Home » इंडिया » Jat wants to campaign againt BJP in UP, Uttarakhand and Punjab
 

तीन राज्यों में भाजपा की खाट खड़ी करना चाहते हैं जाट

राजीव खन्ना | Updated on: 23 January 2017, 9:30 IST
(कैच न्यूज़)

भाजपा द्वारा पिछले 3 सालों में अपने वादे पूरे न करने से खिन्न जाट समुदाय ने उत्तर प्रदेश (उ.प्र.), उत्तराखंड और पंजाब में भाजपा का न केवल विरोध करने का निर्णय किया है बल्कि पार्टी उम्मीदवारों को हराने के लिए काम करेंगे.

जाटों ने अकेले उत्तर प्रदेश के लिए 125 टीमों का गठन किया है. उत्तराखंड और पंजाब के लिए भी ऐसी ही एक-एक टीम बनाई गई है. उनकी रणनीति साफ है. वे हर हाल में भाजपा उम्मीदवार की हार सुनिश्चित करना चाहते हैं. इसके लिए वे भाजपा के सामने खड़े विरोधी उम्मीदवारों को वोट देकर उन्हें जिताने की कोशिश करेंगे.

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा, हम हर सीट पर या तो समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को जिताएंगे या बसपा उम्मीदवार को. ऐसी ही रणनीति पंजाब और उत्तराखंड के लिए भी बनाई गई है. हमारा एक मात्र उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि जो पार्टी धर्म और जाति के नाम पर लोगों को बांटने का काम करती है; ऐसी पार्टी की सरकार किसी राज्य में नहीं बनने देंगे.

जाट पिछले साल किए गए अपने वादे नहीं निभाने के लिए हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार और केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं. इन सरकारों ने गत वर्ष जाट आंदोलन के दौरान जाटों को सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण देने की बात कही थी. इसके अलावा वे हरियाणा सरकार द्वारा जाटों को निशाना बनाए जाने पर आक्रोषित हैं. 

इन मुद्दों पर नाराज़गी

समिति ने 7 ऐसे मुद्दे गिनाए हैं जिन पर सरकार अपना वादा नहीं निभा सकी. इनमें पहला है-आरक्षण. मलिक का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून गुमराह करने वाला और गलत है. इसकी वैधता की जांच होनी जरूरी है. दूसरा, जाट आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी देने का वादा. तीसरा वादा, जाट आंदोलन के बाद हिंसा में घायल हुए लोगों का इलाज.

साथ ही जाट कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमासर सैनी पर भी लगाम लगाने की मांग कर रहे हैं, जो जाटों के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं. मलिक ने कहा, ‘‘मोदी हर छोटी-छोटी बात पर ट्वीट करते हैं लेकिन दो साल से सैनी के बारे में चुप्पी साधे हुए हैं. इससे भाजपा का लोगों को बांटने का खेल सीधा समझा जा सकता है.’’

जाटों का यह भी कहना है कि खट्टर सरकार ने जाट हिंसा के दौरान भाजपा नेताओं और मंत्रियों के घरों और सम्पत्तियों पर हुए हमलों में तो जांच का आदेश दे दिया लेकिन दूसरे दलों के नेताओं के लिए यह आदेश नहीं दिया. हमारा कहना सिर्फ इतना है कि इस आंदोलन से जब परेशानी सभी को हुई थी तो फिर यह भेदभाव क्यों?

जाटों की मांगें

जाटों की मांग है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए नेताओं की रिहाई करवाई जाए. वे उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जिन्होंने आंदोलन के दौरान जाट युवाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी. इन अधिकरियों को बर्खास्त कर देना चाहिए.कुछ ऐसे उदाहरण सामने हैं जब पुलिस ने झूठे मामलों में शिकायत दर्ज की और हाई कोर्ट से लोगों को जमानत मिली.’’

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के हरियाणा प्रभारी अशोक बलहारा ने कहा, ‘‘हम 29 जनवरी के बाद से हमारी मांगे मनवाने के लिए प्रदेश भर में धरने आयोजित करेंगे और जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जाती, यह धरने जारी रहेंगे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने बिना किसी चेतावनी के आम लोगों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी. अगर कश्मीर में आंदोलनकारियों को पूरी छूट है तो हरियाणा में क्यों नहीं.’’

गैर भाजपा दल को समर्थन

जहां तक चुनावों में भाजपा के विरोध का सवाल है; समिति का जोर इस बात पर रहेगा कि पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार के बजाय आप या कांग्रेस के उम्मीदवार को ही जिताया जाए.

समिति के पंजाब प्रदेश प्रभारी करनैल सिंह भावड़ा ने कहा, ‘‘पंजाब की कम से 25 सीटों पर हिन्दू जाटों का प्रभुत्व है. सिख जाटों का कम से कम 90 सीटों पर प्रभाव बना हुआ है. उन्होंने कहा, भाजपा ने 2012 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनावों में पंजाबी जाटों को आबीसी में शामिल करने का वादा किया था लेकिन अभी तक इस संबंध में कुछ नहीं किया गया.

उन्होंने कहा, पंजाब में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने के लिए हरियाणा के जाट नेता भी आएंगे. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी जाट अच्छी खासी तादाद में हैं. खास तौर पर मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर में.

उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून के कुछ हिस्सों और ऊधम सिंह नगर में जाट मतदाता ठीक-ठाक संख्या में हैं. उत्तराखंड प्रशासन के लिए जाटों की उपस्थिति ही बहुत है. यहां भी जाट वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं. यहां हरिद्वार में 11 और ऊधम सिंह नगर में 9 सीटें जाट बहुल इलाके हैं. राज्य विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 70 है.

अब चूंकि जाट भाजपा के विरोध में आ खड़े हुए हैं, इसलिए पार्टी के लिए मुश्किलें तो बढ़ी ही हैं.

First published: 23 January 2017, 9:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी