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पांच मुद्दे जो बीजेपी और मानसून सत्र का मिजाज बिगाड़ सकते हैं

आकाश बिष्ट | Updated on: 19 July 2016, 8:03 IST
QUICK PILL
  • अरुणाचल प्रदेश में नैतिक बढ़त लेने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस मानसून सत्र में पूरी तरह से बीजेपी को हाशिए पर धकेलने की रणनीति के साथ उतरेगी.
  • इस सत्र में लंबे समय से अटके जीएसटी बिल के पारित किए जाने की उम्मीद है लेकिन कांग्रेस ने अभी तक इस मामले में समर्थन के कोई संकेत नहीं दिए है.
  • पिछले सत्र में कांग्रेस खुद अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले में घिर गई थी. हालांकि इस बार वह सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह से कमर कस चुकी है.

संसद के मानसून सत्र में बीजेपी को विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस के कड़े तेवर का सामना करना पड़ सकता है. पिछले सत्र में कांग्रेस खुद ही विवादित मुद्दों की वजह से घिर गई थी. कांग्रेस संसद में इस बार कश्मीर का भी मुद्दा उठा सकती है. हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की मुठभेड़ में हुई मौत के बाद कश्मीर में लगातार विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है और इसमें अभी तक 40 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

अरुणाचल प्रदेश में नैतिक बढ़त लेने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस मानसून सत्र में पूरी तरह से बीजेपी को हाशिए पर धकेलने की रणनीति के साथ उतरेगी. इस सत्र में लंबे समय से अटके जीएसटी बिल को पारित किए जाने की उम्मीद है.

शुरुआत एनेमी प्रॉपर्टी बिल से होगी. बिल पर पहले ही दिन राज्यसभा में चर्चा की जानी है. साथ ही कुछ अन्य विधेयकों को लेेकर सरकार और विपक्ष के बीच जबरदस्त खींचतान होने की उम्मीद है. कांग्रेस मानसून सत्र के दौरान इन पांच अहम मुद्दों को उठा सकती है.

कश्मीर मुद्दा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर पर बहस की मांग की है. पिछले कई दिनों से कश्मीर हिंसक विरोध प्रदर्शन की गिरफ्त में है.

कांग्रेस सरकार से घाटी में बिगड़ रहे कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर उसका विचार जानना चाहेगी. घाटी में अभी तक 41 लोगों की जान जा चुकी है. साथ ही सैंकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए हैं.

कांग्रेस इस पूरे मामले में बीजेपी को भी घेरने की कोशिश करेगी क्योंकि राज्य में उसकी गठबंधन सरकार है. खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के दोनों सदन में कश्मीर मुद्दे पर लंबी बहस को तैयार हैं. हालांकि कांग्रेस ने वानी के मामले में सरकार के रुख का समर्थन किया है लेकिन उसने राज्य में अत्यधिक हिंसा को लेकर सवाल उठाए हैं.

सहयोगात्मक संघवाद

मानसून सत्र से एक दिन पहले प्रधानमंत्री की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में आजाद ने केंद्र और राज्य के बीच भरोसे की कमी का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर राज्यों की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने का आरोप लगाया था.

उन्होंने अकाली दल के उस आरोप का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने बीजेपी पर राज्यों को नजरअंदाज करने की बात की थी. कांग्रेस को इस मसले पर अन्य क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिलने की उम्मीद है क्योंकि इसे लेकर हर गैर बीजेपी सरकार चिंतित है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार की वापसी हो चुकी है. अरुणाचल में बीजेपी के समर्थन वाली कलिको पुल की सरकार सत्ता से बाहर जा चुकी है. कांग्रेस संसद सत्र में राज्यों में दखल दिए जाने को लेकर हमला बोलने की तैयारी में है. उत्तराखंड में भी सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद कांग्रेस के सरकार की वापसी हो चुकी है.  

जीएसटी

केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस सत्र में वह जीएसटी बिल पास करा लेगी लेकिन कांग्रेस ने अभी तक इस मामले में समर्थन के संकेत नहीं दिए हैं. जीएसटी बिल को लेकर केंद्र सरकार अभी तक कांग्रेस के साथ कोई सहमति बनाने में विफल रही है.

कांग्रेस तीन मांगों पर अड़ी है. पहला कि जीएसटी रेट को 18 फीसदी तय किया जाए और अतिरिक्त लेवी के तौर पर एक फीसदी अतिरिक्त टैक्स के प्रावधान को खत्म किया जाए. साथ ही विवादों के निपटारे के लिए स्वतंत्र संस्था बनाई जाए. केंद्र सरकार दो मांगों पर सहमत है लेकिन वह 18 फीसदी नियंत्रण के सीमा का विरोध कर रही है.

सर्वदलीय बैठक के बाद आजाद ने कहा कि इस मामले में अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है. जीएसटी को लेकर सरकार और कांग्रेस मंगलवार को अगले दौर की बैठक करेंगे.

रक्षा घोटाला

यह एक तरह से अगस्ता वेस्टलैंड के मामलेे में कांग्रेस का जवाब होगा. पिछला पूरा सत्र इसी विवाद की भेंट चढ़ गया था. सत्ताधारी पार्टी के सांसद सुुब्रमण्यन स्वामी ने कांग्रेस प्रेसिडेंट सोानिया गांधी को निशाना बनाते हुए उन पर घूस लेने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार को जांच कराने के लिए कहा.

हालांकि अब पूरा मामला बदल चुका है. कांग्रेस ने सरकार पर सिंगल वेंडर जैसी व्यवस्था शुरू करने का आरोप लगाया है. सरकार ने पूर्व रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की आपत्तियों को खारिज करते हुए यह व्यवस्था शुरू की है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वह इस मामले को संसद में तब तक उठाएंगे जब तक कि सरकार इस बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे देती.

टेलीकॉम घोटाला

कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने 45,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया है जिसकी पुष्टि सीएजी रिपोर्ट में भी की गई है. उनका कहना है कि सरकार छह बड़ी टेलीकॉम कंपनियों की मदद कर रही है.

कांग्रेस निश्चित तौर पर इस मामले को संसद में उठाएगी क्योंकि सरकार अभी तक इस मोर्चे पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी है.

First published: 19 July 2016, 8:03 IST
 
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