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एक पति के रूप में अपनी विफलता पर सईद जाफरी की बेबाक स्वीकरोक्ति

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 November 2015, 18:23 IST

90 के दशक के बच्चो के लिए सईद जाफरी सबसे अच्छे पिता थे. वो अपने किरदारों के साथ बखूबी तालमेल बिठा लेते थे. बहू हो तो ऐसी में बुरे ससुर की हो या फिर चालबाज में दोस्ताना बाप की भूमिका.

उन्होंने माई ब्यूटीफुल लॉन्डरे (1985) के लिए BAFTA जीता, शतरंज के खिलाड़ी (1977) के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और मसाला (1992) के लिए उन्हें जीनी पुरस्कार के लिए नामित किया गया. लेकिन सोशल मीडिया पर इस हफ्ते, उन्होंने सबसे हृदय विदारक डायरी प्रविष्टि जीती.

हालांकि इस डायरी प्रविष्टि की वैधता को अभी तक कोई प्रामाणित नहीं कर सका है. इसके बारे में कहा जा रहा है कि यह कथित तौर पर उनकी आत्मकथा 'सईद : एक अभिनेता की यात्रा ' का हिस्सा है. हाल के दिनों में फेसबुक पर इसे सबसे ज्यादा देखा और साझा किया गया है.

उनकी मृत्यु पर जब चारो तरफ उनका यशगान हो रहा है, श्रद्धांजलियां लिखी जा रही है, तब उनकी डायरी प्रविष्टि का यह हिस्सा ही शायद उनकी सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि है. यह उस आदमी की मजबूती को दर्शाता है जो इतने निर्मम तरीके से अपने बारे में लिख सके और बिना संकोच खुद को अपमानित कर सके.

सईद जाफरी की पहली पत्नी मधुर जाफरी थी जो एक जानी मानी शेफ और लेखिका थी. उनके साथ जाफरी की तीन बेटियां हैं. उनकी दूसरी पत्नी जेनिफर जाफरी के साथ उनको कोई बच्चा नहीं है.

उस डायरी प्रविष्टि का पूरा हिस्सा आप यहां पढ़ सकते हैं

जब मैं 19 साल का था तब मेरी शादी 17 साल की मेहरुनीमा से हुई थी. जैसे जैसे मैं बड़ा हो रहा था, औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश संस्कृति के प्रति मेरा मोह बढ़ता जा रहा था. मैंने धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सीख लिया था. शान के साथ सूट पहनता था और अंग्रेजी व्यवहार-विचारों को भी सीख लिया था. जबकि मेहरुनीमा का व्यक्तित्व मेरे बिल्कुल विपरीत था. वह एक ठेठ घरेलू गृहिणी थी. तमाम सलाह और चेतावनी के बावजूद उसका मूल व्यक्तित्व नहीं बदला. वह एक आज्ञाकारी पत्नी, एक सहृदय मां और एक अच्छी गृहिणी थी.

लेकिन वह वैसी नहीं थी जैसा मैं चाहता था. जितना ज्यादा मैं उसे बदलने की कोशिश करता उतना ही अधिक हम दूर हो जाते. धीरे-धीरे वह एक हंसमुख, जवान लड़की से एक एक शांत, असुरक्षित महिला में तब्दील हो गयी. इस बीच मैं अपनी एक सह-अभिनेत्री की ओर आकर्षित हो गया. उसमें वह सब मौजूद था जो मैं अपनी पत्नी में चाहता था.

शादी के 10 साल बाद मैंने मेहरुनीमा को तलाक दे दिया, घर छोड़ दिया और अपनी सह अभिनेत्री से शादी कर ली. मैंने मेहरुनीमा और मेरे बच्चों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की. 6-7 महीने तक सब ठीकठाक चलता रहा. इसके बाद मुझे यह एहसास होने लगा कि मेरी नई पत्नी न तो मेरी देखभाल करती है न ही उस तरह से प्यार करती है. उसे केवल अपनी सुंदरता, अपनी महत्वाकांक्षा, इच्छाओं की परवाह रहती थी. कभी कभी मुझे मेहरुन्निमा के प्यार भरे स्पर्श की बेहद कमी महसूस होती थी. मुझे अपनी ही चिंता होने लगती थी.

जीवन आगे बढ़ रहा था. मैं और मेरी नई पत्नी एक छत के नीचे रहते थे लकिन दोनों की आत्मा एक नही हो सकी थी. मैं वापस मुड़कर कभी यह देखने नहीं गया कि मेहरुनीमा और मेरे बच्चे किस हालत में हैं. मेरी दूसरी शादी के करीब 6 -7 साल बाद, मैंने मधुर जाफरी के बारे में लेख देखा जो की एक प्रसिद्ध शेफ थी. हाल ही में उनके व्यंजनों पर एक पुस्तक का विमोचन हुआ था. मैंने उस खूबसूरत महिला की तस्वीर देखा और मैं दंग रह गया. वह मेहरुनीमा थी. लेकिन यह कैसे हो सकता था?

उसने दोबारा शादी कर ली थी और अपना पुराना नाम भी बदल लिया था. मैं उस समय विदेश में शूटिंग कर रहा था. वह तब अमेरिका में रहने लगी थी. मैंने अमेरिका के लिए अगली फ्लाइट पकड़ी और उससे मिलने पहुंच गया. पर उसने मुझसे मिलने से साफ मना कर दिया. मेरा बेटा जो 12 साल का था और मेरी बेटी जो 14 साल की थी ने अपनी मां से कहा की वह मुझसे आखिरी बार बात करना चाहते हैं. लेकिन उनका नया पति भी उनके पक्ष में था. वह अब मेरे बच्चों का कानूनी पिता भी था. आज तक मैं वह बात नहीं भूल पाया हूं जो मेरे बच्चों ने मुझसे कहा था.

मेरे बच्चो ने मुझे बताया की उनके नए पिता ने सच्चे प्यार का मतलब समझा. उन्होंने मेहरुनीमा को वैसे ही अपनाया जैसी वह थी. उन्होंने उन्हें कभी भी बदलने की कोशिश नही की. क्योंकि वह उन्हें खुद से भी ज्यादा प्यार करते थे. उन्होंने मेहरुनिमा को अपने हिसाब से बदलने की हिम्मत दी और कभी भी उन पर अपनी इच्छाओं को नही थोपा. उन्होंने उन्हें उसी तरह स्वीकार किया जैसी वह थी. और वह अपने दूसरे पति के नि:स्वार्थ प्यार और समर्पण के कारण तहत आज विश्वास से भरी और प्यार करने वाली आत्मनिर्भर महिला के रूप में सामने आई हैं. 

First published: 17 November 2015, 18:23 IST
 
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