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पंजाब में आईएसआई से खतरा? बादल की नई राजनीति

राजीव खन्ना | Updated on: 17 August 2016, 7:08 IST

पंजाब में धर्म के नाम पर बढ़ती हिंसा रोज का काम हो गया है. राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार इस मुद्दे को लेकर चिंतित है. अकाली इसका दोष ‘बाहरी ताकतों’ यानी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर मंढ़ते हैं, जिसपर भरोसा करना मुश्किल है. जानकारों का मानना है कि अकाली आईएसआई का नाम लेकर बादल राज्य में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

इसी कड़ी में 15 अगस्त के दिन एक और घटना जुड़ गई, कुरान के साथ छेड़छाड़ की. इससे पूर्व गत सप्ताह संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा पर जालंधर में जानलेवा हमला हुआ था. मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने उनके ऊपर ताबड़तोड़ गोलियां दाग दीं. उनकी हालत नाजुक बनी हुई है.

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इससे पूर्व संत रंजीत सिंह धांदरीवाल पर हमला, गौ सेवा मिशन के प्रमुख स्वामी कृष्ण नंद का लापता होना और नामधारी पंथ की माता चंद कौर का मारा जाना कुछ ऐसी ही घटनाएं रहीं.

जून माह में कुरान के अपमान को लेकर राज्य में राजनीतिक ड्रामेबाजी भी देखने को मिली. गत वर्ष राज्य भर में पवित्र पुस्तकों के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद यह सारी घटनाएं घटीं.

राज्य में हो रही हिंसक वारदातों के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई का हाथ है: अकाली दल

उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने यह ढिंढोरा पीटना शुरू किया था कि राज्य में हो रही इन हिंसक वारदातों के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई का हाथ है. यद्यपि सुखबीर के पिता और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इन सभी वारदातों के पीछे किसी बाहरी हाथ होने के होने की संभावना से इनकार नहीं करते.

उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल कहते हैं इस संबंध में उनकी और मुख्यमंत्री की राय एक है. आईएसआई पंजाब में शांति भंग करने की कोशिश में लगी रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और एनआईए को भी सूचित कर दिया है.

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राज्य में मजबूत राजनीतिक ताकत बन कर उभर रही आम आदमी पार्टी ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है. आप का आरोप है कि चुनावों के मद्देनजर लोगों में जबर्दस्ती आईएसआई का खौफ फैलाया जा रहा है.

मोहाली से आप पार्टी के उम्मीदवार हिम्मत सिंह शेरगिल और अन्य ने आरोप लगाया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अकाली आईएसआई की आड़ में आप नेताओं पर जानलेवा हमला कर सकते हैं और हिंसा की साजिश कर सकते हैं.

उन्होंने कहा सुखबीर का बयान काफी गैर जिम्मेदाराना है, जिससे पंजाब की शांति भंग करने की बू आती है. सुखबीर को बताना होगा कि पंजाब के किस नेता को आईएसआई ने मारा और अब कौन-कौन आईएसआई के निशाने पर हैं? पिछले नौ साल में पंजाब में आईएसआई की उपस्थिती के कोई संकेत नहीं हैं. कैसे कहा जा सकता है कि आईएसआई अब कोई साजिश कर रही है.

आप के शीर्ष नेतृत्व ने यह मांग भी उठाई कि राज्य के गृहमंत्री होने के नाते सुखबीर बताएं कि उन्होंने पंजाब के राजनेताओं की सुरक्षा के क्या प्रबंध किए हैं? शेरगिल कहते हैं, 'आम आदमी पार्टी के नेताओं को सुखबीर द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा की दरकार नहीं है, क्योंकि पंजाब की जनता ने हमें जबर्दस्त समर्थन दे कर हमें वैसे ही सुरक्षित कर दिया है.'

सत्ताधारी पार्टी आईएसआई की आड़ में आप नेताओं पर जानलेवा हमला कर सकती है: आप

अकालियों पर हमला बोलते हुए आप पार्टी की प्रचार समिति के प्रमुख भगवंत मान ने कहा, ‘यह दुखद है कि उप मुख्यमंत्री आईएसआई के नाम पर लोगों को डरा रहे हैं. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आईएसआई की आड़ में हिंसा भड़का कर सुखबीर आप नेताओं पर जानलेवा हमले करवाए.’

पंजाब कांग्रेस प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के लिए आईएसआई को दोषी ठहराने के लिए सुखबीर को आड़े हाथों लिया है.

अमरिंदर ने राज्य की हिंसक वारदातों के लिए मुख्यमंत्री को दोषी ठहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष गंगनेजा पर हुए हमले में भी उनका हाथ था. बादल जानबूझ कर लोगों में साम्प्रदायिक आधार पर भय पैदा कर रहे हैं ताकि वे इसका राजनीतिक फायदा उठा सकें.

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अमरिंदर ने कहा, ‘सुखबीर हर बात के लिए आईएसआई को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते. हम सब जानते हैं कि आईएसआई का काम क्या है? लेकिन आप इसके नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए क्या कर रहे हैं? केवल छाती पीटने या दोष देने से काम नहीं चलेगा, आपको उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी.’

यह मानते हुए कि राज्य में धर्म के नाम पर हिंसा कोई नई बात नहीं है उन्होंने कहा लेकिन कांग्रेस इस रवायत को तोड़ेगी, क्योंकि पंजाब एक बार और अंधकार के गर्त में गिरने के लिए तैयार नहीं है.

अमरिंदर ने बार-बार बादल को निशाना बनाते हुए कहा, 'उन्होंने जानबूझकर पंजाब में गड़बड़ियां फैलने की छूट दी. चाहे यह पिछले वर्ष पवित्र पुस्तकों के अपमान का मामला हो या माता चंद कौर की हत्या का.'

जानकारों के मुताबिक अपनी विफलता पर पर्दा डालने के लिए हर बात में आईएसआई के हाथ होने का राग अलापना आपातकाल की याद दिलाता है, जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपनी हर विफलता पर पर्दा डालने के लिए किसी ‘बाहरी ताकत’ का हाथ होने की बात कह देती थीं.

कनाडा वासी प्रख्यात रेडियो पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक गुरप्रीत सिंह ने कहा, 'सुखबीर की बातों से लगता है वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं. यह नए कलेवर में इंदिरा की राजनीति कही जा सकती है. पंजाब को किसी बाहरी ताकत से खतरा नहीं है बल्कि देश में ही मौजूद विघटन कारी ताकतों से है, मुख्यतः हिन्दुत्ववादी ताकतों से.'

First published: 17 August 2016, 7:08 IST
 
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