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हरियाणा जाट आंदोलन: कुछ पुलिसकर्मियों ने की थी सरकार से बगाावत

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 April 2016, 12:46 IST

हरियाणा में फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कुछ पुलिस कर्मियों ने विद्रोह कर दिया था. हिंसा को लेकर गठित राज्य सरकार की कमेटी की जांच में कई बयान दर्ज होने के बाद ये खुलासा हुआ है.

बयान से पता चला है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारियों के आदेश मानने से इनकार कर दिया था. बताया जा रहा है कि इनमें से ज्‍यादातर पुलिसकर्मी जाट समुदाय से थे.

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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक प्रकाश सिंह पैनल की जांच में ये तथ्य सामने आया है कि हिंसा के दौरान कई जिलों में औसतन 60-70 पुलिसकर्मियों ने अपनी जिम्‍मेदारियों निभाने से इंकार कर दिया था.

पुलिसकर्मियों के इस व्यवहार से हिंसक भीड़ को बढ़ावा मिला. जिसके बाद कई दुकानों और घरों को जला दिया गया. जांच पैनल में यूपी के रिटायर्ड डीजीपी प्रकाश सिंह, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विजय वर्धन और डीजीपी केपी सिंह शामिल हैं.

बागी पुलिसकर्मियों की लिस्ट तैयार

पैनल ने इन पुलिसकर्मियों की लिस्‍ट भी बनाई है. जिसमें उनके नाम, रैंक, बेल्‍ट नंबर, पोस्टिंग की जगह और पोस्‍ट से गायब रहने के दिनों की संख्‍या भी लिखी गई है.

प्रदेश सरकार की ओर से गठित पैनल अपनी रिपोर्ट के आधार पर आरोपी पुलिस‍कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का सुझाव दे सकता है. पैनल ने 26 फरवरी से जांच शुरू की थी.

रिपोर्ट को बनाने में पैनल ने 3000 चश्‍मदीदों के बयान दर्ज किए हैं. गवाहों के बयान वीडियो और लिखित दोनों रूपों में दर्ज हैं.  

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पैनल की रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्‍य सामने आए हैं. रिपोर्ट से पता चला है कि 19 फरवरी को हिंसा के भड़कने के बाद जाट समुदाय के कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपना दफ्तर छोड़ दिया था.

इसके बाद हिंसक भीड़ ने रोहतक, झज्‍जर, सोनीपत और गोहाना में करीब एक दर्जन पुलिस चौकियों और थानों को भारी नुकसान पहुंचाया था.

पैनल की जांच में ये भी सामने आया कि हिंसा के दिनों में कुछ जाट पुलिसकर्मी 6-7 दिनों तक ड्यूटी पर नहीं आए. जब हिंसा थम गई तो वो वापस ड्यूटी पर आ गए.

खट्टर सरकार पर यशपाल मलिक का निशाना

इस मामले में दूसरा पक्ष जानने के लिए कैच न्यूज ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक से भी बात की. मलिक का कहना है कि इस पूरी रिपोर्ट के बारे में उन्हें पता है.

साथ ही मलिक ने कहा कि कुछ गैर जाट अधिकारियों ने जाट पुलिसकर्मियों को फंसाने के लिए बयान दर्ज कराए हैं. प्रदर्शन के दौरान जाट पुलिस कर्मियों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए गोलियां चलाईं.

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मलिक ने आरोप लगाया कि खट्टर सरकार कोशिश कर रही है कि जाटों की छवि को खराब किया जाए. इसके अलावा यशपाल मलिक ने कहा कि 10 मई को दिल्ली में एक दिन के धरने का आयोजन किया गया है.

प्रदर्शन के दौरान 13 राज्यों के प्रमुख जाट नेता हिस्सा लेंगे.  साथ ही आगे के आंदोलन के बारे में भी विचार-विमर्श किया जाएगा.

First published: 18 April 2016, 12:46 IST
 
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