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कश्मीर: BSF जवान को खोलना था रोजा तो गए थे रोटी लेने, आतंकियों ने ताबड़तोड़ चलाई गोली, हो गए शहीद

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2020, 19:22 IST

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से आतंकी हमले की एक खबर सामने आ रही है. रोजा इफ्तार के लिए रोटी लेने गए BSF जवान पर आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. अचानक हुए इस आतंकी हमले में बीएसएफ जवान शहीद हो गए. इससे वह अपना रोजा भी नहीं खोल पाए और अपने देश पर जान न्यौछावर कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में बीएसएफ के दो जवानों पर आतंकी हमला हुआ. शहीद होने से कुछ मिनट पहले ही ये दोनों जवान रोजा इफ्तार के लिये रोटी एक बाजार में बेकरी दुकान से रोटी लेने गए थे. इस दौरान वापस लौटते समय मोटरसाइकिल सवार आंतकवादियों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी.

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रोजा इफ्तार के लिए रोटी लेने गए बीएसएफ जवान का नाम जिया-उल-हक है. उनके साथ राणा मंडल नामक जवान ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया. हमला श्रीनगर के बाहरी इलाके सूरा में हुआ. लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने हमले की जिम्मेदारी ली.

अधिकारियों के अनुसार, आतंकवादियों ने नजदीक से जवानों को सटाकर गोलियां मारीं. इसके बाद भीड़भाड़ वाले इलाके का फायदा उठाते हुए गलियों से निकलते हुए भाग गए. जिया-उल-हक तथा राणा मंडल दोनों ही पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद निवासी थे. हालांकि अम्फान चक्रवात के कारण उनके पार्थिव शरीर उनके घर नहीं भेजे जा सके.

दोनों के सिर में गोली लगने से गंभीर चोटें आई थीं. ये दोनों जवान बीएसएफ की 37वीं बटालियन के थे. दोनों साथी थे और पंडाक कैंप में तैनात थे. दोनों जवानों का काम गंदेरबल जिले से श्रीनगर के बीच की आवाजाही पर निगरानी रखना था. मौत से कुछ ही मिनट पहले दोनों जवान जिया-उल-हक के इफ्तार के लिये रोटी लेने गए थे.

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जवानों ने रोटी तो खरीद ली थी, लेकिन जिया-उल-हक अपना इफ्तार नहीं कर सके और रोजे की हालत में ही शहीद हो गए. 37वीं बटालियन के जवानों ने बताया कि वे रोजेदार थे और पूरे दिन पानी की एक बूंद पिये बिना ही इस दुनिया से रुख्सत हो गए. अपने साथियों की मौत पर जवानों ने शोक व्यक्त किया.

जिया उल हक साल 2009 में बीएसएफ में शामिल हुए थे. उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी नफीसा खातून के अलावा दो बेटियां थीं. उनकी एक पांच साल की मूकबधिर बेटी जेशलिन जियाउल है. इसके अलावा छह महीने पहले ही उनकी पत्नी ने जेनिफर जियाउल नामक बेटी को जन्म दिया था. मु र्शिदाबाद कस्बे से लगभग 30 किलोमीटर दूर रेजिना नगर में उनका घर था.

वहीं राणा मंडल के परिवार में मा-पिता के अलावा एक बेटी तथा पत्नी हैं. वह मुर्शिदाबाद के साहेबरामपुर गांव के रहने वाले थे. केन्द्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद दोनों कश्मीर में तैनात किए गए थे. वे 24 या 25 मई को आने वाला ईद का त्योहार भी नहीं मना सके.

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First published: 21 May 2020, 19:12 IST
 
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