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रेलवे की रंगदारी: भारतीय रेल और आईआरसीटीसी पर एक ही रूट का अलग-अलग किराया

अनिल चमड़िया | Updated on: 22 December 2016, 11:52 IST

देश के वितमंत्री रेलवे की क्या इसीलिए तारीफ कर रहे हैं क्योंकि रेलवे में तरह तरह से उपभोक्ताओं को भूल भलैया में डालकर पैसे बटोरे जा रहे हैं? सरकार का जोर डिजिटलीकरण पर है, कैशलेस पर जोर है. लेकिन आईआरसीटीसी की साइट पर जो लोग कैशलेस होकर टिकट खरीदना चाहते हैं उनसे खुलेआम अलग-अलग मदो में मोटा पैसा वसूल रही है.

आईआरसीटीसी की बेवसाईट के जरिये टिकट लेने और टिकट खिड़की से टिकट लेने में किराये के भुगतान में सौ से डेढ़ सौ रूपए तक का अंतर आ जाता है तो दूसरी तरफ टिकट वापसी के नाम पर उपभोक्ताओं का अंधाधुंध पैसा काट लेने की कहानियां तकलीफ देने लगी है. यहां जो एक नमूना पेश किया जा रहा है वह अपने आप में वित्रित्र है.

हमने नमूने के तौर भारतीय रेलवे की वेबसाईट और आईआरसीटीसी की वेबसाईट में किराये के अंतर को समझने के लिए 28 नवंबर 2016 को लखनऊ से दिल्ली जाने के लिए टिकट लेने की प्रक्रिया शुरू की. इस प्रक्रिया के तहत पहले हमने भारतीय रेलवे की वेबसाईट पर लखनऊ से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेनों और उसके किराये के सबंध में जानकारी ली.

28 नंबर के लिए स्वर्ण शताब्दी से लखनऊ से दिल्ली तक चेयर कार (सीसी) का किराया वहां 676 बताया गया लेकिन जब आईआरसीटीसी की साईट पर अपने खाते के जरिये टिकट बुक कराने की प्रक्रिया शुरू की तो वहां चेयर कार श्रेणी का किराया 674 रुपया बताया गया. लेकिन आईआरसीटीसी की साईट पर भले ही किराया दो रूपये कम बताया गया लेकिन लखनऊ से दिल्ली तक के लिए उपभोक्ता से किराये की कुल राशि भारतीय रेल की साईट से काफी ज्यादा बतायी गई. आईआरसीटीसी की बेवसाईट पर जहां कुल किराया 1250 रूपये बताया गया वहीं भारतीय रेल की साईट पर कुल किराया 970 रुपये ही बताया गया . यानी एक टिकट पर 280 रूपये का फर्क है. यह कैशलेस व्यवस्था का सच है.

भारतीय रेल की साईट और आईआरसीटीसी की वेबसाईट पर किराये में इस अंतर का हिसाब किताब भी बेहद दिलचस्प हैं. आईआरसीटीसी की वेबसाईट पर सर्विस टैक्स उपभोक्ताओं के लिए 46 रुपये है तो भारतीय रेल की साईट पर मात्र चौंतीस रुपये है. यानी एक टिकट पर 12 रूपये का अंतर हैं. आईआरसीटीसी ने इसके अलावा अपनी साईट पर सवर्ण जयंती में डायनैमिक शुल्क के रुप में 270 रूपया दर्शाया है जो कि भारतीय रेल की वेबसाईट पर नहीं हैं. आईआरसीटीसी ने 270 रूपये का डायनैमिक शुल्क को दर्शाते हुए यह भी दर्ज किया है कि टिकट की बुकिंग कराते समय यह किराया और भी बढ़ सकता है.

भारतीय रेलवे की यह वेबसाईट भारतीय रेल यात्री आरक्षण संबंधित नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराती है. इस साईट से टिकट नहीं खरीदा जा सकता है. जबकि आईआरसीटीसी भारतीय रेल की एक कंपनी है और उसकी साईट पर उपभोक्ताओं ने अपने अपने खाते खोल रखे हैं. उन खातों के जरिये ही आईआरसीटीसी से टिकट खरीदने और उसका डिजिटल भुगतान करने की व्यवस्था है. लेकिन यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं के लिए टिकट खिड़की के मुकाबले महंगी है.

आईआरसीटीसी की साईट पर उपभोक्ता नगद भुगतान नहीं करता है तो उसका एक भिन्न मनोविज्ञान टिकट लेते वक्त सक्रिय रहता है. वहां टिकट खिड़की के मुकाबले कितना ज्यादा किराया वसूला जा रहा है इसकी भी पड़ताल करने की जरूरत नहीं देखी जाती है. डिजिटल भुगतान करने वाला उपभोक्ता टिकट खरीदने और बर्थ सुनिश्चित कराने के दबाव में रहता है और वह टिकट खिड़की के मुकाबले ज्यादा भुगतान कर देता है.

कैशलेस को बढ़ावा दे रही सरकार की दोहरी विडंबना यहां देखने को मिलती है. एक तो खिड़की से टिकट लेने के लिए उसके पास कोई कैशलेक स्वाइप मशीन नहीं लगी है लिहाजा खिड़की पर लोगों को नगद लेनदेन करना मजबूरी है. दूसरी तरफ आईआरसीटीसी का विकल्प है जहां कैशलेस टिकट खरीदने वाले यात्री से मोटा पैसा अलग से वसूला जा रहा है यानी उसके लिए कोई प्रोत्साहन योजना नहीं है.

First published: 22 December 2016, 11:52 IST
 
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