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पांच बार, यू-टर्न सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2016, 18:21 IST

बीजेपी ने यूपीए के शासनकाल में विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जिन मुद्दों पर संसद से लेकर सड़क तक अपना विरोध दर्ज कराया था. आज उन्हीं मुद्दों पर मोदी सरकार अपनी सहमती दर्ज करा रही है और उन्हें लागू करने पर विशेष ध्यान दे रही है.

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी नमामी गंगे और जनधन योजना से जनता को कुछ विशेष लाभ मिलता दिख नहीं रहा है. मोदी सरकार सदन के बाहर जिस एजेंडे पर काम करती नजर आ रही है, वो भी विवादों से परे नहीं हैं.

चाहे वह रोहित वेमुला की आत्महत्या का मामला हो या फिर जेएनयू में राजद्रोही विवाद. कुल मिलाकर यही लग रहा है कि 'अबकी बार, यू-टर्न सरकार'. नीतिगत मामलों मेें अब तक यह सरकार पांच बार अपने फैसले से पीछे हट चुकी है.

1) जीएसटी बिल

बीजेपी विपक्ष में रहते हुए यूपीए के जिस जीएसटी बिल का मुखर विरोध कर रही थी, उसे एनडीए की सरकार बनते ही वित्तमंत्री अरुण जेटली देश की जरुरत बताने लगे. आज वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली उसी जीएसटी बिल को पास कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.

अगर जीएसटी बिल लागू होता है तो उत्पाद शुल्क और सर्विस टैक्स सहित केंद्र और राज्यों के सभी परोक्ष कर समाप्त हो जाएंगे. जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में एक प्रोडक्ट लगभग एक ही क़ीमत पर बाजार में मिलने लगेंगे.

2) काला धन

साल 2014 के लोकसभा के चुनाव में बीजेपी और तत्कालीन पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से वादा किया था कि केंद्र में अगर उनकी सरकार बनाती है तो सौ दिन के भीतर विदेशों में रखा कला धन देश में वापस लाएंगे और उसके परिणाम स्वरूप हर गरीब को 15-20 लाख रुपए मिलेंगे. लेकिन बाद में बीजेपी के ही एक बड़े नेता ने इसे 'चुनावी जुमला' करार दिया था. 

वहीं साल 2016-17 के लिए वार्षिक बजट को पेश करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की कि जिन लोगों के पास अघोषित संपत्ति (काला धन) है, वह उसका 45 फ़ीसद टैक्स जमा करके कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं.

यानी काले धन का 45 फ़ीसद हिस्सा सरकार के पास टैक्स के रूप में जमा करने के बाद बाकी बची 55 फ़ीसदी की संपत्ति (काले से सफेद) कानूनी तौर पर जायज हो जाएगी.

मोदी सरकार की यह योजना एक जून 2016 से 30 सितम्बर 2016 तक लागू रहेगी. इस योजना की घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते लोकसभा में इस योजना को 'फेयर एंड लवली योजना' तक कह दिया था.

3) मनरेगा

सरकार ने इस बजट में मनरेगा के लिए 38,500 करोड़ रूपए आवंटित किए हैं. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को यूपीए सरकार की विफलता का सबसे बड़ा स्मारक बताया था. अब वही नरेंद्र मोदी मनरेगा को राष्ट्रीय गौरव का कार्यक्रम कह रहे हैं.

4) आधार कार्ड

बीजेपी ने विपक्ष में रहते हुए यूपीए सरकार की सफल योजना भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या यानी आधार कार्ड के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाये थे.

बीजेपी का इस विषय में मामना था कि आधार कार्ड किसी की पहचान की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी शर्त नहीं हो सकती.

लेकिन अब उसी एनडीए की मोदी सरकार ने साल 2016-17 के आम बजट में एक प्रस्ताव दिया, जिसमें सब्सिडी और दूसरे सरकारी लाभ के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बना दिया गया.

5) ईपीएफ पर टैक्स

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में घोषणा की, कि 1 अप्रैल, 2016 के बाद कर्मचारियों की तरफ़ से जमा कराए गए कर्मचारी भविष्य निधि फंड से पैसे निकालने पर 60 फ़ीसद हिस्से पर सरकारी ब्याज लगेगा.

इसके बाद इस प्रस्ताव की चौतरफा आलोचना से बैकफुट पर आई मोदी सरकार ने मंगलवार को इस प्रस्ताव को वापस लेने की घोषणा की.

First published: 9 March 2016, 18:21 IST
 
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