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मोदी की 'बात काटने' पर ट्वीटरबाज मेनका और जयराम पर उबल पड़े

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 December 2015, 8:44 IST
QUICK PILL
  • जहां पेरिस जलवायु सम्मेलन में मोदी के भाषण का यह कह कर स्वागत किया गया कि उन्होंने पश्चिम को आइना दिखाया दिया है, वहीं, जयराम रमेश और मेनका गांधी किसी और बात की वकालत करते दिखे.
  • जलवायु परिवर्तन के लिए भारत का योगदान बढ़ाने की बात कहने पर इन दोनों नेताओं के खिलाफ ट्विटर पर मुहिम शुरू हो गई. मोदी समर्थकों ने इसे मोदी का विरोध माना.

कांग्रेसी नेता जयराम रमेश और केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी को ट्विवटर पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. सीओपी21 में जलवायु परिवर्तन पर भारत के रुख को लेकर दोनों नेताओं के बयान से कई ट्विटर यूजर्स नाराज नजर आ रहे हैं.

अपने हितों से समझौता किए बगैर पर्यावरण के प्रति सजग देश के रूप भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काफी तारीफ हुई. मोदी ने दावा किया कि प्रदूषण के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है बल्कि वह औद्योगिक देशों के पैदा किए हुए प्रदूषण का खमियाजा भुगत रहा है.

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का बयान आया, "जलवायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार मुल्कों में भारत प्रमुख है. चीन और ब्राजील के साथ ही हम भी मीथेन के बड़े उत्सर्जक हैं. हालांकि हम मीथेन के बारे में विचार नहीं करते. जबकि जलवायु पर मीथेन का कार्बन से 26 गुना ज्यादा असर होता है."

मेनका ने यह बात चेन्नई में हुई बारिश को जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताते हुए कही थी, लेकिन ट्विटर पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा.

twitter jayram menka

इसी तरह जब 30 नवंबर को न्यूयार्क टाइम्स को दिए अपने इंटरव्यू में जयराम ने पेरिस में चल रही सीओपी21 में ओबामा-मोदी की दोस्ती के बारे में अपने विचार दिए तो ट्विटर यूजर्स जयराम रमेश को 'जयचंद रमेश' कहने लगे.

जयराम ने अखबार से कहा था, "मुझे लगता है कि ओबामा, मोदी के साथ हो गए हैं."

इससे पहले कि आपका दिमाग इसका उल्टा अर्थ निकालने लगे, पूरा बयान पढ़ लें. पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि मोदी ने रेफ्रिजरेटरों और एयर कंडीशन के प्रमुख घटक यानी हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी)  के इस्तेमाल में कमी लाने पर हामी भर कर एक तरह से हमारी स्थापित परिपाटी के खिलाफ काम किया. 

भारत द्वारा दी गई इस सहमति को सम्मेलन का निर्णायक क्षण बताया गया. लेकिन जयराम इससे सहमत नहीं थे. इस पर ट्विटर यूजर्स का मानना है कि जयराम पूरे देश की पसंद पर अपनी निजी पसंद थोप रहे हैं. लिहाजा जयराम और उनकी पार्टी (कांग्रेस) इनके निशाने पर है. 

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रमेश ने भी जवाब दिया, "हम कोई बात आसानी से नहीं मानते. हम सबसे ज्यादा नैतिक हैं, सबसे ज्यादा रूढ़िवादी भी हैं. ये लोग फिर से वही पुरानी बयानबाजियां कर रहे हैं."

इसके बाद ट्विटर यूजर्स उनके ऊपर पिल पड़े.

twitter jairam menka2

कुछ लोगों को यह गुस्सा जायज भी लग सकता है. लेकिन उन्हें सोशल मीडिया में 'जयचंद' क्यों कहा जा रहा है?

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि उनकी कथित राष्ट्र विरोधी टिप्पणी के कारण उनकी तुलना भारतीय इतिहास में बड़े धोखेबाज माने जाने वाले कन्नौज के शासक जयचंद से की जा रही है. जयचंद के ऊपर आरोप है कि उसने अपनी निजी शत्रुता के चलते पृथ्वीराज चौहान को धोखा दिया था. जिसके चलते बाहरी आक्रमणकारी मोहम्मद गोरी ने उनके राज्य पर कब्जा कर लिया था.

हालांकि इतिहासकारों में इस बात पर मतभेद है कि पृथ्वीराज ने जयचंद की बेटी का अपहरण कर लिया था या फिर वे दोनों प्रेमी के रूप में भाग गए थे. कहानी यह भी है कि अंत में मोहम्मद गोरी ने जयचंद को धोखा देकर चांदवर के युद्ध में हरा दिया था. 

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First published: 6 December 2015, 8:44 IST
 
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