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ऐतिहासिक पल: इसरो एक साथ 20 सैटेलाइट लॉंन्च करके बनाएगा रिकॉर्ड

निहार गोखले | Updated on: 21 June 2016, 11:51 IST
(इसरो)

भारत का चर्चित सैलेटलाइट लॉन्चर पीएसएलवी 22 जून को एक साथ 20 सैटेलाइट लॉन्च करके नया रिकॉर्ड बनाने वाला है. अब तक एक साथ सबसे अधिक उपग्रह लॉन्च करने का रिकॉर्ड रूस के नाम है. रूसी मिशन ने एक साथ 33 सैटेलाइट एक साथ लॉन्च किया था.

भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान (इसरो) की घोषणा के अनुसार 22 जून को सुबह 9.26 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा.

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पीएसएलवी सी-34 से भेजे जाने वाले उपग्रह में मैपिंग के लिए उपयोग किया जाने वाला भारतीय उपग्रह कार्टोसैट-2 भी शामिल है. इनमें दो उपग्रह भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित किए गए हैं. 13 उपग्रह अमेरिकी हैं, चार कनाडा, जर्मनी और इंडोनेशिया के हैं. सभी उपग्रह का कुल वजन 1,288 किलोग्राम होगा.

  • रिकॉर्ड- इससे पहले इसरो ने 2008 में 10 सैटेलाइट लॉन्च किए थे. मौजूदा मिशन में पहले 22 उपग्रह लॉन्च करने की योजना थी लेकिन अंत में 20 उपग्रहों को लॉन्च करने की बात तय हुई. ये सभी सैटेलाइट सीधी अपनी कक्षा में स्थापित किए जाएंगे.

अब तक एक साथ सबसे अधिक 33 सैटेलाइट रूसी मिशन ने भेजे हैं. 2014 में रूसी अंतरिक्ष केंद्र डीएनईपीआर ने 37 सैटेलाइट प्रक्षेपित किए थे जिनमें से 33 को सीधे उनकी कक्षा में स्थापित किया गया था. वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 2013 में एक साथ 29 सैटेलाइट एक साथ उनकी कक्षा में स्थापित किए थे.

  • कार्टोसैट- कार्टोसैट-2 का वजन 727.5 किलोग्राम है. इस सैटेलाइट में में पैनक्रोमैटिक और मल्टीस्पेक्ट्रल कैमारा लगा होगा. इससे भारत की रिमोट सेंसिंग क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी. इसरो ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि इस सैटेलाइट से तटीय इलाकों में भू-उपयोग, रोड संजाल, जल  वितरण और भू-परिवर्तनों पर नजर रखी जा सकेगी.
  • भारतीय विश्वविद्यालयों के सैटेलाइट- इसरो दो भारतीय विश्वविद्यालयों के बनाए दो सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में भेज रहा है. सत्याभामा यूनिवर्सिटी, चेन्नई के बनाए एसबी सैट का वजन 1.5 सैटेलाइट में इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर है जिससे ग्रीनहाउस गैसों का घनत्व मापा जा सकता है. 
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दूसरा सैटेलाइट स्वयंम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे के विद्यार्थियों ने विकसित किया है. एक किलो के इस सैटेलाइट से रेडियो को संदेश भेजा जा सकता है. इसमें 'पैसिव स्टैबिलाइजेशन' सिस्टम भी लगा है. इससे ऊर्जा की खपत काफी कम होती है. कॉलेज की वेबसाइट के अनुसार ये अपनी तरह का पहली सैटेलाइट होगा.

विदेशी सैटेलाइट- पीएसएलवी 13 अमेरिकी रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट भेजेगा. इनमें 12 डोव सैटेलाइट और एक स्काईसैट सैटेलाइट शामिल हैं. स्काईसैट को गूगल की कंपनी टेरा बेला ने डिजाइन किया है. 

इसरो कनाडा के दो और इंडोनेशिया और जर्मनी के एक-एक सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगा. जर्मन सैटेलाइट बिरोज का वजन 130 किलो है. इस तरह इस मिशन में अंतरिक्ष में भेजी जाने वाली ये दूसरा सबसे भारी सैटेलाइट होगा. इस सैटेलाइट से उच्च तापमान वाली घटनाओं का ब्योरा दर्ज किया जा सकेगा. 

व्यावसायिक लोकप्रियता

पीएसएलवी व्यावसायिक सैटेलाइट लॉन्चिंग में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. भारत इससे अब तक 57 विदेशी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है. पीएसएलवी ने 1999 में जर्मनी और कोरिया के सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजकर इसकी शुरुआत की थी. लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें बहुत तेजी आई है.

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साल 2010 तक भारत ने कुल 34 विदेशी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे थे. वहीं 2015 में 17 विदेशी सैटेलाइट भेजे गए.

2016-17 में इसरो की कुल 25 विदेशी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की योजना है. विदेशी सैटेलाइटों को भेजने के लिए सभी अनुबंध इसरो की कारोबारी शाखा एंट्रिक्स करती है. एंट्रिक्स ने सैटेलाइट लॉन्च से 775 करोड़ रुपये कमाए. पिछले साल की तुलना में इस आय में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

सैटेलाइट लॉन्च में भारत के बढ़ते दखल को इससे समझा जा सकता है कि पिछले साल अमेरिका की सैटेलाइट लॉन्च कराने वाली कई निजी कंपनियों ने अमेरिका में इसरो को इसके लिए प्राथमिकता देने के बढ़ते चलन का विरोध किया था.

First published: 21 June 2016, 11:51 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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