Home » इंडिया » Jammu-Kashmir: Governor orders to dissolved state Legislative Assembly, who will be the next CM
 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग, PDP-कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन बनते ही आई मुसीबत

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 November 2018, 8:08 IST

जम्मू-कश्मीर में सत्ता के लिए साथ आये कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन मुश्किल में पड़ गया है. राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर की विधानसभा भंग करने का आदेश दिया है. राज्यपाल सत्यपाल मालिक के इस फैसले के बाद से राज्य में सरकार बनने की सारी संभावनाएं खत्म हो गयी हैं. गौरतलब है कि मुफ़्ती ने कांग्रेस के साथ हाथ मिला कर सरकार बनाने के दावा पेश किया था.

वहीं इस गढ़बंधन के बाद से पीडीपी में दरार की भी खबरें आनी लगी थीं. एक तरफ जहां महबूबा मुफ़्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन पत्र के साथ राज्यपाल को चिट्ठी लिखने की बात कही वहीं पीडीपी विधायक इमरान अंसारी ने भी राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश करने की बात कही. अंसारी का कहना है कि उनके पास 18 विधायक हैं.

 

गौरतलब है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू-कश्मीर में धारा 53 के तहत विधानसभा भंग करने का आदेश दिया. वहीं राज्यपाल के इस फैसले पर मुफ़्ती ने कहा कि उनका सरकार बनाने का फैसला वैध था, इसके बावजूद विधानसभा भंग कर दी गई. वहीं इस मामले में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ''अभी पार्टियों में बात भी नहीं हुई थी और विधायकों की बैठक बुलाई गई थी लेकिन बीजेपी नहीं चाहती जम्मू कश्मीर में कोई सरकार बने. आजाद ने कहा कि बीजेपी का तानाशाही रवैया फिर सामने आया है. अफवाहों से बीजेपी डर गई और विधानसभा भंग कर दी गई. आजाद ने कहा कि हम प्रदेश में चुनाव चाहते हैं.''

वहीं अगर सूत्रों की मानें तो विधानसभा भंग करने से पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू कश्मीर के इस समीकरण के बारे में केंद्र सरकार से चर्चा की थी. इस मामले में केंद्र मंत्रालय को एक रिपोर्ट भी भेजी गई है. एनसी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट में लिखा कि 'इसे संयोग नहीं मान सकते कि इधर महबूबा मुफ्ती सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रही थीं और उधर राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी.'

 

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर की तीन प्रमुख मुख्यधारा के राजनीतिक दलों- पीडीपी, एनसी और कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए हाथ मिलाने का फैसला किया था. राज्य विधानसभा में पीडीपी की 28 सीटें हैं, नेशनल कॉन्फ्रेंस की 15 और कांग्रेस की 12 सीटें हैं. 87 सदस्यीय सदन में तीनों पार्टियों के पास 55 सदस्य है जबकि सरकार बनाने के लिए 44 संख्या की जरूरत है.

सूत्रों की मानें तो पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती चाहती थी कि फारूक अब्दुल्ला गठबंधन का नेतृत्व करें, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सरकार का हिस्सा बनने और पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन को बाहर से समर्थन देने का फैसला नहीं किया है. सूत्रों का कहना है कि बुखारी मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार रहे हैं.

First published: 22 November 2018, 7:40 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी