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केरलवासियों के अपमान की कीमत कहीं बिहार के डीएनए की तर्ज पर न चुकानी पड़े

आनंद कोचुकुड़ी | Updated on: 12 May 2016, 23:26 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जुलाई 2015 को बिहार के मुजफ्फरपुर में एक चुनावी रैली में कहा था, "नीतीश कुमार के डीएनए में कुछ समस्या है." बाद में उन्होंने अपने बयान को बदलते हुए इसे "लोकतंत्र का डीएनए" कर दिया.

मंझे हुए राजनेता नीतीश ने मोदी के इस जुमले को बिहारियों का अपमान कहकर प्रचारित करना शुरू कर दिया. नीतीश ने इस बाबत एक खुला खत भी लिखा था जिसे ट्विटर पर जारी किया गया था. धीरे-धीरे इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया.

जब आठ मई 2016 को बिहार चुनाव के नतीजे आए तो बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा.

आठ मई 2016 को नरेंद्र मोदी ने केरल के कसारगोद में एक बार फिर ऐसा ही बयान दिया है जिसकी उन्हें बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.

नरेंद्र मोदी के केरल की चुनावी रैली में दिए गए बयान को राज्य के सीएम ने बताया केरलवासियों का अपमान

एक रैली के दौरान उन्होंंने कहा कि नवजात शिशु मृत्युदर (आईएमआर) के मामले में केरल के आदिवासियों की स्थिति सोमालिया से भी खराब है. इस सीट पर बीजेपी 1980 से लगातार हर विधानसभा में दूसरे स्थान पर आती रही है.

मोदी की टिप्पणी पर मीडिया ने तत्काल ध्यान नहीं दिया लेकिन जब केरल के सीएम ओमन चांडी ने पांच पन्ने का एक पत्र लिखकर मीडिया में बांटा तो ये मुद्दा अगले दिन केंद्रीय मुद्दा बन गया.

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चांडी ने मोदी को बयान को केरलवासियों को अपमान बताया. चांडी के पत्र की भाषा काफी तल्ख है. उन्होंने भारतीय पीएम से कहा कि वो अपनी टिप्पणी वापस लेकर राजनीतिक सदाशयता दिखाएं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी से केरल की आम जनता में भी बीजेपी के बारे में नकारात्मक संदेश गया है.

खाता खोलने की बेचैनी


न तो जनसंघ और न ही बीजेपी आज तक केरल में एक भी विधानसभा सीट पर जीत हासिल नहीं कर सके हैं. लेकिन पिछले लोक सभा चुनाव में मिले वोटों से पार्टी की उम्मीद काफी बढ़ गई है.

2014 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत पहले के चार प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया. उसके बाद हुए स्थानीय नगर निगम के चुनावों में पार्टी को करीब 14 प्रतिशत वोट मिले.

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पिछले कुछ हफ्तों से राज्य में डेरा डाले हुए हैं. पीएम मोदी 6 मई से 11 मई के बीच यहां छह रैलियां कर चुके हैं. जाहिर है कि बीजेपी केरल में अपना खाता खोलने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है.

राजनीति के जानकारों की मानें तो राज्य के नेमोम विधान सभा के अलावा बीजेपी किसी भी सीट पर दूसरे स्थान से आगे नहीं बढ़ सकेगी. जबकि बीजेपी केरल में सात सीटों पर जीत की उम्मीद कर रही है. नेमोम सीट पर वरिष्ठ नेता ओ राजगोपाल (राजेत्तम नाम से मशहूर) की रैली में एलडीएफ और यूडीएफ से ज्यादा भीड़ देखी गई.

नवजात शिशु मृत्य दर के मामले में केरल के आदिवासियों की तुलना सोमालिया से करके सोशल मीडिया पर घिरे नरेंद्र मोदी

बीजेपी की जीत की जो भी उम्मीद थी उसे पीएम को सोमालिया वाले बयान से बड़ा झटका लगा है. केरलवासी किसी "बाहरी" नेता द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर ऐसा बयान दिए जाने से बहुत से लोग नाराज लग रहे हैं.

सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर पोमोमोदी (मोदी वापस जाओ) हैशटैग ट्रेंड करने लगा. पूरे दिन इस हैशटैग से मोदी पर तीखे व्यंग्य और हमले किए जाते रहे.

इस बयान के बाद राज्य के बीजेपी नेताओं को मोदी का बचाव करना मुश्किल होने लगा. राज्य बीजेपी के नेता निजी बातचीत में मानते हैं कि पीएम के बयान से उन्हें नुकसान होगा.

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राज्य बीजेपी के अध्यक्ष के राजशेखरन ने इस मामले में खुद आगे बढ़कर सफाई दी. राजशेखरन तिरुअनंतपुरम के  वात्तियरकावु सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. माना जा रहा है कि इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है.

राजशेखरन अभी तक पूरे चुनाव में इस तरह के किसी विवाद में नहीं पड़े थे. अब मोदी के बयान के बचाव की जिम्मेदारी निभाने का असर उनकी अपनी सीट पर भी पड़ सकता है.

खुद मोदी ने 11 मई को ही एक और रैली तिरुअनंतपुरम में की लेकिन अपने सोमालिया वाले बयान पर हुए विवाद को उन्होंने अनदेखा किया.

पीएम के बयान का वास्तविक असर क्या हुआ ये तो 19 मई को पता चलेगा. उसके बाद ही बीजेपी ऐसी बयानबाजियों को लेकर आत्ममंथन कर सकेगी.

First published: 12 May 2016, 23:26 IST
 
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