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Chandrayaan-2 के बाद इसरो का बड़ा मिशन, लॉन्च किया कार्टोसैट-3 सैटेलाइट

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 November 2019, 11:59 IST

इसरो ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से कार्टोसैट-3 सैटेलाइट लॉन्च किया. जो जमीन से 509 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाएगा. इस सेटेलाइट को आसमान में भारत की आंख माना जाता है इसीलिए ये सेना के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत मददगार साबित होगा. बता दें कि चंद्रयान 2 के बाद यह इसरो का सबसे बड़ा मिशन है. कार्टोसैट-3 को पहले 25 नवंबर को लॉन्च किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी तारीख बदल दी गई और इसे 27 नवंबर लॉन्च किया गया.

बता दें कि कार्टोसैट-3 उपग्रह कार्टोसैट सीरीज का नौवां उपग्रह है जो अंतरिक्ष से भारत की सरहदों की निगरानी के लिए प्रक्षेपित किया गया है. सीमा निगरानी के लिए इसरो कार्टोसैट-3 के बाद दो और उपग्रह रीसैट-2 बीआर1 और रीसैट 2 बीआर 2 को PSLV C-48 और PSLV C-49 की मदद से श्रीहरिकोटा से अगले महीने लॉन्च किया जाएगा. बता दें कि कार्टोसेट-3 अंतरिक्ष में 509 किलोमीटर दूर 97.5 डिग्री के झुकाव के साथ कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

इसरो ने कार्टोसैट के साथ ही अमेरिका के 13 छोटे उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक उनकी कक्षाओं में स्थापित कर दिया है. कार्टोसैट-3 दुश्मन की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा. इसे ले जाने वाले राकेट पीएसएलवी से अमेरिका के 13 छोटे उपग्रह भी भेजे गए हैं. इसके पहले इसरो कार्टोसेट सीरीज के आठ उपग्रह भेज चुका है.

पीएसएलवी सी-47 रॉकेट को श्रीहरिकोटा से बुधवार सुबह 9:28 बजे  लॉन्‍च किया गया. यह अपने साथ थर्ड जनरेशन के अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट कार्टोसेट-3 और अमेरिका के 13 कॉमर्शियल सैटेलाइटों लेकर गया है. इसरो का कहना है कि, हाल ही में बनाई गई व्यावसायिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड ने पहले ही 13 अमेरिकी नैनोसैटलाइट प्रक्षेपित करने के लिए समझौता किया था.

करीब 1625 किलोग्राम वजनी कार्टोसेट-3 को 509 किलोमीटर दूर कक्षा में स्थापित किया जाएगा. कार्टोसेट-3 पांच साल तक काम करेगा. कार्टोसेट अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट से पृथ्वी की साफ तस्वीर ली जा सकती है. इसकी तस्वीर इतनी साफ होगी कि किसी व्यक्ति के हाथ में बंधी घड़ी के समय को भी साफ देखा जा सकेगा. मुख्य रूप से इसका काम अंतरिक्ष से भारत की जमीन और सीमा पर पैनी निगरानी करना है.

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First published: 27 November 2019, 11:39 IST
 
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