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INX मीडिया केस : चिदंबरम के वकीलों सिब्बल और सिंघवी ने CBI कोर्ट में दी ये दलीलें

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 August 2019, 18:00 IST
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INX मीडिया मामले में आज पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम को सीबीआई की अदालत में पेश किया गया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई के लिए कोर्ट में बहस करते हुए पी चिदंबरम की 5 दिन की हिरासत की मांग की. सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि सीबीआई के आवेदन पर एक गैर जमानती वारंट जारी किया गया था और उसी आधार पर चिदंबरम की गिरफ्तारी की गई. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा चुप्पी का अधिकार संवैधानिक अधिकार है और इसमें कोई समस्या नही है लेकिन वह सहयोग नही कर रहे थे. इसलिए उनसे पूछताछ करना लाजिमी था.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई के लिए कोर्ट में बहस करते हुए कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है. हम अभी चार्जशीट दाखिल करने से पहले की स्टेज में हैं. कपिल सिब्बल ने पी चिदंबरम के लिए कोर्ट में बहस करते हुए कहा कि इस मामले में आरोपी कार्ति चिदंबरम हैं, जिन्हें मार्च 2018 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने नियमित जमानत दे दी थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई. अन्य आरोपियों को भी जमानत मिल गई थी.


सिब्बल ने कहा कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी 6 सचिवों द्वारा दी गई, किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है. यह दस्तावेजी साक्ष्य का मामला है. चिदंबरम कभी पूछताछ से पीछे नहीं हटे. सिब्बल ने कहा ''चिदंबरम ने सीबीआई से कहा कि मैं रात भर सोया नहीं हूं, इस वक्त रहने दीजिए और सुबह गिरफ्तार कर लीजिए लेकिन सीबीआई नहीं मानी.''

 

सिब्बल ने कहा ''कल रात सीबीआई ने कहा कि वे चिदंबरम से पूछताछ करना चाहते थे, उन्होंने दोपहर 12 बजे तक पूछताछ शुरू नहीं की और उनसे केवल 12 सवाल पूछे. अब तक उन्हें पता होना चाहिए कि क्या सवाल पूछे जाएं. सवालों का चिदंबरम से कोई लेना-देना नहीं था. सिब्बल ने कहा यह ऐसा मामला है, जिसका सबूतों से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन मामला कुछ और ही है.

इस दौरान सिब्बल ने कहा अगर एक न्यायाधीश ने निर्णय देने के लिए सात महीने का समय लिया है (चिदंबरम की अग्रिम जमानत को खारिज करते हुए दिल्ली HC का फैसला) तो क्या फैसला चिदंबरम के पक्ष में होगा. इस मामले में चिदंबरम की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा CBI का पूरा मामला इंद्राणी मुखर्जी के साक्ष्य और केस डायरी पर आधारित है.

इस दौरान सिंघवी ने कहा CBI कहती है कि वह सहयोग नही कर रहे है. अगर जांच एजेंसी मुझे पांच बार बुलाती है और मैं नही जाता हूं यह असहयोग है, ये असहयोग नही कि मैं उनकी पसंद के जवाब नही दे रहा हूं. जो वे सुनना चाहते हैं. जब पी चिदंबरम ने अदालत में कहा कि वह बोलना चाहते हैं, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई और कहा कि उनका प्रतिनिधित्व दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा किया जा रहा है.

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First published: 22 August 2019, 17:28 IST
 
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