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बजट 2017: राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाने की बजाय बचा ले गए अरुण जेटली

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 14 February 2017, 7:46 IST
(फाइल फोटो )

साल 2017 का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली एक बार फिर राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाने से बचा ले गए. उन्होंने दलों की फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की बजाय दिखावटी तरीका अपनाया. उन्होंने टैक्स फ्री चंदे की सीमा 20 हज़ार से घटाकर 2 हज़ार कर दी. सुनने में यह सुधार का एक अच्छा कदम लग सकता है लेकिन वास्तव में एक छलावा है. काला धन खपाने में राजनीतिक दलों को इस ऐलान से कोई मुश्किल नहीं होगी. 

भाजपा-कांग्रेस समेत देश के प्रमुख राजनीतिक दल अपनी फंडिंग का बड़ा हिस्सा अज्ञात स्रोत के रूप में दिखाते हैं. ये दल दावा करते हैं कि उनके ज़्यादातर डोनर 20 हज़ार रुपए से कम का दान देने वालों में से हैं जिनके नाम उजागर करने के लिए उन्हें कानूनी तौर पर मजबूर नहीं किया जा सकता. राजनीतिक दल अब यही कहेंगे कि उन्हें ज़्यादातर दान 2 हज़ार रुपए से कम में मिलने लगा है और ऐसा कहकर वे एक बार फिर से बच जाएंगे. 

एक तरफ सरकार पान और सब्ज़ी वाले तक को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के लिए मजबूर कर रही है. वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दलों को 2 हज़ार से कम के चंदे पर रियायत दे दी गई है. अरुण जेटली को यह सफाई देनी चाहिए कि राजनीतिक दलों को छूट का यह लाभ क्यों दिया गया?

सवाल मंशा का

वित्त मंत्री से इतर अगर कोई राजनीतिक दल चाहे तो वह अपने चंदे की घोषणा सार्वजनिक कर सकता है. फंड चेक या ऐसे माध्यम से ले सकता है जो व्यवस्था को पारदर्शी बनाए. कोई कानून दलों को ऐसा करने से नहीं रोकता लेकिन क्या वे ऐसा करना चाहते भी हैं या नहीं? 

वित्त मंत्री की मंशा अगर राजनीतिक दलों की फंडिंग में पारदर्शिता लाने की थी तो अज्ञात स्रोत से मिलने वाले दान की व्यवस्था पूरी तरह ख़त्म कर देते. फिर दल अपनी आय का ब्यौरा देने के लिए मजबूर होते और व्यवस्था में पारदर्शिता आती.

11 साल में राजनीतिक दलों को 11 हजार करोड़ का चंदा मिला लेकिन इसमें से 7,832.98 करोड़ का स्रोत पता नहीं है

एडीआर की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 11 साल में सभी राजनीतिक दलों को 11367.34 करोड़ का चंदा मिला लेकिन इसमें से 7832.98 करोड़ रुपए किसने दिए, राजनीतिक दलों ने इसके स्रोत का खुलासा जान-बूझकर नहीं किया. 

पिछले 11 सालों में कांग्रेस के कोष में 83 प्रतिशत यानी कि 3323.39 करोड़ रुपये और भाजपा के कोष में 65 प्रतिशत यानी 2125.91 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोत से जमा किए गए. बहुजन समाज पार्टी ने अपनी पूरी आय ही अज्ञात स्रोतों से दिखा दी. 

इन आंकड़ों से पता चलता है कि राजनीतिक दलों की मंशा क्या है. फंडिंग की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए इन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया जाना चाहिए. साथ ही, सभी दानदाताओं के नाम उजागर करने का नियम अनिवार्य बनाया जाए. 

ज़्यादातर देश जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है, वहां यह संभव ही नहीं है कि राजनीतिक दलों को 75 फीसदी तक चंदा या आय अज्ञात स्रोतों से मिलती रहे. लिहाज़ा, अब सियासी दलों को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस इंतज़ाम करने चाहिए न कि ऐसे ऐलान जो सिर्फ लुभाने वाले हों. 

यह लेख चुनाव सुधारों पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के संस्थापक जगदीप एस छोकर से कैच संवाददाता शाहनवाज़ मलिक की बातचीत पर आधारित है.

First published: 14 February 2017, 7:46 IST
 
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