Home » इंडिया » ISRO launches navigation satellite IRNSS-1G from Sriharikota
 

देसी जीपीएस सिस्टम का सपना हुआ सच, भारत ने लॉन्च किया नेविगेशन सेटेलाइट

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 April 2016, 16:09 IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज नेविगेशनल उपग्रह समूह का सातवां उपग्रह आईआरएनएसएस 1-जी सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया.

आइआरएनएसएस 1-जी उपग्रह को 35वें ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-33 के जरिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया. इसका पूरा नाम इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम है.

सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित

1,425 किलोग्राम वजनी आईआरएनएसएस-1जी उपग्रह 20 मिनट की उड़ान के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया. 

पिछले 6 आईआरएनएसएस प्रक्षेपणों की ही तरह इस प्रक्षेपण में भी पीएसएलवी के एक्स एल संस्करण का उपयोग किया गया है.

आईआरएनएसएस 1जी उपग्रह में दिशा सूचक और रेंजिंग के लिए दो पे लोड्स लगाये गये हैं. इस उपग्रह की उम्र 12 साल होगी.

आईआरएनएसएस-1जी उपग्रह (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली-1जी) के सात सेटेलाइट के समूह का हिस्सा है. भारत ने अपना पहला नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1-ए जुलाई 2013 में प्रक्षेपित किया था. 

इसरो आज से पहले छह क्षेत्रीय नौवहन उपग्रहों (आईआरएनएसएस -1 ए, 1बी, 1सी, आईडी, 1ए और 1जी) का प्रक्षेपण कर चुका है. इसरो ने इससे पहले छठे नेविगेशन उपग्रह आइआरएनएसएस-1एफ का प्रक्षेपण 10 मार्च को किया था.

satellite

प्रधानमंत्री ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्न मोदी ने भारतीय वैज्ञानिकों को आईआरएनएसएस-1जी की लॉन्च‍िंग पर बधाई दी. इसी के साथ भारत ने स्वदेशी जीपीएस बनाने की मंजिल तय कर ली. 

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, "अब हमारे रास्ते हम तय करेंगे. कैसे जाना है, कैसे पहुंचना है, ये हमारी अपनी तकनीक के माध्यम से होगा."

satellite3

इन सातों नौवहन उपग्रह की कुल लागत 1420 करोड़ रुपये है. आईआरएनएसएस-1जी उपग्रह, उपयोगकर्ताओं को भारत और उसके 1500 किलोमीटर के दायरे में रियल टाइम पोजीशन और टाइमिंग की सटीक जानकारी देगा. 

नेविगेशनल सिस्टम से दो तरह की सेवाएं हासिल होंगी. पहली स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस जो सभी उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध करायी जाती है और दूसरी रिसट्रिक्टेड सर्विस जो केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ही मुहैया कराई जाती है.

क्लब देशों में शामिल भारत


इस उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली रखने वाले विशिष्ट देशों के क्लब में शामिल हो गया है. 

इसरो का दावा है कि उसने दुनिया की सबसे सस्ती (21.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर) और कारगर जीपीएस उपग्रह प्रणाली को विकसित करने में सफलता पाई है. 

ये उपग्रह देश तथा हिंद महासागरीय क्षेत्र की जरूरत के लिहाज से अमेरिका की जीपीएस प्रणाली से काफी बेहतर माना जा रहा है. 

First published: 28 April 2016, 16:09 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी