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शिमला पीलिया की चपेट में

राजीव खन्ना | Updated on: 27 January 2016, 8:41 IST
QUICK PILL
  • पर्यवेक्षकों के अनुसार हजारों लोग पीलिया से प्रभावित हुए हैं और सात की जान जा चुकी है. हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक सिर्फ एक ही मृत्यु की पुष्टि की है.
  • शिमला नगर निगम ने अश्वनी खड्ड से पानी लेना बंद कर दिया है और इस लापरवाही के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया है. कथित तौर पर मलयाना में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट महीनों से खराब पड़ा है.

अश्वनी खड्ड से आ रहे दूषित पानी के कारण शिमला में पीलिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. यह छोटी नदी हिमाचल की राजधानी की आबादी के लगभग एक तिहाई हिस्से को जलापूर्ति करती है. 

पर्यवेक्षकों के अनुसार हजारों लोग इससे प्रभावित हुए हैं और सात की जान जा चुकी है. हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक सिर्फ एक ही मृत्यु की पुष्टि की है.

लेकिन स्वतंत्र सूत्रों का कहना है कि बीमारी से प्रभावित हर व्यक्ति सरकारी अस्पताल नहीं जाता है और तमाम लोग निजी अस्पतालों और लैब में परीक्षण करवाते हैं. अक्सर निजी और झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा भी इसका इलाज किया जाता है और अभी भी काफी जनसंख्या ऐसी है जो पीलिया को झाड़ फूंक से खत्म होने वाली बीमारी मानती है.

शिमला नगर निगम ने अश्वनी खड्ड से पानी लेना बंद कर दिया है और इस लापरवाही के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया है. कथित तौर पर मलयाना में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट महीनों से खराब पड़ा है जिसके चलते यह समस्या पैदा हुई है.

अश्वनी खड्ड पर पानी के लिए निर्भर सोलन कस्बे में भी 70 से ज्यादा पीलिया के मामलों की सूचना है.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के शिमला के महापौर संजय चौहान और उनके डिप्टी तिकेंदर पंवार ने इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिससे एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. इस बीच इस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का ठेकेदार फरार है.

मलयाना संयंत्र के कामकाज में कई विसंगतियां पाई गईं:

  • संयंत्र में उपकरण महीनों से खराब पड़े हैं.
  • संयंत्र में पानी को सही करने के लिए केमिकल नहीं हैं.
  • 2014 में खरीदा गया ब्लीचिंग पाउडर अभी भी प्रयोग किया जा रहा था.
  • यहां बिजली का बैकअप भी नहीं था.

इसका दोष राज्य सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भी जाता है.

अब तक एक जूनियर इंजीनियर और एक सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को गिरफ्तार किया गया है. कथित तौर पर मलयाना संयंत्र के कामकाज से संबंधित फर्जी कागजात तैयार करने के लिए इन्हें निलंबित भी कर दिया गया.

प्रभावित लोगों में आईएएस अधिकारी प्रित्यु मंडल और शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. डीके वर्मा समेत तमाम सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं. 

शनिवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने स्थिति की समीक्षा की और दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया.

उप महापौर पंवार ने कैच को बताया, "जब तक ट्रीटमेंट प्लांट संतोषजनक ढंग से काम नहीं करता, हम अश्वनी खड्ड से पानी नहीं लेंगे. हम गुमा और गिरि नदियों के अन्य स्रोतों से पानी की आपूर्ति कर रहे हैं."

इस प्रकोप से 4,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. यह आपराधिक लापरवाही वाला कार्य है

समस्या को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की बात करते हुए उन्होंने कहा, "संयंत्र की कोई निगरानी क्यों नहीं हो रही थी? सरकार द्वारा इसकी अनुमति क्यों दी जा रही थी?"

बताया जाता है कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा शिमला में हेपेटाइटिस ए और ई वायरस पाए जाने की पुष्टि के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा स्वयं इस मामले को रोजाना देख रहे हैं. 

2007 में पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने अश्वनी खड्ड से दूषित पानी के नियमित अंतराल पर आने के कारण पीलिया की संभावना बताई थी. संस्थान ने सीवेज के उचित निपटान और पीने के पानी के पर्याप्त क्लोरिनेशन का सुझाव दिया था.

उसी वर्ष हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने निवासियों के लिए स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपचार संयंत्र के लिए एक उचित मार्ग के निर्माण के लिए राज्य को निर्देश दिया था. लेकिन राज्य और केंद्र की सरकारें इस समस्या का समाधान करने में विफल रहीं.

पूर्व कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव कुलदीप राठौर ने निवासियों के लिए साफ पानी की आपूर्ति करने में विफल रहने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी. 

वास्तव में शहर में बोतलबंद पानी की बिक्री में एक उछाल आया है

उन्होंने कहा, "इस प्रकोप से 4,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. यह आपराधिक लापरवाही वाला कार्य है." 

हालांकि यह मामला कुछ समय के लिए सुर्खियों में रहा लेकिन इससे शिमला में पर्यटकों का आना प्रभावित नहीं हुआ. एक पर्यवेक्षक के मुताबिक वैसे भी पर्यटक ज्यादातर बोलतबंद पानी ही पीते हैं.

वास्तव में शहर में बोतलबंद पानी की बिक्री में एक उछाल आया है. इस बीच शिमला और सोलन में प्रशासन द्वारा खुले में खाद्य सामग्रियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

यह कहा जा रहा है कि यह प्रकोप उस वक्त आया है जब काफी संख्या में निवासियों, विशेषकर छात्रों ने सर्दियों की छुट्टियों के अवकाश के चलते मैदानों की ओर रुख कर लिया है. वर्ना इससे पीड़ितों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती.

First published: 27 January 2016, 8:41 IST
 
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