Home » इंडिया » Ishrat an 'LeT operative' says Headley, prosecutor Nikam gets flak for 'prompting'
 

क्या निकम ने चालाकी से उगलवाया इशरत जहां का नाम?

अश्विन अघोर | Updated on: 11 February 2016, 19:42 IST
QUICK PILL
  • अमेरिकी की जेल में बंद आतंकी डेविड कोलमैन हेडली का कहना कि गुजरात में मुठभेड़ के दौरान मारी गई इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी थी.
  • इशरत जहां महाराष्ट्र के मुंब्रा की लड़की थी जिसकी उम्र 19 साल की थी. जहां अहमदाबाद में 15 जून 2004 को एनकाउंटर में मारी गई थीं. ऐसा आरोप है कि जहां गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की साजिश में शामिल थीं.

मुंबई के जिला और सेशंस कोर्ट के समक्ष दिए गए बयानों की कड़ी में पाकिस्तानी-अमेरिकी मूल के लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा किया है. हेडली ने इशरज जहां को लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी बताया है.

अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के  जरिये कोर्ट को दी गई गवाही में हेडली ने बताया कि इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी थी. हेडली को मुंबई हमलों के मामले में 35 साल के कैद की सजा मिली है. बाद में यह जानकारी सामने आई कि हेडली ने कोर्ट को बताया कि उसे लश्कर की महिला आतंकी का नाम याद नहीं है. इसके बाद पब्लिक प्रॉसेक्यूटर उज्ज्वल निकम ने हेडली को तीन नामों का विकल्प दिया और फिर इसमें से हेडली ने 'इशरत जहां' के नाम पर मुहर लगाई.

जब निकम से यह पूछा गया कि उन्होंने क्या हेडली को एक निश्चित व्यक्ति का नाम लेने के लिए उकसाया तो उन्होंने कहा, 'हेडली ने जो सूचना दी है वह एनआईए को सौंपा जा चुका है. उस वक्त अमेरिका में हेडली से पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई थी. मुझे केवल इस बात से मतलब था कि वह कोर्ट में क्या कहता है. मैं सवाल बनाने के दौरान पूरी तरह से स्पष्ट था. मैंने न तो उसे उकसाया और नहीं कोई सलाह दी.'

क्या है मामला?

इशरत जहां महाराष्ट्र के मुंब्रा की लड़की थी जिसकी उम्र 19 साल की थी. जहां अहमदाबाद में 15 जून 2004 को एनकाउंटर में मारी गई थीं. ऐसा आरोप है कि जहां गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की साजिश में शामिल थीं.

अहमदाबाद पुलिस के क्राइम ब्रांच ने डीआईजी वंजारा के नेतृत्व में मुठभेड़ हुआ था और इसी में इशरत जहां मारी गई थी. लंबी जांच के बाद अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने यह कहा कि मुठभेड़ फर्जी था. सीबीआई ने भी अपने आरोप पत्र में इस मुठभेड़ को फर्जी बताया. वंजारा को एक दूसरे कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में जेल की सजा हुई.

साजिश में शामिल थी इशरत

अपनी गवाही में हेडली ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा ने नाका के निकट पुलिस टीम को मारने की योजना बनाई थी. हालांकि वह उस नाका का नाम नहीं बता सका. हेडली ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा की एक महिला ईकाई काम कर रही थी जिसकी कमान अबू अमान मजहर के हाथों में थी. हालांकि इस मोर्चे में शामिल महिलाएं फिदायीन नहीं थीं.

अदालती कार्यवाही के बाद मीडिया से बातचीत के बाद निकम ने कहा, 'हेडली ने कहा कि जकीउर्रहमान लखवी और मुजम्मिल के बीच गुजरात ऑपरेशन की विफलता के बाद कहासुनी हुई थी. लखवी ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए लोगों के लिए मुजम्मिल को जिम्मेदार ठहराया. उसे मुठभेड़ में महिला के मारे जाने की सूचना मिली थी.'

उन्होंने कहा, 'जब मैंने उससे नाम के बारे में पूछा तो उसने कहा कि उसे नाम याद नहीं है. उसने हमें नाम देने को कहा. जब मैंने उसे तीन नाम दिए तो हेडली ने इशरत जहां के नाम पर मुहर लगा दी.' पत्रकारा राणा अय्यूब ने ट्वीटर कर इस मामले की जानकारी दी.

कौन हैं मुजम्मिल?

