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इसरो की अगले साल फिर अंतरिक्ष में उड़ान, 2021 की शुरुआत में लॉन्च हो सकात है मिशन चंद्रयान-3

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 September 2020, 11:56 IST

इसरो (ISRO) के मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) को भले ही पूरी कामयाबी नहीं मिली हो, लेकिन भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) इसके लिए लगातार मेहनत कर रहा है. पिछले साल भारत के चंद्रयान-2 (Chanrayaan-2) का लैंडर विक्रम (Lander Vikram) चंद्रमा की सतह (Moon surface) पर सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing) के दौरान क्रैश होकर चंद्रमा की सतह पर गिर गया उसके बाद इसका इसरो से कोई संपर्क नहीं हो पाया, लेकिन इसरो ने हार नहीं मानी और चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के लिए काम शुरु कर दिया. बताया जा रहा है कि इसरो अगले साल यानी साल 2021 की शुरुआत में ही चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग कर सकता है.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को इस बारे में जानकारी दी है. हालांकि, चंद्रयान-2 के विपरित इसमें ‘ऑर्बिटर’ नहीं होगा लेकिन इसमें एक ‘लैंडर’ और एक ‘रोवर’ को फिट किया जाएगा. पिछले साल सितंबर में चंद्रयान-2 की चंद्रमा की सतह पर ‘हार्ड लैंडिंग’ के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल के अंतिम महीनों के लिये एक अन्य अभियान की योजना बनाई थी. हालांकि, कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते इसरो की कई परियोजनाओं को प्रभावित किया और चंद्रयान-3 जैसे अभियान में देर हो गई.


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जितेंद्र सिंह के हवाले से जारी एक बयान में कहा गया है कि, जहां तक चंद्रयान-3 की बात है तो इसका प्रक्षेपण 2021 की शुरूआत में कभी भी होने की संभावना है. चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 का ही पुन: अभियान होगा और इसमें चंद्रयान-2 की तरह ही एक लैंडर और एक रोवर होगा. बता दें कि इसरो ने चंद्रयान-2 को पिछले साल 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था. इसके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना थी. लेकिन लैंडर विक्रम ने सात सितंबर को हार्ड लैंडिंग की और अपने प्रथम प्रयास में ही पृथ्वी के उपग्रह की सतह को छूने का भारत का सपना अधूरा रह गया.

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इस अभियान के तहत भेजा गया आर्बिटर अच्छा काम कर रहा है और जानकारी भेज रहा है. उससे पहले इसरो ने साल 2008 में चंद्रयान-1 को प्रक्षेपित किया गया था. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो के प्रथम चंद्र अभियान ने कुछ चित्र भेजे हैं जो प्रदर्शित करते हैं कि चंद्रमा के ध्रुवों पर जंग सा लगता दिख रहा है. बयान में कहा गया है कि नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रिेशन (NASA) के वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि पृथ्वी का अपना वातावरण इसमें सहायता कर रहा हो, दूसरे शब्दों में इसका अर्थ यह हुआ कि पृथ्वी का वातावरण चंद्रमा की भी रक्षा कर रहा हो.

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First published: 7 September 2020, 11:56 IST
 
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