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ऐसे तो मुरथल बलात्कार कांड का सच कभी सामने नहीं आएगा

राजीव खन्ना | Updated on: 19 March 2016, 8:37 IST
QUICK PILL
  • हरियाणा सरकार की रिपोर्ट के बाद मुरथल में हुए सामूहिक बलात्कार का मामला किसी नतीजे पर पहुंचता नहीं दिख रहा है. सरकार का कहना है कि मुरथल में सामूहिक बलात्कार के सबूत नहीं मिले है.
  • सिविल सोसाएटी का मानना है कि सरकार इस मामले को दबा रही है क्योंकि सच्चाई सामने आने पर सरकार की छवि खराब होगी. उनका कहना है कि इससे दोषियों के बीच गलत संदेश जाएगा कि वह कुछ भी गलत कर आसानी से बच सकते हैं.

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में हुए कथित सामूहिक बलात्कार कांड का मामला किसी नतीजे पर पहुंचता नहीं दिख रहा है. हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार को बता दिया है कि बलात्कार को लेकर मीडिया में आई खबरें झूठी थीं. 

राज्य सरकार ने हालांकि इस बात को माना है कि कुछ महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की घटना हुई. सरकार के इस बयान के बाद सिविल सोसाएटी ने कई सवाल उठाते हुए इस मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की है. 

पिछले महीने मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट के बाद मुरथल सामूहिक बलात्कार कांड रहस्य बना हुआ है. सरकार और पुलिस इससे मानने से इनकार करती रही है क्योंकि उन्हें अभी तक इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है.

सोनीपत के एसपी अभिषेक गर्ग के नेतृत्व में गई टीम को महिलाओं के अंर्तवस्त्र मिले थे जिसके बाद बलात्कार के कयास लगाए जा रहे थे. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया जिसके बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया.

विरोधाभासी रिपोर्ट

सामूहिक बलात्कार की खबर सामने आने के साथ ही इस बारे में कई तरह की विरोधाभासी खबरें सामने आने लगी थी. हरियाणा के प्रिंसपल सेक्रेटरी की अगुवाई में मौके का मुआयान करने गई टीम को भी कुछ हाथ नहीं लगा था. 

यहां तक कि राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम को भी मौका ए वारदात से कोई सबूत नहीं मिला था. इसके अलावा स्वतंत्र समूहों और मीडियाकर्मियों को भी सामूहिक बलात्कार कांड के बारे में कोई सबूत नहीं मिला.

कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा की खारित नहीं बोलने का विकल्प चुना वहीं कुछ लोगों ने माना कि महिलाओं के साथ बदतमीजी की गई और उनका यौन उत्पीड़न किया गया.

हरियाणा सरकार ने साफ कर दिया है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में बलात्कार की घटना नहीं हुई थी

इस बीच दिल्ली के नरेला में रहने वाली एक महिला ने कहा कि सात लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया जिसमें उसके ब्रदर इन लॉ भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि वह 22 और 23 फरवरी की रात को अपनी बेटी के साथ हरिद्वार से नई दिल्ली आ रही थी. उन्होंने एक निजी वाहन लिया जिसमें अन्य लोग भी बैठे हुए थे.

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मुरथल के पास गाड़ी रोकी गई और करीब सात युवाओं ने उन्हें और उनकी बेटी को गाड़ी से बाहर निकाला. फिर उन्हें वह लोग पास में कहीं ले जाकर उनके साथ बलात्कार किया. और उनकी बेटी के साथ छेड़छाड़ की.

महिला सोनीपत के जठेरी गांव की रहने वाली हैं.

पुलिस सूत्रों ने कहा कि महिला की शिकायत के आधार पर दर्ज किए गए मामले को रद्द कर दिया गया है क्योंकि उनकी शिकायत झूठी थी.

हरियाणा सरकार के केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब इस घटना की सच्चाई सामने आएगी, इसके बारे में कहना मुश्किल है.

