Home » इंडिया » j&k: mehbooba mufti deny such sainik colony plan in kashmir
 

जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में सैनिक कॉलोनी पर सियासी बवंडर

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2016, 14:44 IST
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में सैनिक कॉलोनी बनने और जमीन आवंटन की मीडिया के हवाले से आ रही खबरों का खंडन किया है.

महबूबा ने इसे निराधार बताते हुए साफ कहा है कि प्रदेश सरकार की ओर से श्रीनगर में सैनिक और पूर्व सैनिकों के लिए सैनिक कॉलोनी आवासीय परियोजना की स्थापना के लिए कोई जमीन नहीं दी गई है. न ही सरकार की भविष्य में ऐसी कोई योजना है.

बीते दिनों मीडिया में ऐसी खबरें आ रहीं थी कि सरकार श्रीनगर में सैनिक कॉलोनी के लिए जमीन आवंटित करने जा रही है. जिसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती को आड़े हाथ लेते हुए तीखे सवाल किए.

sainik-colony-j&k

इस मामले में उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से पूछा, "क्या जम्मू-कश्मीर सरकार ‘सैनिक कॉलोनी’ की बात को राजनीतिक रूप से प्रेरित कर रही है, अगर यह बात सच भी है तो सरकार की इस योजना के पीछे कौन है?"

sanik colony-j&k-1

हुर्रियत ने बोला हमला


नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा अलगाववादी पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने इस तरह की किसी योजना के विरोध की बात कही है. हुर्रियत के प्रवक्ता अयाज अकबर ने कहा कि सरकार प्रदेश में जनसंख्या के संतुलन के साथ खिलवाड़ करने की सोच रही है और हम इसका कड़ा विरोध करते हैं.


वहीं हुर्रियत के वरिष्ठ नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस मसले पर कहा कि हम सरकार के इस तरह के किसी भी फैसले की पुरजोर मुखालफत करेंगे.

हुर्रियत के चेयरमैन मीरवाईज उमर फारूक ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि वे (केंद्र सरकार) जम्मू-कश्मीर के जनसंख्या संतुलन से खिलवाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं.

सरकार का आवंटन से इनकार


मीडिया के द्वारा इस तरह की खबरें प्रसारित की गईं कि महबूबा सरकार घाटी में सैनिक कॉलोनी बनाने के लिए जमीन का आवंटन करने जा रही है. जिसके बाद से राज्य में इसके खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे.

मामले को तूल पकड़ते देख प्रदेश के शिक्षा मंत्री और सरकार के प्रवक्ता नदीम अख्तर ने स्पष्ट किया कि सैनिक कॉलोनी के नाम पर कोई जमीन आवंटित नहीं की जा रही है.

अख्तर ने कहा कि पूर्व सैनिक समय-समय पर आवासीय कॉलोनी की मांग करते रहते हैं, लेकिन हमारी ओर से घाटी में इस तरह की कोई परियोजना नहीं है.

2008 में श्राइन बोर्ड जमीन विवाद


गौरतलब है कि 2008 में अमरनाथ श्राइन बोर्ड का जमीन विवाद काफी सुर्खियों में रह चुका है. मई 2008 में हुए समझौते के तहत अमरनाथ श्राइन बोर्ड को कश्मीर घाटी में 40 हेक्टेयर ज़मीन दी गई थी, लेकिन अलगाववादियों के विरोध की वजह से श्राइन बोर्ड को मालिकाना हक नहीं दिया गया था.

उस समय के तत्कालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने विवाद को हल करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई थी. जिसने अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति के साथ समझौता किया था.

श्राइन बोर्ड को जमीन आवंटन को लेकर घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद फैसले को वापस लेना पड़ा था.

First published: 9 May 2016, 14:44 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी