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असम चुनाव में गुप्त हत्याओं का मुद्दा फिर लौटा

कुणाल मजूमदार | Updated on: 28 March 2016, 13:00 IST

असम में विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान से मात्र दस दिन पहले उल्फा के परेश बरुआ गुट ने गुप्त हत्याओं के संवेदनशील मुद्दे को फिर उभार दिया है. राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर हैरान नहीं हैं.

उल्फा के गहरे प्रभाव वाले ऊपरी असम में चार अप्रैल को मतदान होना है. उल्फा ने गुप्त हत्याओं का आरोप मुख्यत: तीन नेताओं पर लगाया है. यदि यह मुद्दा गरमाया तो उन तीन नेताओं में से सबसे अधिक प्रभाव भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार सर्वानंद सोनोवाल पर पड़ने की आशंका है.

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सोनोवाल असम गण परिषद के पूर्व सदस्य हैं. उन पर पहले भी अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए उल्फा काडर का उपयोग करने के आरोप लग चुके हैं. इन आरोपों में डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र सौरव बोरा की वर्ष 1986 में हुई हत्या भी शामिल है. हालांकि वर्ष 2012 में गुवाहटी हाईकोर्ट ने सोनोवाल को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया था.

सोनोवाल पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए उल्फा काडर का उपयोग करने के आरोप लग चुके हैं

निश्चित रूप से जब ब्रह्मपुत्र घाटी में चुनावी मौसम गर्मा चुका है तब यह बहुत मायने नहीं रखता. सत्ता में कांग्रेस के लिए चौथी पारी का सपना देख रहे मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने मांग की है कि सोनोवाल के खिलाफ हत्या के आरोप तय किए जाएं.

उल्फा के साथ सोनोवाल की एक और महत्वपूर्ण कड़ी माजुली है. कभी विद्रोही गुट का गढ़ माना जाने वाला नदी का यह द्वीप अहोम अस्मिता का प्रतीक है. शायद इसी कारण भाजपा ने इस सीट के प्रत्याशी को असम में अपना चेहरा बनाने का निर्णय लिया. लेकिन सवाल यही है कि क्या मतदाता चुनाव में इस मुद्दे पर कोई ध्यान देंगे?

उल्फा और क्या कहता है?

बरुआ गुट ने पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और सोनोवाल पर कांग्रेस नेता मनबेंद्रा सरमा, पत्रकार कमला कलिता और सामाजिक कार्यकर्ता संजय घोष की हत्या के लिए भी उल्फा काडर के इस्तेमाल का आरोप लगाया है. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री हेमंत वर्तमान में भाजपा के मुख्य चुनावी रणनीतिकार भी हैं.

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विद्रोही गुट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महन्त पर भी उन गुप्त हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाया है, जो उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थीं.

उल्फा बनाम भाजपा

उल्फा और भाजपा के बीच संघर्ष उस समय शुुरू हुआ जब भाजपा ने इस विद्रोही गुट के एक पूर्व सदस्य भास्कर सरमा को मार्गरिटा विधानसभा सीट से टिकट ऑफर किया.

उल्फा ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महन्त पर भी उन गुप्त हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाया है

उल्फा को इससे भी अधिक इस बात ने भड़का दिया कि सरमा के लिए सोनोवाल प्रचार कर रहे थे, जिस पर उल्फा 'गद्दार' होने और गुप्त हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगा रहा है.

क्या चुनावों पर इस सब का कोई प्रभाव पड़ेगा?

राजनीतिक टीकाकार कहते हैं - शायद इसका बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा. राजनीतिक विश्लेषक अरुपज्योति सैकिया के अनुसार, "चुनावों से पहले गुप्त हत्याओं का मुद्दा उठाया जाता है और फिर सब भूल जाते हैं. यह बहुत दुःख की बात है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी की रुचि सच्चाई की पड़ताल करने में है ही नहीं."

"गुप्त हत्याएं" हैं क्या?

जब असम में उल्फा का उग्रवाद चरम पर था, उस समय उल्फा के सदस्यों के दोस्तों और रिश्तेदारों को उनके घरों से उठा लिया जाता था और वे कभी वापस नहीं लौटे. सैकिया समिति ने इस तरह की हत्याओं के 35 मामलों की जांच-पड़ताल की. समिति ने इन सब हत्याओं में कई तरह की समानता पाई. समिति इस नतीजे पर पहुंची कि यह सब प्रदेश सरकार की सहभागिता के बिना संभव नहीं हो सकता.

उस समय प्रदेश सरकार का नेतृत्व प्रफुल्ल कुमार महन्त कर रहे थे. समर्पण कर चुके उल्फा के सदस्यों, जिन्हें सुल्फा के नाम से जाना जाता है उनकी इस तरह से गैर न्यायिक हत्या कर दी जाती थी.

First published: 28 March 2016, 13:00 IST
 
कुणाल मजूमदार @kunalmajumder

Editor for Speed News aka Catch Live and Operations at Catch, Kunal enjoys measuring his life in numbers. Of his 30 years of life, 12 have been spent working, 9 of them in journalism. The remaining 3 were spent in 2 call centres, talking to British and Australians about insurance and cellphones. In his journalistic capacity, Kunal has worked at 3 publications and headed 2 online teams. The '3' includes Images Multimedia, Tehelka and DNA. The '2' includes Tehelka and DNA. Catch is Kunal's 6th workplace, where he will head his 3rd team as speed news editor. As a reporter, he won 2 awards - Statesman Award for Rural Reporting and UNFPA-Laadli Award for Gender Sensitivity. That's his story in Prime Numbers (a section on this site from which he's taken inspiration).

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