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नशाखोरी के बाद अब पंजाब गुंडाराज की चपेट में

राजीव खन्ना | Updated on: 12 May 2016, 17:53 IST
QUICK PILL
  • पंजाब के पुलिस प्रमुख सुरेश अरोड़ा ने हाल ही में कहा कि पंजाब में 57 गैंग और उनके 423 सदस्य सक्रिय हैं. राज्य में माफिया गिरोहों से जुड़ी वारदातें बढ़ती ही जा रही हैं.
  • विश्लेषकों के अनुसार गैंगेस्टरों को है राजनीतिक संरक्षण. राज्य पहले ही नशे के कारोबार के चपेट में था. बढ़ते गुंडाराज से स्थित और बिगड़ रही है.

क्या पंजाब माफिया गुटों के मामले में यूपी और बिहार की राह पर बढ़ रहा है? राज्य के पुलिस प्रमुख सुरेश अरोड़ा ने हाल ही में कहा कि पंजाब में 57 गैंग और उनके 423 सदस्य सक्रिय हैं.

राज्य में हत्या, छिनैती, अपहरण, फिरौती की बढ़ती वारदातों भी यहां बढ़ते गुंडाराज की पुष्टि करती हैं. राज्य में विभिन्न गैंगों की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही उनकी आपसी टकराहट भी बढ़ी है. कुछ दिनों पहले ही राज्य के एक गैंगेस्टर जसविंदर सिंह रॉकी की हिमाचल प्रदेश में हत्या हुई. जिसके बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग गुटों के बीच उसकी हत्या की जिम्मेदारी लेने की होड़ लग गई.

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पंजाब में अगले साल चुनाव हैं इसलिए राज्य में माफिया और नेता के गठजोड़ का मुद्दा गरमाने लगा है. पुलिस प्रमुख अरोड़ा ने गैंगस्टरों से निपटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स(एसटीएफ) का गठन किया है. उन्होंने गैंगेस्टरों को अदालतों से रिहा होते जाने पर भी चिंता जताई है. गैंगस्टरों के अदालत से बरी होने की एक प्रमुख वजह होती है गवाहों को मुकर जाना.

गैंगेस्टर जसविंदर सिंह रॉकी की हत्या के बाद पंजाब के माफिया गुटों में हत्या का श्रेय लेने का होड़ मच गयी

राज्य के 423 गैंगेस्टरों में से 180 जेल में है और 101 जमानत पर रिहा हैं. 2011 से अब तक किसी भी गैंगेस्टर को अदालत में सजा नहीं हुई है. 1996 से मार्च 2016 तक 105 गैंगेस्टरों के मुकदमों की सुनवाई हुई जिनमें 2010 तक 55  मामलों में अभियुक्त बरी हो गए थे. उस साल केवल 10 गैंगस्टरों को सजा हुई.

इन गैंगेस्टरों की युवाओं में लोकप्रियता चिंता का एक और बड़ा कारण है. सोशल मीडिया पर इन गैंगेस्टरों के सैकड़ों फॉलोवर हैं. इनमें से कई गैंगेस्टर जेल के अंदर से लगातार फेसबुक पर अपनी तस्वीरें और स्टेटस अपडेट करते रहते हैं. पुलिस अधिकारी इससे इनकार करते हैं लेकिन जेल के अंदर या बाहर वो उनपर काबू रखने में बेबस नजर आते हैं.

कुछ लोगों के अनुसार ये सभी गैंग पिछले एक दशक में पनपे हैं. पहले राज्य में बाहरी गुंडे ही भाड़े पर हत्या और फिरौती जैसे काम करते थे. लेकिन धीरे-धीरे स्थानीय गैंग पनपने लगे.

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माना जाता है कि रियल एस्टेट(जमीन और इमारत) के बढ़ते कारोबार ने भी गैंगेस्टरों को उभरने में मदद की. पंजाब में नशे की तस्करी से भी इन गैंगों को अपना पैर जमाने में काफी मदद मिली.

पंजाब में अफीम, गांजा और शराब की काफी मांग रही है लेकिन पिछले कुछ सालों में सिंथेटिक ड्रग्स की मांग में काफी तेजी आई है. और इसके पीछे इन्हें गैंगेस्टरों का नेटवर्क काम करता है.

एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, "इनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका राजनीति में होती है. ज्यादातर नेताओं को चुनाव के लिए बाहुबलियों की जरूरत होती है. नेताओं और माफियाओं के बीच सांठगांठ एक खुला रहस्य है. मसलन, रॉकी की मौत के बाद अकाली दल और कांग्रेस के नेता उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे."

हालांकि सेवानिवृत्त डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस(जेल) शशि कांत का नजरिया थोड़ा अलग है. वो कहते हैं कि ये गिरोह बहुत पहले से काम करते रहे हैं. उग्रवाद के जमाने में वो उग्रवादी का चोला पहनकर लूट, डकैती और हत्या करते थे.

शशि कांत कहते हैं, "इन लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है. वो जमीन कब्जा करने, चुनाव में धांधली करने और ड्रग्स की तस्करी मं काम आते हैं."

अपने अनुभव को याद करते हुए शशि कांत ने कैच से कहा, "वो जेल के अंदर से ही अपना धंधा चलाते हैं. मुझे बड़े नेताओं के फोन आते थे कि फलां गैंगेस्टर को उसके इलाके के करीब की जेल में ट्रांसफर कर दिया जाए ताकि वो आसीनी से अपना धंधा कर सकें. मैं ऐसे बदमाशों को और दूर की जेल में भेज दिया करता था."

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कुछ लोगों का कहना है कि विभिन्न गुटों के बीच खूनी मुठभेड़ के पीछे भी चुनावी राजनीति है. हर दूसरे दिन किसी न किसी जगह से गैंगेस्टरों के बीच गोलीबारी या हत्या की खबर आती है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये सब राज्य में चुनाव से पहले भय का माहौल तैयार कर रहे हैं.


पंजाब के पुलिस प्रमुख सुरेश अरोड़ा के अनुसार राज्य में 57 गैंग और उनके 423 सदस्य सक्रिय हैं

एक बड़ी विडंबना ये भी है कि कई गैंगेस्टरों को पुलिस सुरक्षा प्राप्त है. पुलिस के गनमैन के साथ चलना रसूख का विषय माना जाता है क्योंकि ऐसे लोगों की गाड़ियों को पुलिस पिकेट पर रोका नहीं जाता. कई बार ऐसे छुटभैये नेता अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी के लिए भी करते हैं. लेकिन कोई भी राजनीतिक दल इस मुद्दे को नहीं उठाता, न ही राज्य सरकार कभी इसकी सुध लेती है.

हालिया गैंगवार के बाद आम आदमी पार्टी ने राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल का इस्तीफा मांगा है. पार्टी के पंजाब संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर कहते हैं, "एक जमाना था जब लोग यूपी और बिहार के गैंगेस्टोरों के बारे में बातें करते थे लेकिन अब पंजाब के नौजवानों में वही संस्कृति पनपने लगी है. ऐसे लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है. आखिर जेल में बंद कोई अपराधी फेसबुक पर तस्वीरें कैसे डाल सकता है?"

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सुच्चा सिंह कहते हैं, "क्या राजनीतिक संरक्षण के बिना कोई गैंग बेरोकटोक काम जारी रख सकता है?" कांग्रेस विधायक दल के प्रमुख चरनजीत सिंह चन्नी ने हाई कोर्ट की निगरानी में पंजाब में बढ़ते माफिया गिरोहों की जांच कराने की मांग की है. चन्नी ने आशंका जताई है कि इन गिरोहों का सत्ताधारी अकाली दल अपने हित में इस्तेमाल करता है.

खबरों के अनुसार चन्नी ने भारतीय निर्वाचन आयोग से इन गैंगों और उनको संरक्षण देने वाली राजनीतिक पार्टियों का संज्ञान लेने की अपील की है.

दूसरी तरफ राज्य में जेलों की तलाशी अभियान में 21 मोबाइल फोन(जिनमें चार स्मार्टफोन हैं), मोबाइल की बैटरियां, सिम कार्ड, टैबलेट समेत कई ड्रग्स बरामद हुए. इस अभियान से जेलकर्मियों, डॉक्टरों और फार्मासिस्ट की भारी कमी, नशा मुक्ति केंद्र की खराब हालत और सीसीटीवी की कमी जैसी चीजें भी सामने आई.

शशि कांत कहते हैं, "पहले पंजाब को ड्रग्स स्टेट कहा जाता था, अब उसे गैंगेस्टर स्टेट भी कहा जाने लगा है."

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First published: 12 May 2016, 17:53 IST
 
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