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मुसलमानों के बाद अब सिखों को भी देशभक्ति सिद्ध करनी होगी

आदित्य मेनन | Updated on: 18 April 2017, 11:11 IST


हिंदूवादी संगठनों ने मुसलमानों को हमेशा देशद्रोही बताया है. अब वे सिखों के देश-प्रेम पर भी सवाल उठाने लगे हैं. सिखों ने जब भी उनके खिलाफ अपनी बात रखी, उन्हें राजद्रोही बताया गया. भले ही वह भारतीय सेना का उच्च अधिकारी ही क्यों ना रहा हो. हाल ही में सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल हरचरणजीत सिंह पनाग के साथ भी यही हुआ.

पनाग परम विशिष्ट सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित हैं. वे उत्तरी और केंद्रीय कमान के सेना प्रमुख रह चुके हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी अहम भूमिका रही है. पर पिछले दिनों उनका अपमान करने में दक्षिणपथियों ने सारी हदें पार कर दीं. उन्होंने उन्हें गालियां दीं और अपमानित किया. उन पर देशद्रोही, आतंकियों का समर्थक और ‘खालिस्तानी’ होने तक के आरोप लगाए गए.


ऐसा इसलिए क्योंकि लेफ्टिनेंट जनरल पनाग ने भारतीय सेना के खिलाफ ट्विट किया था. पिछले दिनों सेना की जीप के बोनट पर एक कश्मीरी को बांधकर घुमाना उन्हें ठीक नहीं लगा. उन्होंने लिखा कि यह सेना और देश के हित में नहीं है. सेना के पूर्व अधिकारी का यह कहना वाकई साहस की बात है. वह भी तब जब वे जम्मू कश्मीर में 5 स्टिंट कर चुके हैं और उत्तरी कमान उधमपुर मुख्यालय के प्रमुख रहे हैं.

 

बेबाक लेफ्टिनेंट जनरल


लेफ्टिनेंट जनरल का ट्रैक रिकार्ड ऐेसा ही रहा है. उन्होंने हमेशा जो ठीक लगा वो कहा और जो उनकी अंतरात्मा ने कहा, उसे सुना. उन्होंने सेना में कथित भ्रष्टाचार के लिए 120 जांच न्यायालयों तक को आदेश दिए थे. पिछले साल भी उन्होंने कश्मीर की स्वायत्तता के पक्ष में लिखा था.


शनिवार को ट्विट करने के बाद भूचाल-सा आ गया. लोग जबर्दस्त नाराज हुए और उन पर बरस पड़े. केवल दक्षिणपंथी ही नाराज नहीं थे, भाजपा के कुछ प्रमुख समर्थकों ने भी उनकी निंदा की. उन्हें भला-बुरा कहने वालों में सबसे आगे इंफोसिस के पूर्व प्रमुख टीवी मोहनदास पाई थे. उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पनाग पर कई सवाल दागे.

 

पर नरेंद्र मोदी सरकार के दो जाने-पहचाने चेहरे-फिल्म निर्देशक अशोक पंडित और गायक अभिजीत का उनके खिलाफ ट्वीट करना मायने रखता है. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य अशोक पांडे और उत्पीड़न के आरोपी अभिजीत, दोनों ने उनके खिलाफ ट्वीट किया. सिखों के लिए अशोक पंडित की राय जाननी हो, तो उनकी ‘शीन’ (२००४) फिल्म देखें. फिल्म में कश्मीरी सिखों को कायर बताया गया है, जो आतंकियों के साथ सौदा करते हैं.


गुरुदास भाट ने भी लेफ्टिनेंट जनरल पनाग के बारे में ट्वीट किया कि लेफ्टिनेंट जनरल पनाग ‘अपनी ही सेना पर पत्थर फेंकेंगे.’ ट्विटर पर गुरुदास भाट को पीएम नरेंद्र मोदी तक फॉलो करते हैं. पनाग ने ही नहीं, कई अधिकारियों ने एक सिविलियन को ह्यूमन शील्ड के तौर पर इस्तेमाल करने का विरोध किया और कहा कि कश्मीरियों का सेना पर से भरोसा उठ गया है.


दक्षिणपंथियों ने लेफ्टिनेंट जनरल पनाग को सीधे निशाना बनाया. शायद इसलिए कि वे सिख थे. यह इससे ही सिद्ध है कि उन्होंने अपने एक आरोप में उन्हें ‘खालिस्तानी’ बताया. इस संबंध में और भी कई लोगों ने पनाग के खिलाफ ट्वीट किए. कुछ ने उनकी तुलना भारतीय सेना के मेजर जनरल शबेग सिंह तक से की. सिंह ने जनरल सिंह भिंडरावाले के साथ मिलकर काम किया था.


पनाग के साथ-साथ उनके परिवार को भी झूठे आरोप झेलने पड़े. उनके बेटे शेरबीर पनाग दिल्ली में वकील हैं. उन्हें खालिस्तानी कहा गया. और अफसोसनाक ये कि विमान-चालक अनिल चोपड़ा ने शेरबीर के खिलाफ इस ट्वीट को ‘लाइक किया’, जो एयर मार्शल रह चुके हैं. लेफ्टिनेंट जनरल पनाग का साथ देने के लिए वकील नवदीप सिंह की भी आलोचना की गई. नवदीप सिंह आरक्षित सेना में थे. वे फिलहाल सैनिकों के पक्ष में मुकदमे लड़ते हैं.

 

पहले भी हुए हैं हमले


इससे पहले भी हिंदूवादी संगठनों ने सिखों पर हमला किया है. दिल्ली विश्वविद्यालय के गुरमेहर कौर को उन्होंने सोशल मीडिया पर मारने और रेप की धमकी दी. एबीवीपी की गुंडागीरी के खिलाफ बोलने के लिए. एचएस फूलका और जरनैल सिंह जैसे आम आदमी पार्टी के नेताओं पर भी पहले खालिस्तानी का लेबल लगा है.


कई सिखों का कहना है कि दक्षिणपंथियों द्वारा सिखों को ‘खालिस्तानी’ का लेबल देना एक खतरनाक ट्रेंड बन गया है. वे मुसलमानों को राजद्रोही कह रहे हैं. उन्होंने उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी से लेकर शाहरुख खान, आमिर खान और सानिया मिर्जा जैसे मशहूर मुसलमानों को राजद्रोही बताया है.

दोनों समुदायों के लिए संदेश साफ है- आप चाहें हामिद अंसारी हों या एचएस पनाग. भले ही आपने देश के लिए कितना ही किया हो. आपने हिंदूवादियों का कहना नहीं माना, तो आपको राजद्रोही कहा जाएगा. अल्पसंख्यकों को अपनी जबान खोलने की इजाजत नहीं है.

First published: 18 April 2017, 11:11 IST
 
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