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12 जरूरी सवाल जो अर्णब गोस्वामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना भूल गए

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 28 June 2016, 13:40 IST

सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के बाद पिछले दो सालों में पहली बार किसी भारतीय न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया है. 'टाइम्स नॉउ' चैनल के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को दिए करीब डेढ़ घंटे के इंटरव्यू में पीएम मोदी ने विभिन्न मुद्दों पर बात की है.

अर्णब गोस्वामी अपने तीखे तेवर और सतत सवालों के लिए जाने जाते हैं. हालांकि उनका यह इंटरव्यू उनकी खुद की छवि के लिए एक धक्का सरीखा है. व्यवहार में भी और सवालों के मामले में भी. अपनी छवि के विपरीत वे पीएम के साथ बेहद शांत और सहज दिख रहे थे जो कि एक अच्छा संकेत माना जाएगा, उनके पुराने उग्र तेवरों के मद्देनजर.

लेकिन उनके पुराने तेवरोंं के लिहाज से उनके सवाल निराशाजनक कहे जाएंगे. उनके इंटरव्यू में कुछ ज्वलंत सवालों को नजरअंदाज कर दिया गया, कुछ सवालो को लीडिंंग अंदाज में पूछा गया मानो वे जो सुनना चाहते थे वही प्रधानमंत्री भी पंसद करते थे. एक और खासियत यह रही कि अर्णब गोस्वामी पूरे इंटरव्यू में मुद्दा दर मुद्दा आगे बढ़ते रहे, बिना किसी क्रॉस सवाल जवाब के, बिना क्रिटिकल सवाल किए वे आगे बढ़ते रहे.

पिछले साल एनडीए सरकार के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने विभिन्न मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिया था. इस बार उन्होंने सिर्फ वॉल स्ट्रीट जरनल को सरकार के दो साल पूरे होने पर इंटरव्यू दिया है. लेकिन पिछले एक साल में कई ऐसी घटनाएं हुई जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठे हैं.

ऐसे तमाम सवाल जो प्रधानमंत्री से अर्णब ने नहीं किए वे हम यहां रख रहे हैं इस बात की उम्मीद किए बिना कि प्रधानमंत्री इसका जवाब देंगे:

1) कैराना मामला:

पीएम मोदी ने इस इंटरव्यू में कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास के मुद्दे पर बात होनी चाहिए. लेकिन पार्टी से सांसद, विधायक और पार्टी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के कैराना में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें में लगे हुए हैं. कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने कुछ दिन पहले यहां से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था जो सही नहीं निकला.

2) उत्तराखंड राष्ट्रपति शासन:

बीजेपी सरकार पर राज्य सरकारों को अस्थिर करने के आरोप लगे. उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाकर सरकारें गिराने की कोशिश की गई.

3) डिग्री विवाद:

पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर विवाद गहरा गया. उनके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ आरोप लगा कि उन्होंने चुनाव आयोग को वर्ष 2004 और 2014 के आम चुनावों में अपनी डिग्री के बारे में अलग-अलग हलफनामें दिए थे.

4) चेतन चौहान और गजेंद्र चौहान की नियुक्ति:

हाल में राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलोजी संस्थान (निफ्ट) में क्रिकेटर से राजनेता बने चेतन चौहान की नियुक्ति पर सवाल उठे. इसके अलावा पुणे स्थित फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के अध्यक्ष बने गजेंद्र चौहान के खिलाफ छात्रों ने लंबा आंदोलन चलाया.

5) एस्सार लीक्स:

हाल ही में उजागर हुए इस टेपकांड ने एक बार फिर से राजनीति और कॉरपोरेट जगत की मिलीभगत के संकेत दिए हैं. इस टेपकांड में कई नेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और बिचौलियों की बातचीत सामने आई है. पूर्ववर्ती एनडीए सरकार के कार्यकाल में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कई मंत्री इस टेपकांड की चपेट में हैं. लेकिन इतने संगीन मसले पर अर्णब ने एक भी सवाल नहीं किया.

6) ललित मोदी स्कैंडल:

आईपीएल में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपी ललित मोदी को ब्रिटिश यात्रा दस्तावेज दिलाने में 'मदद' करने के आरोप में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम सामने आया था.

7) व्यापम घोटाला:

पिछले साल बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाला सामने आया था. इन घोटालों से जुड़े करीब 50 लोगों की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है. शुरुआत में इसमें कई नेताओं के नाम उछले थे लेकिन हालिया चार्जशीट में किसी भी नेता का नाम इसमें शामिल नहीं है.

8) बीफ पर प्रतिबंध:

पिछले साल दिल्ली से सटे दादरी इलाके में भीड़ ने ईद के मौके पर बीफ रखने के शक में अखलाक नाम के व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी और उसके बेटे को अधमरा कर दिया. इसके बाद भी बीफ को लेकर लगातार हिंसा की खबरें आती रहीं.

9) रोहित वेमुला आत्महत्या:

हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता बंडारू दत्तात्रेय और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की भूमिका संदेहास्पद पाई गई. वेमुला ने कथित तौर पर प्रशासन के रवैये से तंग आकर 18 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी. बीजेपी पर दलित विरोधी होने का आरोप लग रहा है.

10) चीनी नेता का वीजा रद्द करना:

इसी साल अप्रैल महीने में चीन के असंतुष्ट नेता डोल्कुन ईसा का वीजा रद्द करने के बाद भारत ने चीन की एक अन्य असंतुष्ट नेता लु जिंगुआ और कार्यकर्ता आर. वांग का वीजा भी रद्द कर दिया. माना गया है कि भारत इन असंतुष्ट नेताओं को वीजा देकर चीन से नाराजगी मोल नहीं चाहता था.

11) नेपाल संबंध:

नेपाल में संविधान को लेकर मधेशी समुदाय के चितांओं के बीच भारत और नेपाल के संबंधों को झटका लगा. पिछले साल नेपाल ने भारत पर नाकाबंदी लागू करने का आरोप लगाया था जिससे नेपाल में जरूरी सामान की आपूर्ति रुक गई थी. हाल के दिनों में नेपाल का झुकाव चीन की ओर बढ़ा है और भारत की नीति धाराशायी हो चुकी है.

12) लव जिहाद:

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी नेताओं ने खतरनाक तरीके से लोगों को धार्मिक आधार पर लामबंद करने की कोशिश की. इनमें योगी आदित्यनाथ सबसे आगे थे जिन्होंने लव जिहाद का मुद्दा उठाया.

First published: 28 June 2016, 13:40 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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