जब महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हुई तब राज्य देश से करीब 36 घंटों के लिए पूरी तरह से कटा हुआ था

घटनास्थल का दौरा करने गई टीम में शामिल रहे और जन संघर्ष मंच हरियाणा के कार्यकर्ता ने कहा, 'ऐसा लग रहा है कि मामले को दबाया जा रहा है. पुलिस को इससे पहले महिलाओं के कपड़े मिले थे. अब वह कह रहे हैं कि कपड़े दुकान से लूटे गए थे और फिर उन्हें खेतों में फेंक दिया गया. कोई भी व्यक्ति नए और पुराने कपड़ों में फर्क कर सकता है. दूसरी बात खेतों में सिर्फ महिलाओं के ही कपड़े फेंके गए. अगर दुकान लूटी गई होती तो उसमें महिलाओं के अलावा और कपड़े भी होते.'

इससे पहले सिविल सोसाइटी पुलिस के दावे पर ऐतराज जता चुकी है. उन्होंने कहा कि इस समुदाय की महिलाएं आम तौर पर अंर्तवस्त्र नहीं पहनती हैं जिसकी बरामदगी खेतों से हुई है.

जेएसएम की कार्यकर्ता सुनीता त्यागी ने कहा, 'केवल न्यायिक आयोग से इस मामले की सच्चाई सामने आ सकती है.' एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स पंजाब के प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने कहा, 'फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के जज के नेतृत्व में जांच की जा रही है. जब महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएं हुई तब राज्य देश से करीब 36 घंटों के लिए पूरी तरह से कटा हुआ था. और जब जांच शुरू हुई तब सबूत मिटाए जा चुके थे. राज्य सरकार का यह कहना कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं, खतरनाक है. आपने गलत संदेश दिया है कि कोई कुछ भी करके बच निकल सकता है.' उन्होंने कहा कि राज्य की जिम्मेदारी दोषियों को पकड़ने की होती है.

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एफडीआर और डेमोक्रेटिक लॉयर्स एसोसिएशन पंजाब की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया था और वह अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं. जाटों ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था.

रिपोर्ट बताती है, 'मुरथल में आंदोलनकारियों ने नेशनल हाईवे 1 को बंद कर दिया और उन्होंने 12 ट्रकों, बसों और कई कारों को आग लगा दिया. महिला यात्रियों के साथ बदसलूकी की गई और 21-22 फरवरी 2016 की रात उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. खुफिया विभाग के अधिकारियों को यह पता लगाने में मुश्किल हो रही है लेकिन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के साथ स्थानीय लोगों, निचले स्तर के अधिकारियों और गांव एवं ढाबा वालों ने महिलाओं के सामूहिक बलात्कार की पुष्टि की है. मीडिया ने भी सामूहिक बलात्कार की पुष्टि की है. हालांकि पुलिस एसएचओ ने इस घटना से इनकार किया है. ऐसा समझा जाता है कि अधिकांश महिलाएं पंजाब, हिमाचल और जम्मू कश्मीर की थी जिनके साथ छेड़छाड़ की गई या बलात्कार किया गया.'

दलों का रुख निराशाजनक

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कोई भी दल इस सच्चाई को सामने लाने में इच्छुक नहीं है. सत्ता में बैठी बीजेपी नहीं चाहती कि उसकी सरकार की छवि पर कोई दाग लगे खासकर तब जब सरकार इस महीने की शुरुआत में निवेशकों का सम्मेलन बुला चुकी है.

जाट लैंड में मजबूत समर्थन रखने वाली कांग्रेस और इनेलोद भी इस मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग कर रही है. उनका कहना है कि हरियाणा के समाज को धु्रवीकृत करने की कोशिश की जा रही है. सोनीपत के एसपी अभिषेक गर्ग बताते हैं, 'हमें अगर शिकायत मिलती है तो हम निश्चित तौर पर हम जांच को आगे बढ़ाएंगे.'

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First published: 19 March 2016, 8:37 IST
 
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