मुजम्मिल हेडली का हैंडलर था और उसने मुंबई हमले के बाद उमर अब्दुल्ला को मारे जाने की योजना बनाई थी. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते इसकी जानकारी मिल गई और उनहोंने इस साजिश को विफल कर दिया.

हेडली ने कहा कि लखवी ने उसे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की हत्या की विफल योजना के बारे में जानकारी दी थी. लखवी ने इस ऑपरेशन की जटिलताओं और उसकी विफलता के कारणों का भी जिक्र किया था.

अबु दुजाता ने हेडली को मुजम्मिल से मिलाया था. बाद में दुजाता और मुजम्मिल ने कई बार 'भारत के कब्जे वाले' कश्मीर का दौरा किया. हेडली ने अदालत को बताया कि मुजम्मिल की योजना बाबरी विध्वंस के बाद गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला करने की थी.

लश्कर के ऑपरेशन का खुलासा

हेडली ने कहा कि वह अबु खफा को जानता था जो लखवी के बाद लश्कर का दूसरा बड़ा कमांडर था. हेडली ने 2003 में लाहौर के निकट मुरदिक में अबु खफा से मुलाकात की थी. हाफिज सईद और लखवी भी उस बैठक में मौजूद थे. खफा लश्कर के ट्रेनिंग कैंप में इंस्ट्रक्टर का काम करता था. बाद में उसने हेडली को भी ट्रेनिंग दी.

साजिद मीर और अबु खफा कराची के कंट्रोल रुम से मुंबई हमले को को-ऑर्डिनेट कर रहे थे. अबु खफा का भतीजा भी मुंबई हमले के आतंकियों में एक था. हेडली ने कोर्ट को बताया कि साजिद मीर ने रावलपिंडी में अपने लैपटॉप पर मुंबई हमलों की रिकॉर्डिंग दिखाई थी जिसे भारतीय मीडिया ने कवर किया था.

अबु अनस ने साजिद मीर की हत्या की और वह मुंबई के आतंकी हमले की साजिश में शामिल था. हेडली ने इलियास कश्मीरी को अल-कायदा के सदस्य के तौर पर पहचाना. उसने दावा किया कि वह वजीरिस्तान और पाकिस्तान में कश्मीरी से मिला था. कश्मीरी अल कायदा के ब्रिगेड 313 का कमांडर था.

हेडली के मुंबई तार

मुंबई हमलों से पहले और बाद में मुंबई में अपनी गतिविधियों के बारे में बताते हुए हेडली ने कहा कि उसने 14 सितंबर 2006 को तारदेव के एसी बाजार में अपना ऑफिस खोला. उसने अदालत को बताया कि डॉ. तहव्वुर राणा ने उसे 11 अक्टूबर 2006 को 66,605 रुपये दिए. इसके बाद 7 नवंबर को 500 डॉलर, 30 नवंबर को 17,636 रुपये और फिर 4 दिसंबर 2006 को 1000 अमेरिकी डॉलर दिए. हर बार रकम नरीमन के इंडसइंड बैंक के जरिये की गई. 

हेडली ने कहा कि आईएसआई ने उसे मुंबई हमला करने के लिए पैसे दिए

उसने कहा कि तहव्वुर राणा ने मुंबई हमले के पहले मुंबई का दौरा किया और फिर वह हेडली की सलाह पर अमेरिका चला गया ताकि वह सुरक्षित रह सके.

आईएसआई के मेजर इकबाल ने उसे 25,000 अमेरिकी डॉलर दिए और साजिद मीर ने मुंबई आने के पहले उसे 40,000 रुपये दिए. इसके अलावा पाक आर्मी के सेवानिवृत्त मेजर अब्दुर्रहमान पाशा ने हेडली को 18,000 रुपये दिए. 

तारदेव ऑफिस के रेंट एग्रीमेंट पर 1 नवंबर 2006 को दस्तखत किया गया. इसमें नाम और पते से जुड़ी सूचनाएं थी और फिर इस एग्रीमेंट को बढ़ाकर 16 जुलाई 2008 तक कर दिया गया.

हेडली ने कोर्ट को तहव्वुर राणा, मेजर इकबाल और साजिद मीर के बीच हुए ईमेल की जानकारी दी है. वह अपनी बातचीत कोड के जरिये किया करते थे. हेडली 2006-09 के बीच दो से तीन मोबाइल का इस्तेमाल किया करता था. 

First published: 11 February 2016, 19:42 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी