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जयाप्रदा के अपमान से विचलित हुए अमर सिंह क्या सच में देंगे इस्तीफा

अतुल चंद्रा | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST

अक्सर कहा जाता है कि उप्र में पांच-पांच मुख्यमंत्री हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अगर किसी से खतरा है तो अपने ही परिवार के लोगों से है जो उम्र और अनुभव में उनसे बड़े हैं. अभी कुछ दिन पहले ही पार्टी में वापसी करने वाले और राज्यसभा में सपा सांसद बने अमर सिंह गुस्से में हैं.

गुस्से में बोलते हुए अमर सिंह ने कहा है कि अखिलेश को फोन करो तो वे फोन नहीं उठाते. बलराम यादव और शिवपाल यादव जैसे वरिष्ठ मंत्रियों को पार्टी में अपमानित किया जाता है. खुद उन्हें राज्यसभा में नरेश अग्रवाल और रामगोपाल यादव के पीछे बैठाया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, सपा में अंदरूनी सत्ता-संघर्ष के हालात संगीन होते जा रहे हैं.

बताते चलें कि सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्री शिवपाल यादव ने अमर सिंह और जयाप्रदा की पार्टी में वापसी में गहरी भूमिका निभाई थी. इन दोनों लोगों को 2010 में पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया था. पार्टी के सूत्र बताते हैं कि अमर सिंह की वापसी शिवपाल और मुलायम सिंह की खास एक महिला आईएएस अधिकारी की मदद के चलते ही हो सकी थी. 

सपा मुखिया के एक अन्य भाई रामगोपाल यादव, जो पार्टी महासचिव और राज्यसभा में पार्टी के नेता हैं, के अलावा राज्य के ताकतवर संसदीय कार्यमंत्री आजम खान ने उन्हें वापस लिए जाने का कड़ा विरोध किया था. शिवपाल को खुश करने के लिए अमर सिंह ने उनके पुत्र की शादी का रिसेप्शन समारोह दिल्ली में आयोजित किया था. कथित तौर पर अमर सिंह इसी बहाने शिवपाल को अपने संबंधों और संपर्कों की काबिलियत का एहसास कराना चाहते थे.

लेकिन वर्तमान में सपा में जो चल रहा है, उसका पहले किसी को आभास नहीं हुआ होगा. अमर सिंह के कभी अंबानी परिवार और अमिताभ बच्चन के परिवार से घरेलू रिश्ते थे. अब अमर की इन दोनों परिवारों से अनबन चल रही है. अब मुलायम सिंह के परिवार से भी उनका वैमनस्य हो गया है. यही बात सहारा परिवार के मुखिया सुब्रत सहारा के बारे में भी कही जा सकती है. संयोग तो यह है कि यह सब उनके पार्टी में वापसी के बाद हुआ.

राजनीति के अपने शुरुआती दिनों में एक बिचौलिये की पहचान रखने वाले अमर सिंह की इकलौती प्रतिभा है उनकी बड़े संपर्कों को बनाने और उसे भुनाने की क्षमता. अपनी इसी खासियत, विशिष्टता के कारण वह बिना किसी आधार के आश्चर्यजनक रूप से राजनीतिक सीढ़ियां चढ़ते गए. 

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि समाजवादी पार्टी से अपने निष्कासन के बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोकमंच बना लिया था. उन्होंने 2012 के उप्र के विधानसभा चुनावों में 360 प्रत्याशी खड़े किए थे लेकिन उनके दल को तगड़ा झटका लगा था. पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी.

वर्ष 2014 में वह राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए. उन्होंने फतेहपुर सीकरी से संसदीय चुनाव लड़ा, पर हार गए. उनका राजनीतिक पुनरुत्थान राज्यसभा के जरिए हुआ. रामगोपाल, आजम खान और जया बच्चन को बाईपास करते हुए उन्होंने शिवपाल का दामन थामा और राज्यसभा में चले गए. 

वर्ष 2010 में पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अमरसिंह ने पार्टी विशेषकर रामगोपाल को निशाने पर लिया था. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि रामगोपाल मुझे पार्टी नेता होना नहीं पसन्द करते थे. अपने एक पत्र में उन्होंने मुझे मुलायम सिंह का सहयोगी बताया था.

तब मुलायम सिंह पर तीखा हमला करते हुए अमर सिंह ने सपा प्रमुख को पुचकारू यानी खुशामद पसन्द व्यक्ति और अवसरवादी बताया था. अमर सिंह ने मुलायम सिंह की खिंचाई करते हुए यह भी कहा था कि एक तरफ मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ित परेशान हैं तो दूसरी ओर उन्होंने सैफई में तीन पीढ़ियों के साथ माधुरी दीक्षित के नाच और गाने का रातभर आनन्द लिया.

लेकिन अपने हाल के बयान में उन्होंने खुद को मुलायमवादी होने की बात एक बार फिर से दोहराई है, न कि समाजवादी होने की.

समाजवादी पार्टी से अपने पूर्व के जुड़ाव के दौरान, जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे, उन्होंने आजम खान और सुब्रत राय सहारा से भी दुश्मनी मोल ले ली थी.

लेकिन राजनीति की विडम्बना है कि गत 21जून को मुख्‍तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया था. मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव ने बाकायदा इसका ऐलान किया था लेकिन अखिलेश यादव के भारी विरोध करने के चलते चार दिन बाद ही 25 जून को विलय को रद्द करने की घोषणा कर दी गई. मुलायम ने ही विलय को मंजूरी दी थी. अब कहा गया है कि विलय नहीं, गठबंधन होगा. सपा में चल रहे घमासान से स्पष्ट संकेत है कि बुजुर्गवार मिलकर युवा मुख्यमंत्री को बाहर करने का खेल रच रहे हैं. दबाव बनाया जा रहा है कि मुलायम सिंह या शिवपाल को मुख्यमंत्री बनाया जा सके.

हाल ही में जब शिवपाल ने अपने इस्ताफे की यह कहते हुए धमकी दी कि अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे हैं और उनके आदेशों को नकार रहे हैं, मुलायम सिंह तुरन्त ही अपने छोटे भाई के बचाव में उतर आए. उन्होंने अपने भाई के पक्ष में कहा कि वह ही एकमात्र ऐसे मंत्री हैं जो काम कर रहे हैं. उन्होंने अखिलेश और रामगोपाल को यह भी चेतावनी दी कि यदि शिवपाल ने इस्तीफा दे दिया तो पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

अमर सिंह के इस्तीफे से केवल सपा को धक्का नहीं लगेगा वरन अखिलेश पर भी छीटे आएंगे. अमर सिंह और शिवपाल को मिलकर मुलायम का हाथ मजबूत करना था लेकिन दोनों शायद उन्हें कमजोर कर रहे हैं. 

First published: 25 August 2016, 7:51 IST
 
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