Home » इंडिया » Is Kawal village ready to repeat 2013 incident?
 

क्या कवाल गांव फिर से 2013 दोहराने के कगार पर है?

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

मुज़फ्फरनगर जिले का कवाल गांव एक बार फिर से सांप्रदायिक तनाव की जद में है. जानसठ कोतवाली में पड़ने वाला यह गांव लगभग उन्हीं कारणों से सुर्ख़ियो में है जिसकी वजह से 2013 में हालात बिगड़े थे. 18 जुलाई की रात को गांव का ही एक युवक इरशाद रहस्यमय ढंग से गायब हो गया था.

21 जुलाई को पुलिस ने इरशाद की हत्या के आरोप में गांव के ही दो लोगों पवन और मनोज को गिरफ्तार किया है. दोनो चचेरे भाई हैं. इनसे हुई पूछताछ में ऑनर किलिंग की बात सामने आई है.

गिरफ्तार युवकों द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक मृतक इरशाद का अपने पड़ोस में रहने वाली एक हिंदू लड़की से प्रेम प्रसंग था. 18 जुलाई की रात में इरशाद युवती के घर चला गया था जहां लड़की के भाई ने उसे देख लिया. इसके बाद आपे से बाहर हुए भाई और अन्य परिजनों ने मिलकर इरशाद की हत्या कर उसका शव गांव के बाहर जमीन में गाड़ दिया था.

मुफ्फरनगर दंगा: नेताओं को क्लीन चिट, पुलिस की नाकामी

इरशाद के परिजन दो दिनों से उसे खोज रहे थे. उन्होंने जानसठ कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने की कोशिश की तो पुलिस ने थोड़ा और इंतजार करने के लिए कहा. इस पर गांव के लोगों ने थाने को घेर लिया. तब पुलिस हरकत में आई.

इरशाद के फोन लोकेशन को ट्रेस करने पर पुलिस ने पाया कि 18 जुलाई की रात को उसके मोबाइल का आखिरी लोकेशन गांव के ही एक हिंदू परिवार के घर के आस-पास था. इसके आधार पर पुलिस उनके घर पहुंची. पुलिस के मुताबिक घर में पूछताछ के दौरान लड़की रोने लगी. इसके बाद सारी बात खुलकर सामने आई.

इरशाद की हत्या की खबर मिलते ही एक बार फिर से कवाल में तनाव फैल गया. लेकिन इस बार प्रशासन ने सावधानी बरतते हुए तुरंत ही हत्या के आरोपी परिवार को कवाल से बाहर सुरक्षित पहुंचा दिया और उन्हें कवाल से दूर रहने को कहा है.

पुलिस की चुनौती

कवाल गांव के साथ बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना जुड़ी है. यह वही गांव है जहां 2013 में एक मुस्लिम और दो जाट युवकों की हत्या के बाद फैले तनाव की चपेट में पूरा इलाका जल उठा था. 

मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में हुई हिंसा की घटनाओं में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. पचास हजार से ज्यादा लोगों को सालों तक विस्थापित होकर अस्थायी शिविरों में रहना पड़ा था.

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार पुलिस ने कोई लापरवाही नहीं बरती और 24 घंटे के भीतर घटना का खुलासा कर दिया. 

‘शोरगुल’ की रिलीज से पहले बीजेपी विधायक संगीत सोम की चुनौती

मामले की गंभीरता को देखते हुए रात में ही पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर मृत इरशाद का शव बरामद किया और पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार करवाया. साथ ही हत्या के आरोपी परिजनों को गांव से बाहर भेज दिया गया है.

रात में उसने अपनी बहन के साथ इरशाद को कमरे में पकड़ लिया था. इसके बाद वह आपा खो बैठा

घटना के बाद गांव में भारी मात्रा में पुलिस तैनात कर दी गई है. वहां तनाव भरा सन्नाटा पसरा हुआ है. मारे गए इरशाद के परिजनों का आरोप है कि उनके बेटे को रात में फोन करके बुलाया गया था और साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी गई. 

दूसरी तरफ पुलिस की गिरफ्त में आरोपी पवन ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि रात में उसने अपनी बहन के साथ इरशाद को कमरे में पकड़ लिया था. इसके बाद वह आपा खो बैठा और परिवार की इज्जत की खातिर उसे मार दिया.

मुजफ्फरनगर-शामली: हिंदुओं के पलायन पर यूपी सरकार को मानवाधिकार आयोग का नोटिस

मुजफ्फरनगर के एसएसपी दीपक कुमार ने कवाल की घटना पर कहा कि हमने गांव के लोगों को भरोसा दिया था कि मामले का खुलासा 24 घंटे के भीतर कर देंगे. गांव के सभी जातियों और धर्मों के लोगों ने शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया है.

फिलहाल कवाल में तनाव भरा सन्नाटा है लेकिन इस मामले में गांव और जिले की फिजा को खराब करने वाले वो सभी तत्व मौजूद हैं जिनके चलते साल 2013 में इतने बड़े पैमाने पर दंगा हुआ था. फिलहाल गांव वालों ने शांति का आश्वासन दिया है लेकिन गांव में बाहरी नेताओं के आवागमन की सुगबुगाहट के साथ स्थिति खराब हो सकती है.

पुलिस को ऐसे तत्वों को गांव से दूर रखना बड़ी चुनौती होगी. 2013 में भी फर्जी वीडियो और अफवाहों के जरिए ही जिले के नेताओं ने माहौल बिगाड़ा था.

First published: 23 July 2016, 7:32 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी