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अयोध्या मामले में ईराक से आया फतवा, राम-मंदिर को लेकर वसीम रिज़वी ने कही ये बात

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 October 2018, 9:42 IST

देश में एक तरह जहां चुनावी माहौल गर्माता है वहीं दूसरी तरफ अयोध्या के राम मंदिर का मसला जोर पकड़ने लगता है. अयोध्या भूमि विवाद मसले में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी के बदले हुए बोल और भी ज्यादा मुख़ार होते जा रहे हैं. रिज़वी ने अपने दावे को साबित करने के लिए अब इराक से फतवा मंगवाया है. इराक़ से आये इस फतवे में कहा गया है कि किसी भी विवादित संपत्ति पर मस्जिद जायज नहीं है. इतना ही नहीं रिज़वी ने अपने लिए भी एक फतवा मंगवाया है. ये साफ़ कहा गया है कि इस्लाम से खारिज करने का अधिकार किसी मौलाना और मौलवी को नहीं है.

गौरतलब है कि वसीम रिजवी ने इराक के शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह आगा-ए-शीस्तानी पूछा था कि क्या विवादित भूमि पर मस्जिद बनाई जा सकती है? इस पर इराक़ से ये जवाब दिया गया कि इस्लाम में किसी भी विवादित जमीन पर मस्जिद बनाने की इजाजत नहीं है.

गौरतलब यही कि वसीम रिजवी लगातार इस बात की मुहिम चला रहे हैं कि अयोध्या में बनी बाबरी मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई गई थी, इसलिए इस मस्जिद को वहां से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर बोलने को लेकर वसीम रिजवी पर आरोप लगा था कि वह अपने मन से राम जन्मभूमि के मामले में दखल दे रहे हैं. इस आरोप के बाद ही 31 अगस्त को वसीम रिजवी ने आयतुल्लाह आगा-ए-शीस्तानी से मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए जाने पर उनकी राय मांगी थी.

गौरतलब है कि हाल ही में वसीम रिजवी के राम मंदिर मुद्दे पर इस तरह की बयानबाजी को लेकर शिया समुदाय ने इस्लाम से खारिज कर दिया गया था. लखनऊ में शिया मौलाना ने रिजवी को इस्लाम से खारिज किया था. रिज़वी ने इस मामले में भी आयतुल्लाह आगा-ए-शीस्तानी से फतवा मांगा था. जिसके अनुसार किसी भी नमाज पढ़ने वाले मुसलमान को इस्लाम से खारिज करने का हक किसी मौलाना और मौलवी को नहीं है.

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रिजवी ने कहा है कि आयतुल्लाह आगा-ए-शीस्तानी का फतवा पूरी दुनिया में माना जाता है. और अब जब इराक़ से ये फतवा आ गया है तो ऐसे में मुस्लिम समाज के लोगों को अयोध्या मामले में कुछ नहीं कहना चाहिए.

First published: 11 October 2018, 9:42 IST
 
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