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जयललिता भी शराबबंदी की राह पर, क्या यह उनके लिए आसान होगा?

एस मुरारी | Updated on: 13 April 2016, 18:19 IST

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने शनिवार को राज्य के मतदाताओं से वादा किया कि अगर उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में दोबारा सत्ता मे आने में सफल होती है तो वे भी राज्य में चरणों में मद्यनिषेध लागू करेंगी.

चेन्नई के आईसलैंड मैदान में एक विशाल रैली के माध्यम से अपनी पार्टी के चुनाव अभियान का शुभारंभ करते हुए जयललिता ने यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में शराबबंदी रातोंरात लागू नहीं हो सकती क्योंकि 1971 में डीएमके नेता और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि द्वारा शराब पर लगा प्रतिबंध हटा लेने के बाद से एक पूरी पीढ़ी शराब पीने की आदी हो चुकी है.

राज्य में प्रतिवर्ष 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की शराब की बिक्री होती है और देश में बनी विदेशी शराब का तमाम खुदरा वितरण का काम सरकार के नियंत्रण में होने के चलते इन चुनावों में मद्यनिषेध एक प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आया है.

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यह शराब की बिक्री से होने वाली आमदनी के चलते हो रहा है. एआईएडीएमके सरकार प्रति परिवार को हर महीने 20 किलो चावल निःशुल्क दे पाने के अलावा उन्हें मिक्सी, ग्राइंडर, बिजली के पंखे, लैपटाॅप और ऐसे ही अन्य सामान उपहार स्वरूप उपलब्ध करवा रही है.

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करुणानिधि पर हमला

सभा में चेन्नई के साथ ही पड़ोसी दो जिलों के लिये प्रत्याशी घोषित करने के साथ जयललिता ने करुणानिधि पर तीखा हमला बोला.

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी मद्यनिषेध को लेकर बात कर सकता है. लेकिन करुणानिधि को ऐसा करने का कोई हक नहीं है. पूर्ण मद्यनिषेध की उनकी वकालत कुछ ऐसी होगी जैसे शैतान खुद शास्त्रों का पाठ कर रहा हो.’’

उन्होंने याद दिलाया कि 1937 में मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रधानमंत्री राजाजी ने पहली बार सलेम में मद्यनिषेध को लागू किया था जिसे स्वतंत्रता के बाद पूरे तमिलनाडु में लागू किया गया.

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अगस्त 1971 में जब मुख्यमंत्री के रूप में करुणानिधि ने राज्य में मद्यनिषेध को वापस लेने का फैसला किया तो भारी बरसात में राजाजी उनके घर गये और उनसे ऐसा न करते हुए अपने इस फैसले पर पुर्नविचार करने की प्रार्थना की. लेकिन करुणानिधि ने राजाजी की बात सुनने से इंकार करते हुए व्यंग कसा, ‘‘ऐसा तो नहीं है कि सिर्फ पिए हुए लोग ही अपनी पत्नियों के साथ मारपीट करते हैं.’’

मद्यनिषेध की राजनीति

हालांकि जयललिता ने इसके बाद की घटनाओं का जिक्र करना मुनासिब नहीं समझा और साथ ही इस बात को भी भूल गईं कि कैसे मद्यनिषेध का वास्ता विभिन्न राजनीतिक दलों के हिचकोले खाते भाग्य से जुड़ा रहा है.

चुनाव हारने की एक श्रृंखला के बाद करुणानिधि ने 1973 में दोबारा मद्यनिषेध लागू कर दिया था. भ्रष्टाचार और शराब के खिलाफ लड़ाई लड़ने के नाम पर सत्ता में आए अन्ना डीएमके के संस्थापक एमजी रामचंद्रन ने 1977 में शराब के पूर्ण प्रतिबंध की नींव रखी.

हालांकि 1980 में रामचंद्रन ने अपने पूर्व के रुख के विपरीत लोकलुभावन स्कूली बच्चों के लिये दोपहर के भोजन की योजना की फंडिंग के लिये राज्य में शराब की दुकानें खुलवाईं. यह योजना व्यापक रूप से सफल रही. लेकिन इसके बाद किसी ने भी राज्य में मद्यनिषेध की दिशा में सोचने की जहमत नहीं की.

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1991 में पहली बार राज्य की बागडोर संभालने के बाद जयललिता ने जिस पहली फाइल पर दस्तखत किये थे वह दोबारा मद्यनिषेध लागू करने की थी और उन्होंने अपने संबोधन में इस बात का जिक्र भी किया. हालांकि वे यह भूल गईं कि कैसे बाद में उनकी सरकार ने यू-टर्न लिया और आईएमफल की थोक और खुदरा वितरण का सारा काम अपने नियंत्रण में ले लिया.

सरकार ने राज्य में शराब की बिक्री और खपत को पूरी तरह से बढ़ावा दिया. एक अनुमान के मुताबिक पूरे तमिलनाडु में करीब छह हजार शराब की दुकानें और बार हैं. राज्य में शराब की खपत एक नए स्तर को छू रही है जिससे सालाना राजस्व के रूप में 27 हजार करोड़ रुपये की आमदनी होती है.

Jayalalithaa_Jaison G/India Today Group/Getty Images

चुनावी माहौल को भांपते हुए करुणानिधि भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने भी झूठमूठ ही सही सत्ता में आने पर मद्यनिषेध करने की घोषणा कर दी. जयललिता ने उनकी इस बात की काट करने के लिये ही यह आलोचनात्मक टिप्पणी की.

हालांकि करुणानिधि की आलोचना करना आसान है. जयललिता ने कहा कि मद्यनिषेध को रातोरात लागू नहीं किया जा सकता.

जयललिता ने कहा कि मद्यनिषेध को रातोरात लागू नहीं किया जा सकता

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित की जा रही शराब की दुकानों और बार की संख्या में कटौती करने के अलावा उनके खुलने के समय में भी कटौती की जाएगी. उन्होंने इसी के साथ पूरे राज्य में नशा-मुक्ति केंद्र भी खोलने की बात कही.

मद्यनिषेध की उनकी यह प्रस्तावित नीति पिछले वर्ष केरल की ओमान चांडी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रारंभ की गई चरणबद्ध नीति की नकल है.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं पूरी तरह से मद्यनिषेध के पक्ष में हूं. लेकिन मैं कभी हवाई वादे नहीं करती. मैं इस मुद्दे पर चिंतन करूंगी और चरणों में कानून को लागू करूंगी.’’

यह देखते हुए कि सरकार की शराब नीति ने महिलाओं को अलग-थलग कर दिया है उन्होंने महिलाओं के लिये निःशुल्क सैनेटरी नैपकीन से लेकर गरीब परिवार की लड़कियों के लिये विवाह सहायता, शिक्षा में मदद सहित तमाम कल्याणकारी योजनाओं की सूची भी सामने रखी.

जयललिता का संबोधन जया टीवी द्वारा प्रसारित किया गया जिसके माध्यम से वे पूरे राज्य की जनता तक अपनी बात पहुंचाने में सफल रहीं.

First published: 13 April 2016, 18:19 IST
 
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