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जयललिता की बीमारी खिंच सकती है, तमिलनाडु में कार्यवाहक मुख्यमंत्री चाहिए

एस मुरारी | Updated on: 12 October 2016, 7:33 IST

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता गत 22 सितम्बर से अस्पताल में हैं. चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उनकी देखरेख कर रहे डॉक्टरों ने अब साफ कर दिया है कि उनका लम्बे समय तक इलाज चलेगा और उन्हें अस्पताल में रहना होगा. ऐसे में अब यह मांग जोर पकड़ती जा रही है कि जब तक वह पूरी तरह स्वास्थ्य लाभ नहीं कर लेतीं, तब तक उनकी जगह किसी को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बना दिया जाए ताकि जरूरी कामकाज में बाधा उत्पन्न न होने पाए.

हालांकि, कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए जाने पर कोई भी फैसला टाल दिया गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके मंत्री हर चीज के लिए उन पर ही निर्भर रहे हैं. उनके मंत्रीगण भी अंतरिम व्यवस्था किए जाने के बारे में इस कारण कुछ नहीं बोलना चाहते क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी बात का कहीं गलत मतलब न निकाल लिया जाए.

हालांकि अब लोग इस तर्क से उबर रहे हैं. अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि जयललिता वेंटीलेटर सपोर्ट पर हैं, उनके फेफड़ों में संक्रमण हो गया है और उनके शुगर लेबल की हर समय जांच की जा रही हैं क्योंकि वह लम्बे अर्से से डायबिटिक हैं. अस्पताल ने जानबूझकर या चतुराई बरतते हुए इस विषय पर कुछ नहीं बताया है कि जयललिता होश में हैं या नहीं.

अब उनके काम कौन निबटाएगा?

पिछले तीन हफ्तों से, जब से वह अस्पताल में भर्ती हुई हैं, उनकी मुलाकात किसी से नहीं हुई है. केवल डॉक्टर्स ही उनसे मुखातिब होते हैं. तमिलनाडु के कार्यवाहक राज्यपाल सी विद्यासागर राव, विपक्ष के नेता एमके स्टालिन, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता वेंकैया नायडू आदि अन्य कई लोग अस्पताल जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछ चुके हैं.

सभी नेताओं ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. लगे हाथ इन लोगों ने निर्वाचित सरकार के रहते हुए अनिर्वाचित अधिकारियों द्वारा सरकार का कामकाज देखे जाने पर चिन्ता भी जताई है. पूर्व मुख्य सचिव शीला बालाकृष्ण, जो अपने रिटायरमेन्ट के बाद मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार के रूप में काम कर रही हैं, के पास अनधिकारिक रूप से प्रशासन का प्रभार है. जबकि जयललिता की निकटतम मित्र और करीबी शशिकला नटराजन सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के मामलों को देख रहीं हैं.

कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक के साथ जो विवाद चल रहा है, वह सुप्रीम कोर्ट में है. डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि के साथ ही उनके पुत्र स्टालिन ने भी कहा है कि राज्य के हितों को (जयललिता के सहयोगी नेताओं के किसी भी कार्य से) प्रभावित नहीं होने देना चाहिए जबकि राज्य में निर्वाचित सरकार मौजूद है.

उल्लेखनीय है कि केन्द्र द्वारा जल विवाद को लेकर मुख्यमंत्रियों की बुलाई गई पिछली बैठक में जयललिता भाग नहीं ले सकीं थी. इस बैठक में केरल और पुडुच्चेरी के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था. जयललिता की जगह राज्य के मुख्य सचिव ने बैठक में भाग लिया था और उनका बयान पेश किया था.

तो सरकार को वे फोटो जारी करनी चाहिए ताकि उन अफवाहों पर विराम लग सके जो जनता में फैली हुईं हैं

उधर, करुणानिधि ने कहा है कि यदि सचुमच में जयललिता ने अस्पताल में मुख्य सचिव से मुलाकात की है और अपने बयान को अंतिम रूप दिया है तो सरकार को वे फोटो जारी करनी चाहिए ताकि उन अफवाहों पर विराम लग सके जो जनता में फैली हुईं हैं. उनके इस कथन पर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है.

करुणानिधि ने यह भी सवाल किया है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल राव, जिनके पास तमिलनाडु का भी अतिरिक्त प्रभार है, इस संकट में सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभा रहे हैं. राव चेन्नई आकर अस्पताल में जयललिता को देखने गए हैं. एक अन्य घटनाक्रम में राव ने राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ओ पन्नीरसेल्वम, पीडब्ल्यूडी मंत्री एडापड्डी के पलानीसामी तथा मुख्य सचिव पी राम मोहन राव समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर केन्द्रीय जल संसाधन सचिव और उच्च स्तरीय तकनीकी दल के मुखिया की राज्य विजिट पर चर्चा की है.

उल्लेखनीय है कि कावेरी बेसिन की वास्तविक स्थिति के आकलन के लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय तकनीकी दल का गठन किया है. यह दल प्रभावित क्षेत्रों के किसानों से मिलकर कावेरी डेल्टा क्षेत्र की जमीनी स्थिति को जानेगा और मौके का अध्ययन करेगा.

राज्यपाल को क्या करना चाहिए

अब जबकि स्टालिन ने अंतरिम मुख्यमंत्री की जरूरत जताते हुए गेंद फेंक दी है, राज्यपाल ज्यादा लम्बे समय तक एआईएडीएमके के मंत्रियों के इनकार को टालते नहीं रह सकते हैं. एआईएडीएमके पास तमिलनाडु में पर्याप्त बहुमत है. लोगों को याद होगा कि जब जयललिता को कोर्ट के विपरीत फैसले की वजह से मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था, तब जयललिता की जगह पन्नीरसेल्वम मुख्यमंत्री बने थे. पन्नीरसेल्वम को जयललिता ने अपने स्थानापन्न के रूप में मुख्यमंत्री पद के लिए चुना था. पन्नीरसेल्वम दो बार राज्य के स्थानापन्न मुख्यमंत्री रह चुके हैं और दोनों ही बार जयललिता ने उन्हें चुना था.

राज्यपाल अपनी शक्तियों से भली प्रकार वाकिफ हैं और जयललिता के ठीक हो जाने तक एक बार फिर पन्नीरसेल्वम को अंतरिम मुख्य मंत्री बना सकते हैं. राज्यपाल उनसे गृह विभाग जैसे अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों का प्रभार संभालने को भी कह सकते हैं. पन्नीरसेल्वम इन मंत्रालयों को जयललिता के बाद देखते ही रहे हैं. मुख्यमंत्री के पास बचे रहे अन्य मंत्रालयों का बंटावारा अन्य मंत्रियों के बीच किया जा सकता है.

एक तथ्य यह है कि पिछले कई दिनों में कई वरिष्ठ नेता जयललिता को देखने अस्पताल आ चुके हैं. इससे उनके गम्भीर स्वास्थ्य का पता चलता है. अब समय आ गया है कि राज्यपाल इस दिशा में आगे कार्रवाई करें.

First published: 12 October 2016, 7:33 IST
 
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