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एस्सार लीक्सः मोदी तो 'चुप' हैं लेकिन केजरीवाल भी कहां पहले सा 'बोले हैं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 June 2016, 8:14 IST

कथित तौर पर एस्सार समूह की तरफ से देश के प्रमुख कारोबारियों, अफसरों और नेताओं की बातचीत को रिकॉर्ड कराने के मामले में वैसा हंगामा नहीं दिख रहा जैसा नीरा राडिया टेप मामले में मचा था.

जबकि ये फोन रिकॉर्डिंग (2001 से 2006 के बीच) कथित तौर पर राडिया टेप से पहले ही की है और इन रिकॉर्डिंग में जिस तरह की सामग्री सामने आई है वो राडिया टेप से कम विस्फोटक नहीं है.

एस्सार लीक पर ज्यादा चर्चा न होने की एक बड़ी वजह इसकी टाइमिंग भी है. राडिया टेप जब सामने आया था तो 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' (आईएसी) से निकला नया-नवेला राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी अपनी जमीन तलाश रही थी. पार्टी की बुनियाद ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर बनी थी. राडिया टेप पार्टी के एजेंडे में बिल्कुल फिट बैठता था.

एस्सार लीक्स: ये मत पूछिए किस-किस का नाम है, ये पूछिए किसका नहीं है

पार्टी के गठन के चंद हफ्तों बाद ही 31 अक्टूबर 2012 को पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और प्रशांत भूषण ने एक पत्रकार वार्ता करके सार्वजनिक तौर पर राडिया टेप की कुछ क्लिपिंग सुनाईं. 

केजरीवाल ने उस पत्रकार वार्ता में कहा था कि राडिया टेप से राजनीति और कार्पोरेट के बीच का भ्रष्टाचार उजागर हो गया है. उन्होंने मुकेश अंबानी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए. 

अरविंद केजरीवाल की उस प्रेस वार्ता का वीडियो आप इस लिंक पर देख सकते हैं

2013 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने. 11 फरवरी 2014 को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के एंटी-करप्शन ब्रांच को मुकेश अंबानी समेत कइयों पर केजी बेसिन गैस मामले में सरकारी खजाने को चुना लगाने के लिए एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा. 

हालांकि एफआईआर दर्ज होने के तीन दिन बाद ही 14 फरवरी को उन्होंने दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. मुकेश अंबानी ने एसीबी के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट से इस एफआईआर को रद्द करने की मांग की. जबकि एसीबी ने अदालत से कहा कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है.

2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल ने मुकेश अंबानी का कथित विदेशी खाता नंबर जनता को बताया था. केजरीवाल के तेवर कुछ ऐसे थे जैसे देश में वो एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों के गोरखधंधों को उजागर कर सकता है. उनसे सीधी टक्कर ले सकता है.

मई 2014 में केंद्र में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी. जुलाई में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी करके दिल्ली के एंटी-करप्शन ब्रांच के अधिकार क्षेत्र को सीमित कर दिया. आम आदमी पार्टी के नेताओं ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर मुकेश अंबानी को बचाने का आरोप लगाया.

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फरवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए तो आम आदमी पार्टी ने विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया. दिल्ली की 70 सीटों वाली विधान सभा में उनकी पार्टी को 67 सीटों पर जीत मिली. अरविंद केजरीवाल दोबारा प्रचंड बहुमत वाली सरकार के मुख्यमंत्री बने. 

इस बार केजरीवाल थोड़े बदले-बदले मुख्यमंत्री थे. उनके कामकाज का तरीका भी पहले से बदला था. सत्ता में आने के एक साल के अंदर उनके कई मंत्री और विधायक विवादों में घिरे. पार्टी अंदरूनी कलह की भी शिकार बनी.

