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इजरायली स्पायवेयर पेगासस ने इन लोगों को बनाया था निशाना, पत्रकार, वकील भी शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 November 2019, 10:11 IST

फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप ने दावा किया है कि भारत में कई पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन को व्हाट्सएप के माध्यम से इजरायल स्पायवेयर पेगासस का उपयोग करके लक्षित किया गया था. व्हाट्सएप ने मंगलवार को यूएस फेडरल कोर्ट में पेगासस-डेवलपर एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. रायटर की रिपोर्ट के अनुसार इस साल के शुरुआत में कई अमेरिकी-संबद्ध देशों में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को हैकिंग सॉफ्टवेयर से साथ लक्षित किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिन लोगों की जासूसी की गई थी उनमे उनमे आदिवासी इलाकों में काम करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, एल्गार परिषद के आरोपी, कोरेगांव के वकील और कई दलित कार्यकर्ता सहित पत्रकार शामिल थे.

ये लोग थे निशाने पर 

हिंदुस्तान टाइम्स ने व्हाट्सएप के एक अज्ञात अधिकारी का हवाला देते हुए कहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल और पत्रकार संतोष भारतीय समेत कम से कम 41 व्यक्तियों को इस साल की शुरुआत में व्हाट्सएप हैकिंग का निशाना बनाया गाय था. अब तक 17 व्यक्तियों, जिनमें वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं, का नाम सामने आया है.

रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक नेता पटेल ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप से एक संदेश मिला था, लेकिन सिटीजन लैब से संपर्क नहीं किया जा सका. व्हाट्सएप अधिकारी ने कहा कि कई लोग अलर्ट पर ध्यान नहीं दे सकते थे.

 

पत्रकार संतोष भारतीय ने कहा कि उन्होंने सदेश को नजरअंदाज कर दिया क्योंकि वह सिटीजन लैब या व्हाट्सएप के संदेशों के बारे में अनिश्चित थे. उन्होंने कहा “मैं एक हिंदी पत्रकार हूं, जिसे इन तकनीकों के काम करने का बहुत कम ज्ञान है. मुझे नहीं पता कि मुझे क्यों निशाना बनाया गया था.''

जिन लोगों को निशाना बनाया गया है, उनमें छत्तीसगढ़ की सक्रिय कार्यकर्ता शालिनी गेरा, नागपुर के वकील निहालसिंह राठौड़, आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया, दलित मुद्दों पर अकादमिक और लेखक आनंद तेलतुंबडे, बीबीसी के पूर्व पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी और चंडीगढ़ से जुड़े वकील हैं.

इजरायली फर्म ने आरोपों का खंडन किया है लेकिन कहा कि उसने केवल सरकारी एजेंसियों को पेगासस को बेचा है. इस बीच संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 4 नवंबर तक सुरक्षा उल्लंघन पर व्हाट्सएप की प्रतिक्रिया मांगी. एक्टिविस्ट और वकील प्रशांत भूषण ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने व्हाट्सएप हैकिंग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करने की योजना बनाई है.

WhatsApp का खुलासा- इजरायली स्पायवेयर के निशाने पर थे भारतीय पत्रकार और एक्टिविस्ट

First published: 1 November 2019, 9:12 IST
 
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