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जाट हिंसा: खट्टर सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड से मांगा 1000 करोड़

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 April 2016, 16:39 IST

हरियाणा की खट्टर सरकार ने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (एनडीआरएफ) से क्षति-पूर्ति की मांग की है. राज्य सरकार ने एनडीआरएफ 1000 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की है.

हरियाणा में बीजेपी की खट्टर सरकार ने प्राधिकरण से मांग की है कि जाट आरक्षण के दौरान मानवीय हिंसा के पीड़ितों को उचित मुआवजा और राहत प्रदान करने के साथ-साथ राज्य में पीड़ितों के राहत एवं पुनर्वास के लिए उन्हें इस सहायता राशि की आवश्यकता है.

इस मामले में राज्य सरकार के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि फरवरी, 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन से हुई अशांति के दौरान सरकारी और निजी दोनों सम्पतियों को भारी नुकसान हुआ है.

इस आंदोलन में हरियाणा के अधिकांश जिले प्रभावित रहे, लेकिन इनमें आठ जिले हिंसा से अत्यधिक प्रभावित रहे हैं. सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक हिंसा में 555 करोड़ रुपये मूल्य की निजी अचल सम्पतियों के 2077 मुआवजा के दावे प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा भारी संख्या में सरकारी सम्पतियों और 300 से ज्यादा निजी वाहनों को नष्ट किए जाने की रिपोर्ट भी राज्य सरकार को मिली है.

मुआवजे की दावा राशि का वास्तविक आकलन सर्वे विशेषज्ञों के साथ मिलकर जिला प्रशासन कर रहा है. इसके लिए राज्य सरकार ने अपनी योजना बजट के कोष को परिवर्तित करके इसे मानवीय आपदा के पीड़ितों को अंतरिम उपाय के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की है. ताकि प्रभावित पीड़ितों को आजीविका शुरू करने के लिए राहत दी जा सके.

6 अप्रैल, 2016 तक राज्य सरकार द्वारा पीड़ितों को राहत के रूप में 53.63 करोड़ रुपये की राशि वितरित कर दी गई है.

प्रवक्ता के मुताबिक सरकार ने आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण को यह भी बताया है कि आंदोलन के दौरान हुई मानवीय हिंसा में सम्पतियों को भारी नुकसान पहुंचा है. जिसके लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन अधिनियम के तहत राहत और पुनर्वास सहायता उपलब्ध करवाना अनिवार्य था.

First published: 11 April 2016, 16:39 IST
 
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