Home » इंडिया » Catch Hindi: jat agitation violence is still haunting manohar lal khattar haryana government
 

जाट हिंसाः खत्म नहीं हो रही है मनोहर लाल खट्टर की मुश्किलें

राजीव खन्ना | Updated on: 18 April 2016, 23:19 IST
QUICK PILL
  • फरवरी में हरियाणा में जाटों ने नौकरी और शिक्षा में आरक्षण को लेकर हिंसक प्रदर्शन किए थे. उपद्रव के दौरान कई लोगों की जानें गई थीं और हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति को क्षति पहुंची थी.
  • हिंसा को रोकने को लेकर हरियाणा सरकार लगातार आचोलना के केंद्र में रही है. मुरथल में सामूहिक बलात्कार के आरोपों को पुलिस की एफआईआर में शामिल करने को लेकर एक बार फिर सरकार विपक्ष के निशाने पर है. पुलिस ने पहले किया था मामले से इनकार.

हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार फरवरी में हुए जाट उपद्रव को लेकर एक बार फिर आलोचनाओं के घेरे में है. ज्यों-ज्यों अदालतों और दूसरी जगहों पर जाटों द्वारा की गयी हिंसा के नए ब्यौरे सामने आ रहे हैं, सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता सरकार पर समय पर कार्रवाई न करने का आरोप लगा रहे हैं.

ताजा मामला मुरथल में कई महिलाओं के संग हुए कथित सामूहिक बलात्कार का है. आखिरकार पुलिस ने इस आरोप को मामले की एफआईआर में शामिल कर लिया है.

पढ़ेंः जाट हिंसा का संदेश है, खट्टर से न हो पाएगा...

पुलिस ने ये फैसला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा मामले पर लताड़ लगाए जाने के बाद लिया. हाईकोर्ट ने मामले का स्वतःसंज्ञान लेते हुए इसकी जांच का आदेश दिया था. पुलिस ने पहले-पहल ऐसी किसी घटना से इनकार किया था.

जब फरीदाबाद की एक छात्रा और एक एनआरआई महिला ने पत्र लिखकर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया तो पुलिस को एफआईआर में इसे शामिल किए जाने को बाध्य होना पड़ा. हालांकि मामले की जांच कर रही आईजी ममता सिंह ने हाईकोर्ट से कहा है कि अभी तक किसी भी कथित पीड़िता ने पुलिस से सीधा संपर्क नहीं किया है.

फरवरी में जाटों ने नौकरी और शिक्षा में आरक्षण को लेकर हिंसक प्रदर्शन किए थे जिसमें 30 लोग मारे गए थे

खट्टर सरकार ने 18 फरवरी से 23 फरवरी तक रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जिंद, हिसार, कैथल और भिवानी में हुई घटनाओं और मानवाधिकारों के हनन की समग्र जांच के लिए सेवानिवृत्त जज एसएन झा के नेतृत्व में एक जांच आयोग का गठन किया है.

जांच आयोग का गठन विपक्षी दलों आईएनएलडी और कांग्रेस के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं के दबाव का नतीजा है.

पढ़ें: कथित मुरथल बलात्कार खट्टर की असफलताओं की एक और बानगी है

हरियाणा सरकार ने पहले यूपी के पूर्व पुलिस प्रमुख प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में जाट हिंसा की जांच के लिए एक कमेटी बनायी थी. लेकिन इस कमेटी के गठन के तत्काल बाद इस सवाल खड़े होने लगे क्योंकि ये कमेटी कमिशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट 1952 के तहत नहीं बनाई गई थी.

किसी ठोस कानूनी आधार से महरूम ये कमिटी केवल सरकारी कर्मचारियों की भूल-गलती की जांच करेगी. हाईकोर्ट ने भी इस कमिटी के संवैधानिक आधार पर सवाल उठाया.

