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आखिर जम्मू कश्मीर में क्या बड़ा करने जा रही है मोदी सरकार?

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 August 2019, 17:20 IST

आखिर जम्मू कश्मीर में चल क्या रहा है, मोदी सरकार जम्मू कश्मीर में क्या बड़ा करने जा रही है, क्या 15 अगस्त को धारा 370 हटा दिया जाएगा, क्या 35 A खत्म होने वाला है, ऐसे ही कई सवाल और है जो ना सिर्फ जम्मू कश्मीर के निवासियों के ज़हन में है बल्कि पूरे देशवासियों के मन में भी है. लेकिन इस सवालों का जवाब किसी के पास नहीं हैं यहां तक कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को भी नहीं पता आखिर जम्मू में क्या होने वाला है.

भारत सरकार ने जब से जम्मू कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है, चर्चाओं का बाजार तभी से गर्म है. सोशल मीडिया पर चर्चा है कि सरकार जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35A से संबंधित कोई बड़ा फैसला ले सकती है. लेकिन ऐसे में सवाल उठता है जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो सरकार को ऐसा फैसला लेने की जरूरत क्यों है.


जम्मू कश्मीर की सभी पॉलिटिकल पार्टियों के साथ साथ एक वर्ग धारा 370 का समर्थन करता है. जम्मू कश्मीर में आने वाले दिनों में विधानसभा के चुनाव होने है, अगर मोदी सरकार अभी कोई फैसला करती है तो चुनावों में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में सबसे पहला सवाल उठता है कि अगर कोर्ट ही मोदी सरकार की राह आसान कर देता है तो मोदी सरकार को फ़िजूल की मुसीबतें लेने पर अमादा क्यों हैं.

जम्मू कश्मीर पर नजर रखने वाले कई पत्रकारों को भी नहीं पता कि आखिर सरकार चाह क्या रही है. जम्मू कश्मीर में एक अफ़वाह और उड़ रही है कि मोदी सरकार आने वाले 15 अगस्त को राज्य की सभी पंचायतों पर तिंरगा फहराने की योजना बना ही है, इसलिए सभी हालातों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है. लेकिन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने इन सभी बातों को खारिज क्या है.

हालांकि कश्मीर में क्या होने वाला है यह किसी को नहीं पता लेकिन जम्मू कश्मीर आए पर्यटकों को घाटी छोड़ देने के लिए कहा गया है. यहां तक कि आतंकी हमले के मद्देनज़र अमरनाथ यात्रा को भी बंद कर दिया गया है. भारतीय सेना ने शुक्रवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में साफ कहा था कि सेना ने पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्मित एक सुंरग का पता गलाया है साथ ही से अमरनाथ यात्रा के रास्ते के पास से अमेरिका निर्मित एक स्नाइपर गन भी मिली है. सेना ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में इन सबूत भी पेश किए थे. जिसके बाद श्रद्धालुओं को भी घाटी छोड़ने के लिए कहा गया है. राज्यापाल ने बीते दिनों जारी किए एक बयान में कहा था कि यह तमाम अलग अलग चीजें है जिस कारण यह परिस्थिति पैदा हुई है. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर श्रद्धालुओं के साथ साथ बाकी राज्य के लोगों को जम्मू कश्मीर छोड़ने के लिए क्यों कहा गया है.

एक वर्जन इसका और है कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू कश्मीर के लाल चौक पर झण्डा पहरा सकते है, इसलिए यह तैयारियों की जा रही है. लेकिन प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचिर से ही देश को संबोधित करता है, इसीलिए इस तर्क में भी दम नहीं दिखाई देता. राज्यपाल ने भी एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में इन बातों को खारिज किया है.

 जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालातों को देखते हुए क्षेत्रीय दलों ने रविवार को एक मीटिंग बुलाई थी, जो एक होटल में होनी थी. लेकिन पुलिस ने होटल मालिकों को आदेश दिया है कि किसी भी तरह की कोई राजनीतिक गतिविधि होटलों में नहीं होगी. जिसके बाद यह मुलाकात राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ने महबूबा मुफ्ती घर पर होगी.

जम्मू कश्मीर के पुंछ में रविवार को ही रैपिड एक्शन फ़ोर्स की एक टुकड़ी की तैनाती कर दी गई है.साथ ही देश के गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के साथ एक मीटिंग की है जिसमें जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालातों पर चर्चा की गई है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में जम्मू, कश्मीर और लद्दाख को अलग अलग कर सकती है. सुनी सुनाई है कि सरकार कश्मीर और लद्दाख को यूनियन ट्रेरिट्री बना सकती है जबकि जम्मू को राज्य का दर्जा दिया जा सकता है. कानून के विशेषज्ञों की माने तो ऐसा हो सकता है लेकिन फिर वहीं सवाल खड़ा होता है कि सरकार को इससे क्या मिलेगा क्या जम्मू कश्मीर की समस्या खत्म हो जाएगी, क्या जम्मू कश्मीर से धारा 370 अपने आप खत्म हो जाएगी. इन सभी सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है. वहीं सोमवार को मोदी कैबिनेट की एक अहम मीटिंग होने वाली है. ऐसे में सभी लोगों की नजरें इन मीटिंग पर भी होगी.

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First published: 4 August 2019, 17:13 IST
 
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