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मोदी की सलाह से कुएं और खाई के बीच फंसे जनधन खाताधारक

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:37 IST
(कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पीएम मोदी की सलाह है कि जन धन खाताधारी अपने अकाउंट में जमा दूसरों के पैसे को नहीं निकालें. उन्होंने जन धन खाते में रुपया जमा करने वालों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है. 
  • वहीं आयकर विभाग ने कहा है कार्रवाई सिर्फ़ उनके ख़िलाफ़ नहीं होगी, जिनका पैसा जन धन खातों में पाया जाएगा, बल्कि उन खातों के मालिकों पर भी होगी. 

इन दिनों रेडियो पर जनहित में एक सूचना जारी हो रही है, जिसकी शुरुआती लाइन है, 'ना लगाऊं सम्मान दांव पर, ना लगाऊं खाते भाव पर.' यह सूचना आयकर विभाग की तरफ से प्रायोजित है और इसमें जन धन खाते वालों से अपील की गई है कि वे अपने खाते में दूसरों के पैसे जमा नहीं करवाएं. अगर आप पूरा मैसेज ध्यान से सुनें, तो यह खाताधारियों को जनधन में जमा पैसा अपने पास में रखने की प्रधानमंत्री की सलाह से बिल्कुल अलग है.

नोटबंदी के बाद जिस तरह से इन खातों की जमा राशि में उछाल आया है, उससे साफ है कि कुछ लोग वास्तव में इन खातों में अपना बेहिसाब पैसा जमा करवाने में सफल हुए हैं. मुरादाबाद की एक रैली में मोदी के बयान से लगता है कि ऐसा सच में हुआ है. उन्होंने ऐसे खातेधारियों को इस पैसे में से कुछ भी निकालने को मना किया है. उन्होंने दूसरों के पैसे अपने खाते में रहने देने को कहा है. उन्होंने यह भी कहा कि आप पैसा अपने खाते में रखो, अगर कोई परेशान करता है तो हम ऐसे लोगों को जेल भेजने का ‘रास्ता निकालेंगे.’

इसके ठीक उलट रेडियो कहता है, जब इन जन धन खातों की असलियत सामने आएगी, तो सिर्फ़ उन्हें ही सजा नहीं दी जाएगी, जिनका यह पैसा होगा, बल्कि उन खातेधारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिनके खातों का गलत इस्तेमाल हुआ है. मुरादाबाद की रैली से एक दिन पहले आयकर विभाग का बयान था, ‘कर चोरी करने वाले समाज-विरोधी तत्वों को अपने खातों का दुरुपयोग करवाने में उनका हाथ रहा, तो वे भी खतरे में पड़ जाएंगे.’

गरीब संकट में

वंचित वर्ग के खिलाफ सरकार के दोहरे मतलब वाले बयान का यह विचित्र उदाहरण है. जिन खातों का दुरुपयोग अधिकारियों से बचने के लिए किया गया है, वे गरीब तो हमारे सिस्टम के पहले ही शिकार हो गए हैं. संपन्न धोखेबाज उन पर अपने बैंक खाते मुहैया कराने का दबाव डालने में सफल हो गए हैं. इससे इस योजना की कमज़ोरी सामने आती है. क्या कोई इस पर सच में विश्वास करेगा कि वे धोखेबाजों के खिलाफ खड़े होने की ताकत जुटा पाएंगे और नतीजों की चिंता नहीं करेंगे.

मीडिया की एक रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है कि ग्रामीणों के मुताबिक पीएम के शब्द असलियत से मेल नहीं खाते. उन्होंने सच्चाई बयान कर दी कि यदि कोई जन धन खाताधारी अपने बैंक खाते को किसी और के दुरुपयोग करने पर, उन पैसों को रखने का दुस्साहस करेगा, तो उसके परिवार की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाएगी. रिपोर्ट है कि एक ड्राइवर ने बताया कि ऐसे ‘विश्वासघाती’ और उसके परिवार के किसी भी सदस्य को उस इलाके में काम नहीं मिलेगा. 

फिर भी असलियत में त्रासदी यह नहीं है, क्योंकि गरीब लोग किसी भी तरह स्थानीय ताकतों के साथ समझौता कर लेंगे, जैसा कि वे रोज करते हैं. उन्हें बस यह नहीं बताना है कि किसका पैसा उनके खाते में पड़ा है, और इसी से वे जहां भी हैं, शांति और सुरक्षा से जी सकेंगे. पर जो नतीजे आयकर अधिकारियों की कार्रवाई से आएंगे, उनसे निपटना मुश्किल होगा. और यह मुसीबत आएगी ही, जब एक बार उनके खातों में अवैध पैसा जमा होने का खुलासा होगा.

इधर कुआं, उधर खाई

आयकर विभाग ने साफ कहा है कि केवल उन लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं होगी, जिनका पैसा उन खातों में पाया जाएगा, बल्कि उन खातों के मालिकों के खिलाफ भी होगी, जिनके खातों का गलत इस्तेमाल हुआ है. नोटबंदी ने गरीबों को फंसा दिया है. पहले तो उनकी अल्प बचत खतरे में पड़ गई. फिर उनके रोज़गार को झटका लगा. अब बैंक खातों ने उनकी दुर्दशा कर दी. किसकी सुनें प्रधानमंत्री की या आयकर अधिकारियों की?

अगर वे प्रधानमंत्री की सुनते हैं, और कर अधिकारियों को कर चोरी करने वालों की शिनाख्त करने और पकड़वाने में मदद करते हैं, तो वे अपने स्थानीय दबंगों और संरक्षकों के खिलाफ जाने का जोखिम उठाते हैं. अगर वे प्रधानमंत्री की सलाह नहीं मानते हैं, और चुप रहते हैं, तो आयकर वाले उन्हें नहीं बख्शेंगे. 

कुल मिलाकर, वे कोई भी कदम चुनें, दोनों का एक ही नतीजा होने वाला है- वे कानून की गिरफ्त में होंगे, एक ऐसी व्यवस्था में खुद को पाएंगे, जो उनके लिए किसी काम की नहीं है. अब उनके सामने लाख टके का सवाल है कि क्या आयकर अधिकारी उनके साथ नरमी बरतेंगे?

First published: 7 December 2016, 7:54 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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