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जम्मू-कश्मीर: क्या BJP को सपोर्ट करने के लिए राजभवन ने 'फैक्स मशीन' की खराबी का बनाया बहाना ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 November 2018, 12:17 IST

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ घंटों में बड़ी सियासी हलचल देखने को मिली. जम्मू कश्मीर की तीन पार्टियों महबूबा मुफ्ती की पीडीपी, उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. इसके लिए उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक को फैक्स किया. राजभवन के फैक्स मशीन पर किए गए इस फैक्स में राज्यपाल से मिलने और सरकार बनाने का दावा पेश करने की बात लिखी गई थी.

हालांकि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार रात टि्वटर पर एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "एक लेटर राजभवन फैक्स करने की कोशिश की गई. लेकिन हैरान करने वाली बात है कि राजभवन तक फैक्स नहीं पहुंचा. फिर राज्यपाल से फोन पर बात करने की कोशिश की. लेकिन फोन पर भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

 

दरअसल, उस लेटर में मुफ्ती ने पहले राज्यपाल को फैक्स के जरिए दावा सौंपने की कोशिश की. मुफ्ती ने लिखा था, "कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस ने राज्य में सरकार बनाने के लिए पीडीपी को समर्थन देने का फैसला किया है. नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों की संख्या 15 है और कांग्रेस के 12 विधायक हैं. अत: हमारी सामूहिक संख्या 56 हो जाती है." लेकिन उनका फैक्स राजभवन तक नहीं पहुंच पाया. 

बाद में महबूबा मुफ्ती के राजनीतिक प्रतिद्वंदी सज्जाद लोन भी सरकार बनाने का दावा भेजने की बात कही. उन्होंने ट्वीट किया, "भाजपा और 18 अन्य विधायकों के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा किया था. सरकार बनाने के दावे का लेटर राज्यपाल को भेजा था. लेकिन फैक्स मशीन काम नहीं कर रही है. हमने यह खत राज्यपाल के पीए को व्हॉट्सएप कर दिया है."

इन दोनों के ट्वीट के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी. राज्यपाल ने कहा कि सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका की वजह से उन्होंने विधानसभा भंग की है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें महबूबा मुफ्ती या सज्जाद लोन की ओर से कोई खत नहीं मिला है.

हालांकि, यह जितना आसान दिखता है इतना आसान नहीं है. दरअसल, मंगलवार को ही खबर आ रही थी कि राज्यपाल द्वारा जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग करने का निर्णय लिया जा चुका है. मंगलवार को इसकी सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार को इसका ऐलान किया जाना था. लेकिन इससे पहले ही पीडीपी-एनसी और कांग्रेस ने एक दांव खेल दिया.

इसके बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दिया और तीनों पार्टियों के सरकार बनाने के मंसूूबों पर पानी फिर गया. इसके साथ ही राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव होने की बात खुलने लगी है. इसके साथ ही खबर आ रही है कि पीडीपी राज्यपाल के निर्णय को कोर्ट में चुनौती दे सकती है.

First published: 22 November 2018, 12:09 IST
 
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