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शिवसेना-भाजपा गठबंधन: याराना खत्म, दुश्मनी शुरू, बीएमसी चुनाव में आमने-सामने

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 January 2017, 8:00 IST

देश के सबसे बड़े निकाय बृहन्मुंबई महानगर पालिका समेत महाराष्ट्र के 25 जिला परिषद के चुनाव से ठीक पहले शिवसेना ने भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है. इसका ऐलान करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला.

उन्होंने कहा है कि हम सत्ता के लालची नहीं हैं और हम सभी सीटों पर जीत हासिल कर लेंगे. पिछले दिनों सामना में आए संपादकीय के बाद कैच ने रिपोर्ट किया था कि शिवसेना और भाजपा के बीच निकाय चुनाव को लेकर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. 

गुरुवार को गोरेगांव में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते समय उद्धव के तेवर बेहद सख्त थे. उन्होंने कड़े शब्दों में भाजपा को बीएमसी चुनावों में देख लेने की चुनौती दी. देश के दो बड़े दक्षिणपंंथी दलों के बीच यह सबसे पुराना गठजोड़ था. लेकिन इन रिश्तों में पिछले काफी समय से खिंचाव चल रहा था. 2015 में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में जब से भाजपा सीनियर पार्टनर बनकर उभरी थी तभी से दोनों दलों के रिश्तों में कड़वाहट थी.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा सीनियर पार्टनर बनकर उभरी, तभी से दोनों दलों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी

उस समय शिवसेना ने काफी ना-नुकुर के बाद सरकार में शामिल होने का फैसला किया था. भाजपा ने भी उस समय अपनी तरफ से शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावनाओं पर काम किया था.

उद्धव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, 'भाजपा केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में है. इसके बावजूद अब वो हमारे घर के भीतर महाराष्ट्र में हमारे ऊपर आंखे तरेर रही है. एमसीजीएम पर कब्जे का सपना देख रही है.'

उद्धव यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा, 'हम पिछले 25 सालों से एनडीए में सड़ रहे थे. अब हम इसमें शामिल रह कर और अपमानित नहीं होंगे.' गौरतलब है कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक समेत 25 जिला परिषद और नगरपालिक का चुनाव 16 और 21 परवरी को प्रस्तावित हैं. 23 फरवरी को वोटों की गिनती होगी.

उद्धव ठाकरे ने कहा, 'शिवसेना के 50 साल के इतिहास में गठबंधन के चलते 25 साल बर्बाद हुए हैं. हम सत्ता के लालची नहीं हैं. भाजपा के पास हमारे सैनिकों से लड़ने की हिम्मत नहीं है. इसलिए उन्होंने गुंडों को बुला लिया है. हमें बीएमसी चुनाव की परवाह नहीं है, हम सभी सीटों पर जीत हासिल करेंगे.' उद्धव ने यह भी कहा है कि शिवसेना अब आगे अकेले दम पर भगवा लहराएगी और किसी के दरवाजे पर गठबंधन के लिए नहीं जाएगी.

क्यों नहीं हुआ गठबंधन?

शिवसेना के हमले पर पलटवार करते हुए महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'हमारा लक्ष्य सत्ता नहीं बल्कि विकास है. जो हमारे साथ आएंगे, हम उन्हें साथ लेंगे और जो नहीं आएंगे उन्हें छोड़ देंगे. परिवर्तन का स्वागत है.'

शिवसेना और भाजपा के बीच बढ़ते तीखे हमलों के बाद सूबे की सत्ता में भी दोनों दलों के गठबंधन पर आशंकाओं के बादल मंडराने लगे हैं.

भाजपा बीएमसी की 227 सीटों में से आधी यानी कि करीब 114 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही थी जो शिवसेना को मंजूर नहीं था. शिवसेना ने उसे महज 60 सीटों की पेशकश की थी. सीटों को लेकर गहराते मतभेद के बाद हाल ही में शिवसेना ने सामना में भाजपा पर तीखा हमला बोला था.

दोनों दलों के बीच इसे लेकर हालात बिगड़ते गए और गुरुवार को शिवसेना सुप्रीमो ने साथ में चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया. निकाय चुनाव के लिए नामांकन का काम आज से शुरू हो जाएगा और 3 फरवरी तक चलेगा. दोनों दलों के पास 227 वार्डों में उम्मीदवारों के चयन के लिए वक्त नहीं बचा है. 

उद्धव ठाकरे ने इशारों-इशारों में भाजपा और शरद पवार के बीच पनप रहे रिश्तों पर भी तंज कसा. उन्होंने शरद पवार को पद्म विभूषण पुरस्कार दिए जाने के फैसले पर 'गुरु दक्षिणा' कहकर चुटकी ली.

दरअसल शिवसेना और भाजपा के बीच रिश्तों में खटास की एक वजह शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी है. भाजपा ने लगातार इस तरह के संकेत बीते दो सालोंं में दिए है जिससे यह प्रतीत होता है कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ काम कर सकती है. यह बात शिवसेना को कतई मंजूर नहीं है. दोनों दलों के रिश्तों में एक बड़ा रोड़ा शरद पवार भी हैं जिनका इस्तेमाल भाजपा शिवसेना पर नकेल कसने के लिए करती आ रही है. 

कहा है कि भाजपा में बहुत सारे गुंडे हैं लेकिन हमारी पार्टी में गुंडे नहीं सैनिक हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा में हमारे सैनिकों से लड़के की क्षमता नहीं है, इसीलिए भाजपा ने गुंडों को हायर किया है. मुझे बीएमसी के चुनावों की चिंता नहीं है. हम आश्वस्त हैं कि हम सभी चुनावों को जीत लेंगे. 

वहीं भाजपा नेता किरिट सोमैया ने कहा है कि अगर कोई हमारी इस सदिच्छा से दुखी है कि हम बीएमसी को भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते हैं तो हमारी तरफ से कोई समझौता नहीं होगा. हम बीएमसपी में पारदर्शिता लाएंगे. 

First published: 27 January 2017, 8:00 IST
 
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