बदले हुए माहौल में एक बड़ा बदलाव ये भी दिखा कि इस बार केजरीवाल और उनकी पार्टी ने अंबानी और राडिया टेप का मुद्दा लगभग भुला दिया. (केजरीवाल ने अंबानी को कैसे भुलाया तारीखवार ब्योरे के लिए देखें द कारवां का ये लेख

राडिया टेप का मुद्दा मीडिया से लगभग गायब हो चुका है. किसी अन्य राजनीतिक दल को इसे उछालते रहने में कोई रुचि नहीं थी. राडिया टेप का जिन्न अपनी कब्र में आखिरी सांसे ले ही रहा था कि एस्सार लीक्स के रूप में नया फ़ोन टैपिंग विवाद सामने आ गया.

इस कथित एस्सार लीक्स में भी कथित तौर पर सबसे ज्यादा अंबानी परिवार (मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी और टीना अंबानी) के फोन रिकॉर्ड किए गए हैं. 

एस्सार लीक्स: पूर्व कर्मचारी ने वकील सुरेन उप्पल के दावे को बताया झूठा

एस्सार समूह और अंबानी समूह की कारोबारी अदावत दशकों पुरानी है. इसलिए इस कथित फ़ोन टैपिंग का जाल अंबानी परिवार के ईर्दगर्द बुने होने पर किसी को हैरत नहीं हुई. लोगों को हैरत इस बात पर हुई कि इतने बड़े खुलासे के बाद भी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस मामले पर लगभग चुप हैं.

आम आदमी पार्टी, दिल्ली में अपने ट्विटर से एस्सार लीक्स पर नरेंद्र मोदी को लगातार घेर रही है. पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने एस्सार से जुड़े ट्वीट शेयर किए हैं. आम आदमी पार्टी अपने ट्वीट में ModiMumOnEssarLeaks (मोदी की एस्सार पर चुप्पी) हैशटैग भी इस्तेमाल कर रही है लेकिन केजरीवाल की चुप्पी पर पार्टी चुप है.

एस्सार लीक्स: अगर ये टेप सच हैं तो देश में कोर्ट, संसद और अधिकारी सब कुछ कॉर्पोरेट की जेब में है

ऐसा भी नहीं है कि केजरीवाल ट्विटर से दूर हैं. वो लगातार ट्वीट कर रहे हैं. पिछले चौबीस घंटों में वो बादल परिवार को 'उड़ता पंजाब' देखने की राय देने से लेकर 'नरेंद्र मोदी के चमचों' की सूची तक जारी कर चुके हैं लेकिन एस्सार लीक्स उनका ध्यान नहीं खींच पा रहा है.

केजरीवाल देश के भर के मुद्दों पर त्वरित राय देने के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में उनके इस रवैये से अटकलों को बल मिल रहा है. कुछ लोग इस चुप्पी का तार सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण द्वारा आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व पत्रकार आशीष खेतान के एस्सार के लाभार्थी होने के आरोप से जोड़ रहे हैं. 

अप्रैल 2015 में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव समेत कई नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया था. उसके बाद प्रशांत के साथियों और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. 

उस दौरान प्रशांत ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता आशीष खेतान पर 2-जी घोटाले में एस्सार के लिए पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट लिखने का आरोप लगाया था. जबकि खेतान ने इस आरोप से इनकार किया था.

देखें वीडियो जिसमें प्रशांत भूषण आशीष खेतान पर आरोप लगा रहे हैं

(राडिया टेप को सामने लाने में प्रशांत भूषण की अहम भूमिका रही थी. वहीं 2-जी घोटाले के मामले में भी वो एस्सार इत्यादि आरोपी कंपनियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.)

बहरहाल, भ्रष्टाचार की सफाई के लिए झाडू़ उठाने वाले सीएम केजरीवाल का अंबानी और एस्सार के मौजूदा मुद्दे पर जो रुख है उससे फ़िराक़ गोरखपुरी का शेर याद आता है, 

अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं यूँ ही कभी लब खोले हैं

पहले "फ़िराक़" को देखा होता अब तो बहुत कम बोले हैं.

कैच एस्सार लीक्स में सामने अाई  बातचीत की पुष्टि नहीं कर सका है.

First published: 19 June 2016, 8:14 IST
 
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