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एक आैर बाढ़ के मुहाने पर खडा है बिहार

निहार गोखले | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
(पीटीआई)
QUICK PILL
  • गंगा की सहायक नदी पर बना बाणसागर बांध पूरी तरह से भर चुका है आैर अगर इस बांध से पानी छोडा जाता है तो पहले से ही बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिहार काे एक अन्य बाढ का सामना करना पडेगा.
  • बाणसागर का निर्माण सोन नदी पर किया गया है. यह नदी पटना के पहले गंगा में मिलती है. बांध मध्य प्रदेश में बना है आैर इस साल हुइ जबरदस्त बारिश से यह पूरी तरह भर चुका है. लेकिन जब बांध पूरी तरह सेे भरा तब भी अधिकारियों ने समय रहते इसके पानी को छोड़ने की जरूरत नहीं समझी.

क्या बिहार एक आैर बाढ़ की चपेट में आने वाला है? गंगा की सहायक नदी पर बना बाणसागर बांध पूरी तरह से भर चुका है आैर अगर इस बांध से पानी छोड़ा जाता है तो बिहार काे एक अन्य बाढ़ का सामना करना पडेगा.

बाणसागर का निर्माण सोन नदी पर किया गया है. यह नदी पटना के पहले गंगा में मिलती है. बांध मध्य प्रदेश में बना है आैर इस साल हुइ जबरदस्त बारिश से यह पूरी तरह भर चुका है. लेकिन जब बांध पूरी तरह सेे भरा तब भी अधिकारियों ने समय रहते इसके पानी को छोड़ने की जरूरत नहीं समझी.

इसलिए जब 18 अगस्त को बांध पूरी तरह से भर गया तो उनके पास बडी मा़त्रा में पानी छोड़ने के अलावा कोई आैर विकल्प नहीं था. बांध से 15,800 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का स्तर तेजी से बढ़ गया.

अब इसके बाद लगातार भारी बारिश से जलाशय पूरी तरह भर चुका है आैर यह पिछले सप्ताह के जलस्तर पर आ चुका है. 26 अगस्त दोपहर को बाणसागर बांध का स्तर 341.04 मीटर था जो पूरा भरने के बाद के स्तर से महज 0.6 मीटर नीचे है. यह 18 अगस्त के स्तर से काफी ऊपर है. बांध में फिलहाल 4,949 मिलियन क्यूसेक पानी है आैर यह पिछले एक साल का अधिकतम स्तर है. बांध में कुल पानी की मात्रा 5,166 मिलियन क्यूसेक समा सकती है.

लगातार भारी बारिश से जलाशय पूरी तरह भर चुका है आैर यह पिछले सप्ताह के जलस्तर पर आ चुका है

आदर्श स्थिति में बांध मानूसन में भर जाता है आैर इस पानी का इस्तेमाल सर्दियों आैर गर्मियों में किया जाता है. भारी बारिश की स्थिति में इस पानी को चरणबद्घ तरीके से छोडा जाता है ताकि बांध में अतिरिक्त पानी को जमा किया जा सके. अगर इस पानी का इस्तेमाल सूखे के दौरान कर लिया जाता तो बांध में अतिरिक्त पानी समाहित किया जा सकता था. लेकिन एेसा नहीं हो सका. बांध से इस दौरान करीब 1700 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा सका.

हिमांशु ठक्कर बताते हैं कि जब बांध को 25 जून को भरने की शुरुआत हुई थी तब यह एक तिहाई भरा हुआ था. उन्होंने कहा कि अगर इस पानी का इस्तेमाल सूखे के दौरान कर लिया जाता तो बांध में अतिरिक्त जगह होती आैर पिछले सप्ताह पानी छोड़ने की जरूरत नहीं होगी.

ठक्कर ने हाल ही में एक ब्लाॅग में लिखा, 'जब मानसून में छह सप्ताह से अधिक का समय बचा हुआ था तब बांध को 96 फीसदी भरने की क्या जरूरत थी. पहले क्यों अधिक पानी नहीं छोड़ा गया जब ताकि बाद में होने वाली बढ़ोतरी को संभाली जा सकता.'

वास्तव में मध्य प्रदेश के अधिकांश बांधोें की यही कहानी है. इंदिरा सागर बांध भी करीब 90 फीसदी तक भर चुका है. मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग के इंजीनियर इन चीफ एजी चौबे बताते हैं कि यह अचानक हुइ बढ़ोतरी नहीं है. उन्होंने कहा, 'हम 2000 क्यूसेक से बढकर 7000 क्यूसेक तक पहुंचे हैं.'

चौबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश आैर झारखंड में भारी बारिश के अलावा बिहार में बाढ़ के कई कारण हैं. उन्होंने कहा कि वह पानी छोड़े जाने से पहले बिहार में अपने समकक्ष अधिकारियों से बात कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि जब तक बाणसागर बांध में बारिश नहीं होेती है तब तक इसका पानी छोड़े जाने की कोई जरूरत नहीं है.

वास्तव में मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में बाणसागर बांध इलाके में बारिश की चेतावनी दी है. नासा भी इन आंकड़ों की पुष्टि कर चुका है.

First published: 27 August 2016, 8:06 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

संवाददाता, कैच न्यूज़. जल, जंगल, पर्यावरण समेत नीतिगत विषयों पर लिखते हैं.

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