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कश्मीर में तैनात पुलिसकर्मी की पत्नी ने लिखी भावुक पोस्ट, घर पर नहीं रहा जाता अकेले

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 September 2018, 16:09 IST

हमारे जवान देश की सेवा में परिवार से सैकड़ों मील दूर तैनात रहते हैं. ऐसे में जवानों को परिवार से मिलने का कई-कई महीनों तक मौका नहीं मिलता, बावजूद इसके वो देश की सेवा में डटे रहते हैं. दूसरी और सैनिकों का परिवार हर रोज उनकी सलामती की दुआ मांगता है.

इसी बीच देश की सेवा में घाटी में तैनात एक सिपाही की पत्नी ने एक भावुक पोस्ट लिखी है. जिसमें जवानों के परिवार का दर्द साफ झलकता है. घाटी में तैनात एक सिपाही की पत्नी आरिफा तौसिफ ने एक स्थानीय न्यूज वेबसाइट पर खुले खत में लिखा कि, "पुलिसकर्मियों की पत्नियां अपने बच्चों को सिंगल पेरेंट्स की तरह पालती हैं. जब पति ड्यूटी पर होते हैं तो मदद करने के लिए कोई साथ नहीं होता. पति के साथ रहना तो सपने जैसा होता है. हमें एक दूसरे के साथ लंच और डिनर किए हुए अरसा बीत जाता है.”

आरिफा आगे लिखती हैं, “ये सामान्य सी चीजें हम जैसी औरतों के लिए एक सपने की तरह होता हैं. हम या तो किसी भी फैमिली फंक्शन में एक साथ शामिल होने के लिए प्लानिंग करते रहते हैं, या फिर किसी जवान की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए. एक साथ कहीं बाहर जाना हमारे लिए दिन में सपने देखने की तरह होता है.”

आरिफा आगे लिखती हैं, “जवानों की पत्नियां सबसे ज्यादा झूठ बालती हैं. हमें बच्चों से झूठ बोलना पड़ता है कि उनके पिता वीकेंड पर अगले त्यौहार पर या उनके स्कूल फंक्शन में उनके साथ होंगे. ये सब कहकर हम अपने आप से भी झूठ बोलते रहते हैं.” आरिखा लिखती हैं कि, “हमारे नसीब में बस इंतजार और इंतजार लिखा है. जब कभी उन्हें घर आना भी होता है तो वे बस कुछ घंटों के लिए आते हैं, दिमागी रूप से वे घर पर भी अपनी ड्यूटी कर रहे होते हैं. इस तरह के हालात हम पत्नियों को हाइपरटेंशन से ग्रसित बना रहा है."

आरिफा ने इस पोस्ट में लिखा कि, “जवानों पर खतरा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है. कहीं से भी किसी जवान के शहीद होने की खबर आती है तो हमारी असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है. स्थानीय प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई का आरोप लगता है ये भी बेहद चिंताजनक है. ये चिंता उस समय बढ़ जाती है, जब आतंकी हमले होते हैं और हम घर से बाहर होते हैं तो इसके लिए भी लोग हमें जिम्मेदार ठहराते हैं.” 

अपनी पोस्ट के आखिर में आरिफा लिखती हैं कि, “हमारे बच्चे इन सब चीजों को समझते हैं. मैं दुआ करती हूं कि मेरा राज्य इन अंधेरे बादलों से छंटे औऱ हम एक सुखी और शांत कश्मीर को देखें."

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First published: 3 September 2018, 16:09 IST
 
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