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1984 सिख दंगा और कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर की कानूनी यात्रा

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2016, 14:29 IST

1984 के सिख दंगों में मुकदमे का सामना कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश टाइटलर सिख समुदाय से माफी मांगने के लिए तैयार हो गए हैं.

शुक्रवार को टाइटलर ने कहा, "मैं भी सिख परिवार से हूं. माफी मांगने को लेकर मैंने अकाल तख्‍त को चिट्ठी भी लिखी है. मेरा गुरु ग्रंथ साहिब पर पूरा विश्‍वास है. यदि मुझे अकाल तख्‍त की ओर से बुलावा मिलता है, तो वे मुझे जो सजा देंगे, मैं भुगतने को तैयार हूं."

हालांकि टाइटलर ने ये भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख दंगों से उनका कोई ताल्लुक नहीं है और ना ही वो किसी भी रूप में इस मामले में शामिल थे.

करीब 32 साल पहले 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित पूरे देश में सिखों के खिलाफ दंगे भड़क उठे थे. कहा जाता है कि सिर्फ दिल्ली की सड़कों पर चार दिनों के अंदर 3000 से ज्यादा निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई.

इस दंगे में टाइटलर के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार, आर के आनंद और एचकेएल भगत पर आरोप लगा कि उन्होंने दंगाइयों का नेतृत्व किया.

टाइटलर पर आरोप है कि उन्होंने उस हिंसक भीड़ की अगुवाई की, जिसने एक नवंबर, 1984 को दिल्ली के पुलबंगस इलाके में तीन सिखों की हत्या कर दी थी.

टाइटलर का राजनीतिक जीवन

72 वर्षीय टाइटलर का जन्म 11 जनवरी 1944 को गुजरांवाला (पाकिस्तान) में हुआ था. उनके पिता पंजाबी हिंदू थे, जबकि मां सिख थीं.

टाइटलर पहली बार 1980 में लोकसभा के लिए चुने गए. उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. बाद में उन्हें श्रम मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया.

1991 में वो फिर से सांसद चुने गए और भूतल परिवहन मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया. 2004 में वो फिर से सांसद चुने गए. जिसके बाद वो अप्रवासी भारतीय मामलों के राज्यमंत्री रहे.

नानावटी आयोग में नाम आने पर इस्तीफा

सिख दंगों पर एनडीए सरकार के कार्यकाल में मई, 2000 में गठित नानावती आयोग ने फरवरी, 2005 को केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

नानावटी आयोग ने कहा था कि टाइटलर के खिलाफ कुछ 'भरोसेमंद प्रमाण' हैं और बहुत संभावना है कि उनका दंगों के दौरान किए गए हमलों में हाथ हो.

इसके बाद अगस्त, 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने कैबिनेट से उनका इस्तीफा ले लिया था.

2007 में पहली क्लीन चिट

सीबीआई ने इस केस में सितंबर 2007 में टाइटलर को क्लीन चिट देते हुए पहली बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी और मामले को बंद करने की सिफारिश की थी.

इसके बाद सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ दंगा पीड़ितों और कुछ सिख संगठनों ने याचिका दायर की थी.जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिसंबर 2007 में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट मानने से इनकार कर दिया था.

2009 में दोबारा मिली क्लीन चिट

मार्च, 2009 में कोर्ट में दाखिल फाइनल रिपोर्ट में सीबीआई ने दूसरी बार टाइटलर को क्लीन चिट दे दी. इस पर विपक्ष में बैठी बीजेपी ने आपत्ति जताई. बीजेपी का आरोप था कि आम चुनावों से पहले सीबीआई का दुरुपयोग कर टाइटलर को क्लीन चिट दिलवाई गई.

पढ़ें:सिख दंगों के आरोपी जगदीश टाइटलर ने की माफी की अपील

टाइटलर को क्लीन चिट दिए जाने से गुस्साए एक सिख पत्रकार जनरैल सिंह ने विरोध स्वरूप तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंक दिया. इस घटना के बाद कांग्रेस ने 2009 के चुनाव में सज्जन कुमार और टाइटलर का टिकट काटकर दूसरे उम्मीदवारों को उनकी जगह खड़ा कर दिया.

2013 में फिर से खुला मामला

अप्रैल, 2013 दिल्ली की एक अदालत ने आदेश दिया कि टाइटलर के खिलाफ 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में फिर से जांच शुरू की जाए.

इससे पहले सीबीआई ने अदालत में कहा था कि टाइटलर 1 नवंबर, 1984 को उस गुरद्वारे के पास थे ही नहीं जहां कत्ल हुए थे. सीबीआई ने कहा कि वो तो उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निवास तीन मूर्ति भवन में थे.

2015 में तीसरी बार क्लीन चिट

मार्च, 2015 में जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट देने के बाद सीबीआई ने दिल्ली कोर्ट में केस की क्लोजर रिपोर्ट भी दे दी थी. इसके बाद केस की फाइल बंद किए जाने का पीड़ितों के वकील ने विरोध किया और इसके 'चोरी-छिपे' दाखिल किए जाने पर सवालिया निशान लगाए.

हालांकि, दिसंबर 2015 में इस मामले में टाइटलर के खिलाफ दोबारा जांच करने का आदेश आ गया. दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट लेने से मना कर दिया और जांच एजेंसी को टाइटलर के खिलाफ तफ्तीश आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे.

खुद को बेगुनाह बताते हैं टाइटलर

शुक्रवार को टाइटलर ने कहा कि इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और सीबीआई ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी है, लेकिन राजनीतिक वजहों से उन्हें बार-बार इस मामले में घसीटा जाता रहा है.

टाइटलर ने कहा कि जिस दिन इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी, उस दिन वो पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में थे. एक नवंबर को इंदिरा गांधी के अंतिम संस्कार में वो शामिल हुए और दूरदर्शन से उस समय की रिकॉर्डिंग में इसे देखा जा सकता है.

First published: 6 May 2016, 14:29 IST
 
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