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ITBP के जवानों ने लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के किनारे 14 हजार फुट की ऊंचाई पर फहराया तिरंगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 August 2020, 9:27 IST

Happy Independence Day: आज पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से लेकर कन्याकुमारी (Kanyakumari) तक और गुजरात (Gujarat) से लेकर अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) तक पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ है. कोरोना वायरस (Corona Virus) के चलते इस बार भले ही स्कूल-कॉलेजों में स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर कार्यक्रमों का आयोजन न किया जा रहा हो लेकिन सभी सार्वजनिक स्थानों (Public Places) पर भारत (India) की शान तिरंगे को जरूर फहराया गया. फिर चाहे वो स्कूल-कॉलेज हों या सरकारी दफ्तर.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने करीब सात बजकर 35 मिनट पर लाल किला (Red Fort) पर तिरंगा फहराया तो भारतीय सेना (Indian Army) के जवानों ने भी तिरंगे को सलामी दी. देश के कोने-कोने में भारत की सुरक्षा में तैनात भारतीय जवानों ने तिरंगा फहराकर भारत की आजादी की 74वीं वर्षगांठ मनाई. इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों ने लद्दाख (Ladakh) में 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पैंगोंग त्सो झील (Pangong Tso Lake) के किनारे तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया.


क्यों प्रसिद्ध है पैंगोंग त्सो झील-

बता दें कि इसी साल जून के महीने में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पैंगोंग त्सो झील (Pangong Tso Lake) के समीप लद्दाख में तनाव की स्थिति देखने को मिली थी. लगभग दो साल पहले भी पूर्वी लद्दाख के क्षेत्र में इसी तरह की एक घटना हुई थी. इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र में वास्तविक रूप से LAC कहां है इसे लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, LAC के संबंध में अलग-अलग धारणाएं हैं. लद्दाखी भाषा में पैंगोंग का अर्थ है समीपता और तिब्बती भाषा में त्सो का अर्थ है झील. पैंगोंग त्सो लद्दाख हिमालय में 14,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित एक लंबी संकरी, गहरी, एंडोर्फिक (लैंडलॉक) झील है.

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पैंगोंग त्सो का पश्चिमी छोर लेह के दक्षिण-पूर्व में 54 किलोमीटर दूर स्थित है. 135 किलोमीटर लंबी यह झील बुमेरांग (Boomerang) के आकार में 604 वर्ग किलोमीटर में में फैली हुई है और अपने सबसे विस्तारित बिंदु पर यह 6 किलोमीटर चौड़ी है. खारे पानी की यह झील शीत ऋतु में जम जाती है, यह आइस स्केटिंग (Ice Skating) और पोलो के लिये सबसे अच्छा स्थान है. इसका जल खारा होने के कारण इसमें मछली या अन्य कोई जलीय जीवन नहीं है, लेकिन यह कई प्रवासी पक्षियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल है.

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इस झील का 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत में स्थित है, जबकि 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में पड़ता है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) इस झील के मध्य से गुज़रती है. 19वीं शताब्दी के मध्य में यह झील जॉनसन रेखा के दक्षिणी छोर पर थी. जॉनसन रेखा अक्साई चीन क्षेत्र में भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारण का एक प्रारंभिक प्रयास था.

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पैंगोंग त्सो झील का राजनीतिक महत्व-

LAC यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पैंगोग त्सो झील के मध्य से होकर गुजरती है, लेकिन भारत और चीन इसकी सटीक स्थिति के विषय में सहमत नहीं हैं. इस झील का 45 किलोमीटर लंबा पश्चिमी भाग भारतीय नियंत्रण में, जबकि शेष चीन के नियंत्रण में आता है. दोनों भारत और चीन की सेनाओं के बीच अधिकांश झड़पें झील के विवादित हिस्से में होती हैं. हालांकि इसके इतर झील का कोई विशेष सामरिक महत्त्व नहीं है. लेकिन यह झील चुशूल घाटी के मार्ग में आती है.

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यह एक मुख्य मार्ग है जिसका चीन द्वारा भारतीय-अधिकृत क्षेत्र में आक्रमण के लिये उपयोग किया जा सकता है. साल 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहां से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था, भारतीय सेना ने चुशूल घाटी (Chushul Valley) के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला (Rezang La) से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था.

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First published: 15 August 2020, 9:27 IST
 
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