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जफरयाब जिलानी: मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल हमें कतई कबूल नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 April 2016, 14:47 IST

ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शनिवार को आरोप लगाया कि अदालतों के जरिये मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप किया जा रहा है.

लॉ बोर्ड ने इस मसले पर केंद्र सरकार से अपील की, कि मोदी सरकार शरीयत कानून के मौजूदा हाल को बनाये रखने के पिछली सरकारों के नक्शे-कदम पर चले. 

बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने बोर्ड की कार्यकारिणी समिति की करीब चार घंटे तक चली बैठक के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अदालतों के जरिये पर्सनल लॉ में दखलंदाजी की जा रही है.

जिलानी ने कहा कि बोर्ड केंद्र सरकार से अपील करती है कि शरीयत में किसी तरह की हस्तक्षेप ना हो. जैसे बीते सरकारों का शरीयत कानून को लेकर सकारात्मक रुख रहा है, हम वर्तमान सरकार से भी उसी तरह की अपेक्षा करते हैं.

इसके अलावा बोर्ड कि बैठक में दस्तूर-ए-शरीयत को बचाने को भी चर्चा हुई.

उन्होंने कहा कि स्कूलों में सूर्य नमस्कार वगैरह का चलन बनाने की कोशिशें हो रही हैं, जिसे हम मुसलमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे. बोर्ड इसके लिये बेदारी मुहिम चला रहा है जिसे और आने वाले वक्त के साथ इसे और भी पैना किया जाएगा. 

बोर्ड की सदस्य असमां जहरा ने इस मामले में बताया कि बोर्ड मुस्लिम समाज में महिलाओं के अधिकारों के सिलसिले में जागरूकता का काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि महिलाएं तलाक या दहेज उत्पीड़न के मामलों को अदालतों में ले जाने के बजाय शरई अदालत दारुल कजा ले जाएं तो इससे शरीयत में बेजा दलखंदाजी से बचा जा सकेगा.

वहीं, बोर्ड के सचिव शाह फजले रहीम ने कहा कि इस बैठक में पिछले साल अमरोहा में हुई बैठक की कार्रवाई की पुष्टि की गयी और बोर्ड की विभिन्न समितियों के कामकाज का जायजा भी लिया गया.

First published: 17 April 2016, 14:47 IST
 
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