सरकार की अक्षमता


राजनीतिक टिप्पणीकार गुरमीत सिंह कहते हैं, "इस सबसे सरकार की निर्णय लेने की अक्षमता और अस्पष्टता का पता चलता है. इससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है. सरकार को हिंसा होने के तत्काल बाद ही न्यायिक जांच की घोषणा कर देनी चाहिए थी."

गुरमीत सिंह आगे कहते हैं, "इसी तरह पुलिस को सामूहिक बलात्कार के आरोपों को खारिज करने और अदालत के आदेश का इंतजार करने के बजाय उसकी तत्काल जांच करनी चाहिए थी. इतनी हीला-हवाली के बाद मामले की जांच के लिए पहल करने से सरकार की छवि खराब होती है."

जब मुरथल में कथित सामूहिक बलात्कार की खबरें आई थीं तो पुलिस ने इसे सिरे से नकार दिया था

एक अन्य राजनीतिक टिप्पणीकार बलवंत तक्षक भी कई जांच दलों के गठन को सरकार का गलत फैसला मानते हैं.

बलवंत तक्षक कहते हैं, "कई जांच दलों के गठन से भ्रम की स्थिति बन गयी है. इससे सरकार की छवि खराब हुई है. न्यायिक जांच, मुरथल सामूहिक बलात्कार की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी), प्रकाश सिंह पैनल और अब एसएन झा आयोग. सरकार को इस मामले में स्पष्ट रवैया दिखाना चाहिए था."

जजों की सुरक्षा


रोहतक के जिला और सत्र न्यायधीशों ने शिकायत की है कि सरकार उन्हें भी पर्याप्त सुरक्षा देने में विफल रही थी. इससे सरकार की और किरकिरी हुई.

हाईकोर्ट को दी गयी रिपोर्ट में इन जजों ने बताया है कि किस तरह न्यायिक अधिकारियों को मोटरसाइकिल से पास के गांवों में भागने के लिए मजबूर किया गया. जजों को उपद्रवियों से बचने के लिए अपने नेमप्लेट भी हटाने पड़े थे.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि "उपद्रव के समय राज्य प्रशासन पुरी तरह पंगु बना रहा."

नौकरी और सरकारी शिक्षा संस्थानों में आरक्षण की मांग के लिए किए गए जाट उपद्रव में कम से कम 30 लोग मारे गए थे. हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था. हरियाणा पुलिस ने इस उपद्रव के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी 2110 एफआईआर दर्ज की है. इन मामलों में अब तक 567 लोगों की गिरफ्तारी हुई है.

जख्म पर मरहम


हरियाणा की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में जाट और गैर-जाट जातियों को करीब लाने के लिए सद्भावना रैली निकालने की होड़ सी लग गयी है. जाट उपद्रव के बाद से राज्य का सामाजिक सामंजस्य तार-तार हो गया है.

हालांकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने कार्यकर्ताओं को इस मकसद के लिए एकजुट करने में विफल दिखायी दे रही हैं.

पढ़ेंः  खट्टर सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड से मांगा 1000 करोड़

बीजेपी कुरुक्षेत्र के अपने सांसद राजकुमार सैनी से सामाजिक सद्भभाव की अपील नहीं करवा सकी. वो लगातार जाटों के खिलाफ बयान देते रहे हैं. सैनी ने आरोप लगाया कि जाटों द्वारा की गयी हिंसा को विदेश से आर्थिक मदद मिली थी.

सैनी के बयानों की काफी आलोचना भी हुई थी. कई आलोचक सैनी पर सरकार द्वारा अंकुश लगाने में विफल रहने को हिंसा फैलने के एक अहम कारण मान रहे हैं.

वहीं कांग्रेस ने जब छह अप्रैल को सद्भभावना कैंपेन शुरू किया तो अशोक तंवर और भूपिंदर सिंह हूड्डा ने अलग-अलग कार्यक्रम कराए. यानी इस गंभीर मसले पर भी पार्टी के अंदर दो फाड़ हैं.

First published: 18 April 2016, 23:19 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी