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ISRO अब अंतरिक्ष में करने जा रहा है अनोखा प्रयोग, बनाएगा ये नया रिकॉर्ड

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 October 2019, 10:14 IST

दरअसल, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का चंद्रयान-2 मिशन भले ही पूरी तरह से सफल नहीं हुआ हो, लेकिन इसरो अगले साल फिर से अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और कारनामा करने जा रहा है. जो अब तक नहीं किया गया. इसरो चीफ डॉ. के. सिवन ने कुछ महीने पहले जानकारी दी थी कि, भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा. बता दें कि स्पेस स्टेशन बनाने के लिए सबसे जरूरी है दो अंतरिक्षयानों या सैटेलाइट या उपग्रहों को आपस में जोड़ना. ये काम बेहद जटिल होता है. इस मिशन के लिए अत्यधिक निपुणता की जरूरत होती है.

इसरो चीफ डॉ. के. सिवन का कहना है कि ये वैसा ही है जैसे किसी इमारत को बनाने के लिए हम एक ईंट से दूसरी ईंट को जोड़ते हैं. जब दो छोटी-छोटी चीजें जुड़ती है, तब वो बड़ा आकार बनाती हैं. इस मिशन का नाम है स्पेडेक्स यानी स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट. अभी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए सरकार से 10 करोड़ रुपए मिले हैं.

 

इसके लिए दो प्रायोगिक उपग्रहों को पीएसएलवी रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. उसके बाद उन्हें अंतरिक्ष में जोड़ा जाएगा. इस मिशन में सबसे बड़ी जटिलता दो सैटेलाइट्स की गति को कम करके दोनों को अंतरिक्ष में एक साथ जोड़ना है. अगर गति मिशन के मुताबिक कम नहीं हुई तो दोनों आपस में टकराकर नष्ट हो सकते हैं.

इसरो चीफ डॉ. के. सिवन ने कहा कि इस मिशन को करने का मतलब ये नहीं कि इसरो के स्पेस स्टेशन मिशन की शुरुआत हो चुकी है. क्योंकि यह एक प्रायोगिक मिशन है. स्पेस स्टेशन का मिशन दिसंबर 2021 के गगनयान अभियान के बाद ही शुरू किया जाएगा. क्योंकि अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने और डॉकिंग में महारत हासिल करने के बाद ही स्पेस स्टेशन मिशन की शुरूआत की जा सकेगी.

इस मिशन से होंगे ये फायदे

इसरो चीफ डॉ. के. सिवन का कहना है कि इसरो वैज्ञानिकों को यह पता चलेगा कि वे अपने स्पेस स्टेशन में ईंधन, अंतरिक्ष यात्रियों और अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचा पाएंगे या नहीं. बता दें कि पहले स्पेडेक्स मिशन को 2025 तक पीएसएलवी रॉकेट से छोड़ने की तैयारी थी. इस प्रयोग में रोबोटिक आर्म एक्सपेरीमेंट भी शामिल होगा.

गौरतलब है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को पांच देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर बनाया है. जिसे अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा, रूस की रोस्कॉस्मोस, जापान की जाक्सा, यूरोप की ESA और कनाडा की कनाडा स्पेस एजेंसी ने मिलकर तैयार किया था. इस मिशन को पूरा करने में पांचों देशों को 13 साल का वक्त लगा था. जिसमें डॉकिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया था. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को बनाने में 40 बार डॉकिंग की गई थी.

इसरो चीफ डॉ. के. सिवन का कहना है कि भारतीय स्पेस स्टेशन का वजन 20 टन होगा. वह कहते हैं कि इसकी बदौलत हम विभिन्न प्रकार के प्रयोग कर पाएंगे. साथ ही माइक्रोग्रैविटी का अध्ययन कर पाएंगे. भारतीय स्पेस स्टेशन में 15-20 दिन के लिए कुछ अंतरिक्षयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होगी. अगर इसरो 5 से 7 साल में अपना स्पेस स्टेशन बना लेगा तो वह दुनिया का चौथा देश होंगे. जिसका खुद का स्पेस स्टेशन होगा. इससे पहले रूस, अमेरिका और चीन अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन स्थापित कर चुके हैं.

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First published: 3 October 2019, 9:12 IST
 
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