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कथित मुरथल बलात्कार खट्टर की असफलताओं की एक और बानगी है

राजीव खन्ना | Updated on: 1 March 2016, 17:37 IST
QUICK PILL
  • मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने को लेकर जाट सहज नहीं है. खट्टर पंजाबी समुदाय के हैं और उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पंजाबी समुदाय ने कथित तौर पर जाटों पर तंज कसा.
  • शुरुआत में दंगाइयों ने सभी प्रॉपर्टीज को निशाना बनाया लेकिन बाद में उन्होंने चुन चुनकर गैर जाट प्रॉपर्टीज को निशाना बनाना शुरू कर दिया. दंगाइयों ने न केवल स्कूलों को निशाना बनाया बल्कि निजी अस्पतालों के आईसीयू में भी तोड़ फोड़ की.

मुर्थल में कथित तौर पर 22 फरवरी को महिलाओं के साथ हुए बलात्कार की घटना लगातार तूल पकड़ती जा रही है. चार दिन के जाट आंदोलन के दौरान हरियाणा की भाजपा सरकार नाकार सिद्ध हुई. चार दिन तक टालमटोल के बाद अब हरियाणा सरकार ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है. डीआईजी राजश्री सिंह इसका नेतृत्व करेंगी.

22 फरवरी की रात मुर्थल में कथित रूप से 30-40 प्रदर्शनकारी जाटों के समूह ने जीटी रोड से गाड़ी को अगवा करके उसमें बैैठी महिलाओं के साथ साममूहिक बलात्कार किया. यह आरोप भी लगा कि पीड़ित महिलाओं को स्थानीय पुलिस ने कानूनी पचड़े से बचने की सलाह देकर मामला दर्ज नहीं किया.

अराजकता की यही स्थिति कमोबेश पूरे हरियाणा की रही. हरियाणा के लोगों की माने तो आंदोलन के दौरान चार दिनों तक सड़कों पर जातीय संघर्ष भी देखने को मिला और इस दौरान पुलिस और प्रशासन सिरे से गायब रही. जमीनी हकीकत की पड़ताल करने के बाद यह समझा जा सकता है कि पुलिस ने दंगों के दौरान पूरी तरह से आंखे मूंदे रखा.

पानीपत-रोहतक राजमार्ग पर जलाए गए टायरों को देखकर आगे की तबाही का अंदाजा लगाया जा सकता है. कुछ मीटर की दूरी पर क्षतिग्रस्त या जलाए गए वाहनों को देखा जा सकता है. पूरी सड़क तबाही और बर्बादी के मंजर से अटी पड़ी है. अभी भी बड़ी संख्या में पेट्रोल पंप काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि दंगाइयों ने पेट्रोल की मशीन को पूरी तरह से तबाह कर दिया है.

रोहतक और गोहाना में नष्ट की गई 90 फीसदी संपत्ति गैर जाटों की थी

गोहाना में हर तरफ आपको जली हुई दुकान और शो रूम दिखाई देंगे. दुकानों को लूटने के बाद आग के हवाले कर दिया गया. ऐसा ही आलम रोहतक में है. रोहतक में सबसे ज्यादा दंगों ने तबाही मचाई. 

गोहाना के मुकाबले रोहतक में हुआ नुकसान जबरदस्त है. रोहतक की तबाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यहां की फिजां में अभी भी जलाए गए टायरों की महक मौजूद है.

रोहतक और गोहाना में नष्ट की गई 90 फीसदी संपत्ति गैर जाटों की थी. यह मुख्य रूप से सैनी, पंजाबी और दलितों की थी. रोहत के लोग बताते हैं कि शुरुआत में तो जाटों की संपत्ति को भी निशाना बनाया गया लेकिन बाद में यह पूरा दंगा गैर जाटों की संपत्ति को नष्ट करने की मुहिम पर जा पहुंचा.

लोगों का कहना है कि गोहाना में करीब 100 दुकानें और कारोबारी केंद्र जला दिए गए जबकि रोहत में इनकी संख्या 500 के पास रही. दुकानों को लूटे जाने के मामले में भी एक पैटर्न दिखा. 

रोहतक में हुए दंगों के गवाह डॉ. देवेंदर सांगवान ने कहा, 'दंगाइयों ने उन सामनों को लूटकर बेच दिया जो आज के समय में प्रतिष्ठित मानी जाती हैं. उन्होंने ब्रांडेड कपड़े, जूते, मोबाइल की दुकानों, इलेक्टॉनिक शो रूम और ऑटोमोबाइल को निशाना बनाया. मैंने लोगों को सड़कों पर कपड़े और जूते बदलते देखा. इस दौरान जो उन्हें फिट नहीं आया उन्होंने या तो उसे नाले में फेंक दिया या उसे जला दिया.'

गोहाना के सुनील सैनी बताते हैं, 'मैं यह नहीं मान सकता है कि यह पहले से बनाई गई योजना के तहत नहीं हुआ. मेरे दुकान की शटर को सफाई से काटा गया और वह इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान उठा ले गए. इसके बाद उन्होंने दुकानों को आग लगा दी.' 

वहीं कुछ दुकानदारों ने भय और आतंक की वजह से अपना नाम तक बताने से इनकार कर दिया. चौंकाने वाला पहलू यह भी रहा कि केवल शहरी इलाकों में दंगा हुआ और दंगाई गांव से आए. वह एक अफवाह पर इकट्ठा हुए या फिर एक वैसे काम के लिए जिसमें सबकी मंजूरी थी.

हरियाणा में जाट और सैनी समुदायों के पास जमीन है और इसे लेकर दोनों के बीच विवाद भी है

गोहाना के सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता त्यागी ने कहा, 'ग्रामीण बाजारों में आपको बड़े और महंगे इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट को लूटने का मौका नहीं मिलेगा. इसके अलावा गांव में सब एक दूसरे को जानते हैं तो उनके पहचान के सामने आने का खतरा बना रहता है.'

पुरानी लड़ाई

जाट आंदोलन शुरू होने के बाद जातिगत लड़ाई शुरू होने के पीछे कई कारण है. गोहाना में लोगों ने बतायाकि पड़ोस के गांवों में जाटों और सैनियों के बीच में पुरानी अदावत है. दोनों समुदायों के पास जमीन है और इसे लेकर दोनों के बीच विवाद भी है.

इसके अलावा जाटों और दलितों के बीच भी करीब डेढ़ दशक से जंग चली आ रही है जब वाल्मीकि समुदाय के कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक जाट युवा की हत्या कर दी और फिर इसके बाद कई दलितों के घर जला दिए गए. अहम बात यह है कि शहर के बीचों बीच दलितों की बड़ी आबादी रहती है.

स्थानीय लोगों की माने तो मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने को लेकर जाट सहज नहीं है. खट्टर पंजाबी समुदाय के हैं और उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पंजाबी समुदाय ने कथित तौर पर जाटों पर तंज कसा. पूरे इलाके में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि एक गैर जाट के मुख्यमंत्री बनने को लेकर जाट खुश नहीं हैं.

लोगों का कहना है कि पहले दौर में आरक्षण की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया. उन्होंने कांग्रेस के जाट विधायक जगबीर मलिक के घर पर भी पत्थर फेंके. हालांकि बाद में उन्होंने गैर जाटों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. हिंसा में एक दलित युवा की मौत हो गई.

रोहतक के नागरिकों ने कहा कि जाट आंदोलनकारी उस वक्त भड़क गए जब उन्होंने आंदोलन के दौरान एक भीड़ को यह कहते हुए सुना 'मुख्यमंत्री साहब मत घबराना, 35 बिरादरी आपके साथ है.' इसके बाद अफवाहों का दौर चला जिसमें यह कहा गया कि जाट युवाओं को पीटा जा रहा है. 

शुरुआत में दंगाइयों ने सभी प्रॉपर्टीज को निशाना बनाया लेकिन बाद में उन्होंने चुन चुनकर गैर जाट प्रॉपर्टीज को निशाना बनाना शुरू कर दिया. दंगाइयों ने न केवल स्कूलों को निशाना बनाया बल्कि निजी अस्पतालों के आईसीयू में तोड़ फोड़ की. 

सांगवान ने कहा, 'जो कुछ भी हुआ उसमें सामाजिक और आर्थिक पहलु को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. वह रोहतक को फूंक दो के नारे लगा रहे थे. मुझे लगता है कि उनके भीतर यह भावना काम कर रही थी कि शहर के लोग उनकी कीमत पर बेहतर जिंदगी जी रहे हैं. शहर में बड़ी संख्या में लोग दूसरे की सपंत्ति की हिफाजत करने के लिए आगे आए और इसमें जाट भी शामिल थे. उन्हें पहले दिन इस मामले में कामयाबी तो मिली लेकिन बाद में वह दंगाइयों के आगे बेबस हो गए.'

लोगों में इस बात को लेकर कोई मतभेद नहीं है कि नेताओं ने अपने राजनीतिक हितों की खातिर दंगे को हवा दी. हालांकि वह यह बताने में विफल रहे कि इस दंगे से किस दल को क्या फायदा हुआ. कुछ लोगों का मानना है कि दंगाइयों को कांग्रेस का समर्थन था. हालांकि बड़ी संख्या में लोगों को यह लगता है कि कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि जाट मतदाताओं में उसकी पकड़ बेहद सीमित है. खासकर रोहतक, झज्जर और सोनीपत वाले इलाकों में. 

कुछ लोगों का मानना है कि दंगों के पीछे इनेलोद की भूमिका थी क्योंकि जाटों के धुव्रीकरण से सबसे ज्यादा फायदा उन्हें ही होगा. हालांकि दोनों ही दलों ने इन आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि उनके नेताओं ने लगातार शांति की अपील की. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि बीजेपी जाटों के खिलाफ सभी गैर जाट जातियों को धु्रवीकृत करना चाहती है.

बहरहाल इन सभी आरोप और प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि इन दंगों ने हरियाणा के सामाजिक ताने-बाने को क्षत-विक्षत कर दिया है.

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First published: 1 March 2016, 17:37 IST
 
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