लिए मनाए जाने वाले इस दिवस के मौके पर दुनियाभर के देश अपने यहां बाघों की संख्या के बारे में जानकारियां सार्वजनिक करते हैं. भारत ने भी देश में बाघों की संख्या के आंकड़े जारी किए हैं. जो बताते हैं कि आने वाले दिनों में देश में बाघों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो सकती है. फिलहाल देश में कुल 2,967 बाघ मौजूद हैं जिनमें से 231 केवल उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में मौजूद है. इसी के साथ जिम कॉर्बेट पार्क भारत में बाघों की संख्या के मामले में सबसे ऊपर है.

मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ये रिपोर्ट जारी कर इस बारे में जानकारी दी. इससे पहले कॉर्बेट नेशनल पार्क में मौजूद बाघों की संख्या साल 2006 में 137 थी जो साल 2010 में बढ़कर 174 हो गई. उसके बाद साल 2014 में ये संख्या बढ़कर 215 हो गई. कॉर्बेट पार्क के निर्देशक राहुल को उम्मीद थी कि बाघों की संख्या उसके बाद बढ़कर 250 होती लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जिन कॉर्बेट पार्क के बाद बाघों की सबसे अधिक संख्यां कर्नाटक के नगरहोल में 127 और बांदीपुर में 126 है. उसके बाद मध्य प्रदेश के बांधवगडढ और फिर असम के काजीरंगा नेशनल पार्क (104) में सबसे अधिक बाघों की संख्या है.


मध्य प्रदेश के अलग-अलग टाइगर्स रिजर्व में सबसे अधिक 526 बाघ मौजूूद है. जो देश में किसी एक राज्य में सबसे अधिक हैं. पिछली बार मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 308 थी. वहीं कर्नाटक में पहले बाघों की संख्या 406 हुआ करती थी जो अब बढ़कर 524 हो गई है. एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया के 70 फीसदी बाघों का घर भारत उनकी संख्या को पांच गुना तक और बढ़ा सकता है. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक संरक्षित आवास के निर्माण, सुरक्षित गलियारे और संसाधनों पर खर्च के जरिये भारत 10-15 हजार बाघों को रखने में सक्षम है.

उनका कहना है कि हमें बाघों की घनी आबादी वाले कुछेक इलाकों पर ही ज्यादा ध्यान न देकर अन्य संभावित क्षेत्रों के विकास पर भी जोर देना चाहिए. वरना अभी की तरह 50 टाइगर रिजर्वों में से केवल 10 से 12 में ही बाघों की संख्या अधिक बनी रहेगी और बाकी पिछड़ते चले जाएंगे. यही नहीं विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि अभी देशभर में बाघों के आवास गलियारों को हाईवे, सड़कों, बिजली लाइनों और खनन जैसी गतिविधियों से भारी खतरा रहता है. लिहाजा, सरकारों को विकास और संरक्षण के बीच संतुलन की नीति पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

ताजा सर्वे रिपोर्ट बताती है कि देश में करीब 3.81 लाख वर्ग किमी क्षेत्र बाघों के लिए उपयुक्त है, जबकि करीब 90 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में ही बाघों की मौजूदगी है. यानी बाघों के आवास का दायरा बढ़ाने की काफी गुंजाइश है, जिससे बाघों की संख्या में खुद ही इजाफा होने लगेगा. वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के मुताबिक,, दुनियाभर में पिछले साल तक 3,900 बाघ थे. 20वीं सदी की शुरुआत से बाघों की 95 फीसदी आबादी खत्म हो गई है. वाइल्डलाइफ फंड का अनुमान है कि 100 साल पहले धरती पर एक लाख बाघ थे. 1947 में अनुमानित तौर पर देश में बाघों की संख्या करीब 40,000 थी.

First published: 29 July 2020, 9:59 IST
 
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