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जाट करेंगे दोबारा प्रदर्शन लेकिन क्या खट्टर सरकार तैयार है

राजीव खन्ना | Updated on: 2 June 2016, 7:37 IST
QUICK PILL
  • हरियाणा में जाट एक बार फिर आरक्षण को लेकर प्रदर्शन करने वाले हैं. फरवरी में हुए हिंसक प्रदर्शन में तीस से ज्यादा लोगों की जानें गई थीं. तीन सौ से ज्यादा घायल हुए थे. हजारों करोड़ की संपत्ति नष्ट हो गई थी.
  • राज्य सरकार ने दावा किया है कि इस बार प्रदर्शन शांतिपूर्ण होंगे लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि राजनीतिक मसला है जिसका समाधान राजनीतिक हो सकता है.

हरियाणा सरकार 5 जून से शुरू होने वाले जाट प्रदर्शनों के लिए कमर कस रही है. राज्य के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने दावा किया है कि जाट नेताओं ने उन्हें आश्वासन दिया है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा लेकिन ये सवाल अभी से उठने लगे हैं कि क्या सरकार ने पिछली बार हुए हिंसक जाट उपद्रव से सबक सीखा है?

जाटों ने इस साल फरवरी में सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन किया था. जिसमें कम से कम 34 लोगों की जानें गई थीं, 324 लोग घायल हुए थे और लूट-आगजनी में हजारों करोड़ की संपत्ति बर्बाद हो गई थी.

उत्तर प्रदेश और असम के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट में जाटों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान सरकारी पदाधिकारियों की भूमिका की कड़ी आलोचना की गई है.

दोबारा प्रदर्शन की वजह

जाट इस बार पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिसमें अदालत ने सरकार द्वारा जाटों समेत पांच अन्य जातियों को पिछड़ा वर्ग 'सी' श्रेणी बनाकर आरक्षण देने का प्रावधान पर रोक लगा दी. 

अदालत ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया. अदालत ने राज्य सरकार को 21 जुलाई तक अपना जवाब देने के लिए कहा है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन का प्रमुख कारण आरक्षण की मांग है  लेकिन जाट नेता फरवरी में हुए उपद्रव से जुड़े लूट और हिंसा के मामले वापस लेने के लिए भी दबाव बनाना चाहते हैं.

जाट नेताओं का कहना है कि समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एबीजेएएसएस) के नेता यशपाल मलिक ने राज्य सरकार की फरवरी की हिंसा में मारे गए लोगों को राहत राशि देने और उनके परिवार वालों को नौकरी देने की आलोचना की है.

मलिक कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साध रहे हैं. मलिक का आरोप है कि सैनी ने जाटों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम किया है. हाल ही में जिंद में दिए गए एक भाषण में जाटों को भड़काने के लिए मलिक पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.

सरकार की तैयारी

सीएम खट्टर ने कहा कि जाटों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार है. फिर भी सरकार नहीं चाहती कि हालात फरवरी की तरह बनें जिनसे पूरा देश दहल गया था.

जिंद, कैथल, भिवानी, हिसार, सोनीपत, झज्जर और रोहतक जैसे जिलों में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं. इन सभी जिलों में फरवरी में काफी हिंसा हुई थी. मुनक नहर की निगरानी भी केंद्रीय सुरक्षा बलों के जिम्मे है ताकि प्रदर्शनों के चलते दिल्ली को पानी की आपूर्ति बाधित न हो.

सूत्रों के अनुसार संवेदनशील जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी गई जिसके अनुसार किसी स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों को इकट्ठा होने पर रोक है. इसके अनुसार चाकू, कुल्हाडी, लाठी, तलवार या छुरा इत्यादि दूसरे धारदार हथियार लेकर चलने पर भी पाबंदी रहेगी.

राज्य सरकार ने चंडीगढ़ में एक दंगा नियंत्रण कक्ष भी बनाया है जो चौबीसों घंटे काम करेगा.

राजनीतिक दोषरोपण का खेल

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार जाट मुद्दे का कोई राजनीतिक समाधान निकालने में विफल रही है.

दो दशकों से हरियाणा में रिपोर्टिंग कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, "हालात नरम हैं. हर कोई उम्मीद कर रहा है कि चीजें शांतिपूर्ण होंगी और फरवरी जैसी हिंसा नहीं होगी लेकिन ये कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है. ये राजनीतिक मसला है, जिसका समाधान राजनीतिक ही हो सकता है. लेकिन इस दिशा में किसी तरह का प्रयास होता नहीं दिखा."

वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि खट्टर सरकार में कई ऐसे जाट नेता हैं जो प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित कर सकते हैं. लेकिन इसकी जगह केवल दोषारोपण की राजनीति हो रही है.

राज्य के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने हाल ही कांग्रेसी नेता पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में हुई हिंसा का जाति या आरक्षण से कोई संबंध नहीं था बल्कि कांग्रेसी नेताओं ने युवाओं का इस्तेमाल करते हुए सुनियोजित तरीके से अभूतपूर्व राजनीतिक और आपराधिक हिंसा को अंजाम दिया.

अभिमन्यु सिंह ने सुदीप कलकल से हुड्डा के करीबी संबंध होने का भी आरोप लगाया. कलकल पर हिंसा भड़काने का मामला दर्ज किया गया है.

भारतीय लोक दल (आईएनएलडी) भी लगातार हुड्डा पर हमला कर रही है. पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह चौटाला ने हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि वो जाट  आरक्षण को लेकर कभी भी गंभीर नहीं थे. चौटाला के अनुसार अगर हुड्डा इस मसले पर गंभीर होते तो उपद्रव और हिंसा नहीं होती.

यूपी कनेक्शन

राजनीतिक टिप्पणीकार बलवंत तक्षक कहते हैं कि इस बार सरकार सुरक्षित तरीका चुन रही है. तक्षक कहते हैं, "हैरानी की बात है कि हाई कोर्ट ने बगैर नोटिस जारी किए हुए सीधे स्थगन आदेश दे दिया लेकिन मेरा मानना है कि सरकार को स्थगन आदेश तत्काल हटवाना चाहिए. ये तय है कि इस मामले पर लंबी कानूनी लड़ाई चलेगी."

मामले के राजनीतिक समाधान के मसले पर तक्षक कहते हैं, "विपक्ष से बातचीत का कोई मतलब नहीं है. पिछली बार इसकी कोशिश की गई थी जो विफल रही."

तक्षक मानते हैं कि जब तक यूपी विधानसभा चुनाव नहीं हो जाता सरकार जाटों से सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहेगी.

तक्षक कहते हैं, "पश्चिमी यूपी में बीजेपी को जाटों का वोट चाहिए. तब तक वो जाटों को मिला कर रखना चाहेगी."

First published: 2 June 2016, 7:37 IST
 
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