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एस्सार लीक्स पीआईएल: जेटली, महाजन से लेकर देवगौड़ा तक उलझे हैं टैंपिंग के तार

चारू कार्तिकेय | Updated on: 24 June 2016, 8:24 IST
QUICK PILL
  • एस्सार टैपिंग के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है. इस फोन टैपिंग के बारे में पिछले तीन सालों से कई लोगों को जानकारी थी. मतलब कि यूपीए और एनडीए दोनों को ही इस बारे में जानकारी थी लेकिन किसी ने भी कार्रवाई नहीं की.
  • सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल के पीएमओ को चिट्ठी लिखे जाने के बाद यह मामला सामने आया था. उप्पल ने इस मामले में कोर्ट में पीआईएल भी दायर कर रखा है. अब यह बात सामने आ रही है कि इसी मामले में 2014 में भी सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल हुई थी.

एस्सार टैपिंग के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है. इस फोन टैपिंग के बारे में पिछले तीन सालों से कई लोगों को जानकारी थी. मतलब कि यूपीए और एनडीए दोनों को ही इस बारे में जानकारी थी लेकिन किसी ने भी कार्रवाई नहीं की. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दायर किया गया लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला.

कैच से बातचीत में सुरेन उप्पल ने बताया कि किसी माइकल महर अलवैली ने उनसे संपर्क किया जो खुद को इंटरनेशनल सिविल एनफोर्समेंट ग्रुप फॉर एंटी टेररिज्म एथिक्स (आईसीईगेट) का संस्थापक और चेयरमैन बताते हैं. उप्पल ही वह वकील हैं जिनकी पीएम से शिकायत के बाद यह पूरा मामला चर्चा में आया है.

उप्पल के मुताबिक अलवैली ने कहा कि उनके पास भी कुछ कथित रिकॉर्डिंग के हिस्से हैं और उन्होंने इस मामले में 2014 में पीआईएल दायर कर रखा है. अलवैली का कहना है कि उनके एनजीओ ने 2013 में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, सीबीआई, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट को करीब दर्जनों चिट्ठियां लिखीं लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने कई बड़े नेताओं को भी चिट्ठियां लिखीं लेकिन इसका भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

रुइया, बासित खान को पीआएल में प्रतिवादी बनाया

बाद में आईसीईगेट ने फरवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और इसमें एस्सार टेलीकॉम के तत्कालीन डायरेक्टर प्रशांत रुइया और कंपनी के विजिलेंस ऑफिसर बासित खान को प्रतिवादी बनाया गया. 

उप्पल मामले में भी बासित खान प्रमुख चेहरा हैं. पीएमओ को लिखे पत्र में उप्पल ने दावा किया है कि बासित खान की निगरानी में ही एस्सार ने टैपिंग का पूरा काम किया.

आईसीईगेट के पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना और फिर यह मुद्दा दब गया. अलवैली का कहना है कि वकीलों ने इस मामले में उनका सहयोग नहीं किया. अब अलवैली खुद को उप्पल के साथ जोड़ना चाहते हैं और इस लड़ाई को आगे बढ़ना चाहते हैं. हालांकि उप्पल ने कैच को बताया कि वह एक्टिविज्म में बहुत अधिक दिलचस्पी नहीं रखते हैं. वह बस इस मामले को सुप्रीम कोर्ट को सौंपना चाहते थे.

चौंकाने वाली जानकारी

कैच के पास आईसीईगेट का पीआईएल है, जिसमें टोनी, सतीश सेठ, एमडीए, एडीए, एएस, एसएस और राम नाइक के बीच होने वाली करीब 30 से अधिक बातचीत का जिक्र किया गया है. इसके अलावा इसमें कई बड़ी हस्तियों का जिक्र है.

  • जेटली और सुप्रिया को 10 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं. प्रमोद 5 करोड़ दे रहा है. उसे 25 करोड़ रुपये के लिए बोलो.
  • देवगौड़ा आपकी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं. आप एक दूसरे की मदद कीजिए. विजय माल्या ने देवगौड़ा को पैसे दे दिए हैं. जब मुझे विजय और गौड़ा के बारे में आपके विचार का पता चलेगा, मैं नही जाऊंगा.
  • मेरे स्तर पर इसे ठीक करो. अरुण जेटली को बताने की जरूरत नहीं है. जेटली को बताने का मतलब है कि मालकिन या वैन सबको पता चल जाएगा. मालकिन बहुत गाली दे रहा है. सड़क का बादशाह. 5 करोड़ रुपये ले लो. नीरा मना कर रही है. यह काम करो. उससे 25 करोड़ रुपये के लिए बोलो. सुप्रिय को 10 करोड़ रुपये दिए गए हैं. मेरा नाम मत लेना. क्या तुम उससे छोटे हो.
  • प्रकाश मणि का बेटा रिलायंस में काम कर रहा है. किसी भी तरह से प्रकाश मणि मेरे से डरा हुआ है. वह एक कमजोर कड़ी है.
  • बीजेपी 5 करोड़ रुपये चाहती है. बड़े हितों की खातिर यह करना होता है. डिप्टी पीएम और पीएम समाधान में मदद करेंगे. अगर सरकार को पैसों का नुकसान होता है और कुछ आरोप लगते हैं तो यह समस्या नहीं होगी. शाह आरोप पहले सामने आ चुका है.
  • सुनील मित्तल को सबक सिखाने का समय है. उसकी सेवा अब बंद हो चुकी है. सुनीत मित्तल को खास सबक देने की जरूरत है. कोई उसके साथ नहीं आ रहा है. न तो मैं और नहीं नरेंद्र शर्मा उसके साथ आ रहे हैं. बॉस यानी प्रमोद महाजन ने उसका कॉल लेने से मना कर दिया है. अब उसक चड्ढी उतारने का वक्त है. हंसते हुए. हम इंटरकनेक्शन के समर्थक में हैं और इसका पूरा श्रेय बॉस को जाएगा. हम आपको वह करने से नहीं रोक सकते जो आप करना चाहते हैं.
  • एमडीए-राम नाइक: गैस पाइपलान के लिए प्रस्तावित बैठक. बीपी ने कहा है कि यह प्रॉडक्ट पाइपलाइन होगा न कि गैस पाइपलाइन. रिटेल आउटलेट्स को सप्लाई करने का परमिशन. अधिकांश गैस की खपत महाराष्ट्र और गुजरात में होती है. एचपीसीएल और बीपीसीएल में लगी रकम करीब 1000 करोड़ रुपये है. विवेक को कॉल करो. इंडियन एक्सप्रेस के बारे में जानने की जरूरत है. तुम्हारे पास इससे निपटने का बेहतर तरीका है.
  • एसएस-एडीए: मातोश्री में साढ़े तीन बजे बैठक है. जसवंत सिंह जी. इंडियन एक्सप्रेस हमारे पीछे है और हम इस सब के पीछे. हमें यह समझना होेगा कि किस तरह से इंडियन एक्सप्रेस ने हमारे खिलाफ लिखा. टोनी से रिलायंस के खिलाफ पिछले 6 महीनों में लिखे गए सभी लेख हटाने को कहा गया है. ताकि मैं जसवंत सिंह को दे सकूं. उनके पास सभी जांच एजेंसियों का नियंत्रण है. वह आसानी से पता लगा सकते हैं कि इसके पीछे कौन है.

First published: 24 June 2016, 8:24 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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