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जम्मू-कश्मीर: धारा 144 का बार-बार इस्तेमाल शाक्ति का दुरूपयोग, इंटरनेट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : SC

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 January 2020, 14:35 IST

Jammu and Kashmir सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ डाली गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार द्वारा धारा 144 का दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिए. गौरतलब है कि धारा 144 का इस्तेमाल अक्सर सरकार विरोध प्रदर्शनों को रोकने करती है, जिसमें लोग बड़ी संख्या में एक जगह पर एकत्र नहीं हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा इमरजेंसी हालात में ही इंटरनेट को बंद किया जा सकता है और इसे लंबे समय तक के लिए नहीं लगा सकते हैं.

अदालत ने सरकार से धारा 144 के तहत लगाई गई रोक को सार्वजनिक करने का भी आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान कहा "धारा 144 का इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों या वैध अभिव्यक्ति को रोकने के लिए एक उपकरण के रूप में नहीं किया जा सकता है. संविधान अलग-अलग विचारों की अभिव्यक्ति की रक्षा करता है. धारा 144 का इस्तेमाल तब तक नहीं हो सकता है जब तक कि हिंसा या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे के पर्याप्त सबूत न हो." अदालत ने कहा "धारा 144 को बार- बार दोहराना शक्ति का दुरुपयोग होगा."

जस्टिस एनवी रमना, आर सुभाष रेड्डी और बीआर गवई की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इंटरनेट सेवाओं के अनिश्चितकालीन प्रतिबंध को लेकर भी सरकार की आलोचना की. पीठ ने इंटरनेट के अधिकार को अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा बताया.

अनुच्छेद 370 के तहत प्रावधानों को निरस्त करने के बाद जम्मू- कश्मीर में प्रतिबंधों के लिए निर्णय को चुनौती दी गई थी. जम्मू और कश्मीर प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर सभी प्रतिबंधों की समीक्षा करने का आदेश दिया गया है, जिसमें इंटरनेट प्रतिबंध भी शामिल है.

प्रतिबंधात्मक आदेशों को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद, द कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन और कुछ अन्य शामिल हैं.

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First published: 10 January 2020, 14:16 IST
 
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